केंद्र सरकार की अवैज्ञानिक सोच की मिसालें खतरनाक

संपादकीय
14 जून 2017


केंद्र सरकार के एक मंत्रालय की बुकलेट में गर्भवर्ती महिलाओं को सेक्स और मांसाहार से दूर रहने की सलाह दी गई है ताकि उनके बच्चे अच्छे हो सकें, उनकी सेहत ठीक रह सके। आयुष मंत्रालय ने अपनी एक रिपोर्ट में स्वस्थ्य जच्चा और सेहतमंद बच्चे के लिए सलाह दी है कि गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान इच्छा, क्रोध, लगाव, नफरत और वासना से खुद को अलग रखना चाहिए। साथ ही बुरी सोहबत से भी दूर रहना चाहिए। हमेशा अच्छे लोगों के साथ और शांतिप्रिय माहौल में रहें। आयुष मंत्रालय ने मदर एंड चाइल्ड केयर नामक बुकलेट जारी की है जिसमें, ये सलाह दी गई हैं।
आयुष मंत्रालय की सलाह यहां तक सीमित नहीं रही। मंत्रालय आगे कहता है कि यदि आप सुंदर और सेहतमंद बच्चा चाहती हैं तो महिलाओं को इच्छा और नफरत से दूर रहना चाहिए, आध्यात्मिक विचारों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। अपने आसपास धार्मिक तथा सुंदर चित्रों को सजाना चाहिए। केंद्रीय आयुष मंत्री श्रीपद नाइक ने पिछले सप्ताह इस बुकलेट को नई दिल्ली में हुई राष्ट्रीय स्वास्थ्य संपादकों के एक सम्मेलन में जारी किया था।
यह केंद्र सरकार में बैठे हुए लोगों की अवैज्ञानिक सोच की ताजा मिसाल है जिसमें लोगों के खानपान को प्रभावित करने की कोशिश भी है, धर्म को लादने की भी कोशिश है, और यह निहायत झूठी बात फैलाई जा रही है कि गर्भवती महिला को सेक्स से दूर रहना चाहिए। इस रिपोर्ट के आते ही भारत के बड़े-बड़े डॉक्टरों ने खुलकर इस झूठ का खंडन किया है और इसे पूरी तरह अवैज्ञानिक बताया है। यह बात किसी आम समझ के इंसान के भी गले नहीं उतर सकती कि सरकार के खर्च पर अवैज्ञानिक बातों को इतनी बेशर्मी के साथ कोई कैसे फैला सकते हैं?
आज देश में वैज्ञानिक सोच न होने से जगह-जगह महिलाओं की हत्या हो रही है क्योंकि आसपास के लोगों को उनके टोनही होने का शक रहता है। रायपुर में ही आज एक नौजवान ने इसी शक में अपनी मां की हत्या कर दी, इसी प्रदेश के एक दूसरे शहर में एक महिला के बदन में मिर्च डाल दी गई, और झारखंड की रिपोर्ट है कि वहां कितनी ही महिलाएं डायन कहकर मार डाली जा रही हैं। जब देश में अंधविश्वास इतना फैला हुआ हो, तो सरकार को न सिर्फ वैज्ञानिकता को बढ़ावा देना चाहिए, बल्कि समाज में चली आ रही बुरी बातों को खत्म करने के लिए एक आधुनिक सोच को भी बढ़ाना चाहिए। ऐसे में धर्म को बढ़ावा देना, मांसाहार के खिलाफ मुहिम चलाना, इन सबके लिए सरकार का इस्तेमाल करना, देश में अंधविश्वास के खतरे को बढ़ाने के अलावा और कुछ नहीं है।
एक तरफ तो भारत चिकित्सा विज्ञान में इतना आगे बढ़ गया है कि दुनिया के विकसित देश के लोग भी सर्जरी कराने हिंदुस्तान आ जाते हैं क्योंकि यहां पर उत्कृष्टता विश्वस्तर की है, और खर्च बहुत कम है। दूसरी तरफ इस तरह का पाखंड, इस तरह का अंधविश्वास बढ़ाते चलना सरकार की दिमागी कमजोरी भी बताता है। इस बुकलेट के हिसाब से तो किसी नास्तिक महिला का बच्चा सेहतमंद हो ही नहीं सकता क्योंकि वह महिला आसपास धार्मिक वातावरण क्यों रखेगी? सरकार को तो यह सोचना चाहिए कि आज देश में जितने तरह की हिंसा हो रही है और जो टीवी के परदों के रास्ते गर्भवर्ती महिलाओं को भी देखनी पड़ रही है, उसे कम कैसे किया जाए?

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