पाकिस्तानी मरीजों को इलाज के लिए हिंदुस्तानी वीजा नहीं!

संपादकीय
07 मई 2017


पाकिस्तान ने भारत सरकार से इस बात को लेकर विरोध दर्ज कराया है कि वहां से हिन्दुस्तान आने वाले मरीजों को भारत में इलाज के लिए वीजा देना बंद कर दिया है। भारत की आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के चलते आस-पड़ोस के सभी देशों से बड़ी संख्या में मरीज आते हैं, और छत्तीसगढ़ की राजधानी में भी एक समाजसेवी अस्पताल में कई देशों के मरीजों का, बच्चों का ऑपरेशन हो रहा है। लेकिन पाकिस्तान के इस विरोध के साथ इस बात को जोड़कर देखना होगा कि सरहद पर किस तरह का तनाव चल रहा है, और इस तनाव की वजह से खेल, सिनेमा, टीवी, साहित्य समेत इलाज जैसी गैरफौजी बातों पर भी असर पड़ रहा है।
दोनों देशों में फौजी लोगों, और फौज को लेकर युद्धोन्माद से भरे हुए लोग सरहद के तनाव को बढ़ाते चलने में लगे रहते हैं। दूसरी तरफ अनगिनत लोग ऐसे हैं जिनके एक-दूसरे देश में रिश्तेदार हैं, तीर्थ हैं, और दिलचस्पी है, लेकिन इन लोगों का आना-जाना इस पर टिका रहता है कि कब दोनों देशों के बीच तनाव कितना है। पाकिस्तान में जाहिर तौर पर इलाज की वैसी सहूलियतें नहीं है जैसी कि हिन्दुस्तान में हैं, और इसीलिए वहां से लोग गंभीर बीमारियों के इलाज और ऑपरेशन के लिए भारत आते हैं। यहां पर हम भारत सरकार को यह सुझाव देना चाहेंगे कि सरहद पर चाहे कितना ही तनाव क्यों न हो, मरीजों पर किसी तरह की रोक नहीं लगानी चाहिए। जो लोग इलाज के लिए दूसरे महंगे देशों में नहीं जा पाते, वे ही लोग भारत आते हैं। और एक बड़ा देश, एक विकसित देश होने के नाते भारत की यह जिम्मेदारी है कि इस मानवीय काम में वह सरहद के किसी तनाव को आड़े न आने दे। अगर जरूरत हो तो वहां के फौजी अफसरों को, वहां के नेताओं को इलाज के लिए आने से रोक दे, लेकिन वहां के आम लोगों को तो बिल्कुल नहीं रोकना चाहिए, और वहां के बड़े लोग, खास लोग, ऐसे हैं जो कि अपनी काली या सफेद कमाई से दुनिया के महंगे देशों में भी जा सकते हैं।
भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव का एक बहुत बुरा नुकसान दोनों देशों के सबसे गरीब लोगों को होता है जिनके मुंह का कौर छीनकर फौजों पर खर्च किया जाता है, और सरकारों के कामकाज का एक बड़ा हिस्सा इसी सरहदी तनाव पर खर्च हो जाता है। अगर ऐसा न हो तो दोनों देशों में कोई कुपोषण न रहे, कोई गरीब न रहे, और कोई बिना इलाज के न रहे। दिक्कत यह है कि सरहद के तनाव के फैसले सरहद से दूर राजधानियों में बैठकर लिए जाते हैं, और ऐसे लोगों द्वारा लिए जाते हैं जो कुपोषण या भूख को जानते भी नहीं हैं। अगर इन दोनों देशों में रिश्ते ठीक रहें, तो आपसी कारोबार भी इतना बढ़ सकता है कि किसी तीसरे मुल्क तक कमाई जाने के बजाय आपस में ही बहुत सा फायदा हो सकता है। नेता और फौजी अफसर, हथियारों के सौदागर, और उनके दलाल मीडिया के कुछ लोग, ये तमाम लोग मिलकर देशों के बीच तनाव को अपना पेशा बना लेते हैं, और इसके बीच दोनों तरफ के गरीब पिसते हैं। सरकारों से परे जनता के बीच से यह जागरूकता उठनी चाहिए कि दोनों देशों के बीच तनाव से किसी का फायदा नहीं हो रहा है, और दोनों देश दीवालिया हो रहे हैं।

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