योग के फायदे तो अनगिनत पर सरकार पहले जगह तो दे

संपादकीय
20 जून 2017


भारत की सदियों पुरानी जीवनशैली का एक हिस्सा, योग अब पूरी दुनिया में एक अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में अधिक प्रचलित होते चल रहा है। वैसे तो भारत में दिलचस्पी रखने वाले लोग जमाने से योग सीखने भारत आते थे, और बहुत सी पुरानी तस्वीरें बताती हैं कि आधी-पौन सदी पहले भी पश्चिम में योग का प्रचलन था। लेकिन नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद यह अंतरराष्ट्रीय दिवस भारत की पहल पर संयुक्त राष्ट्रसंघ से घोषित हुआ और आज भारत के तकरीबन हर हिस्से में योग का सार्वजनिक अभ्यास हुआ। टेलीविजन पर ऐसा बहुत समय बाद हुआ कि सुबह के दो घंटे हत्या और बलात्कार से आजाद रहे, और सिर्फ योग और उसके फायदों पर चर्चा होती रही। कुछ भाजपा विरोधी पार्टियों के राज वाले राज्यों को छोड़ दें, तो बाकी सारे देश में सरकार ने इस दिन इस समारोह को सरकारी स्तर पर किया, और स्कूल-कॉलेज के बच्चों ने भी इसमें हिस्सा लिया।
बिना किसी खर्च के, बिना बिजली और बिना किसी मशीन के जो योग हो सकता है, वह लोगों को बहुत सी बीमारियों से बचाता है। हम बाबा रामदेव जैसे कुछ नाटकीय योग की बात नहीं करते, जिसके फायदे को लेकर डॉक्टरों को कई तरह के शक हैं, और जिससे होने वाले नुकसान को लेकर कई तरह आशंकाएं भी हैं, हम भारत के परंपरागत योग की बात करते हैं जो कि रामदेव के पैदा होने के सदियों पहले से बिना किसी बाजारू नाटकीयता के चल रहा है, और आज भी मुंगेर जैसे विश्वविख्यात योग संस्थानों से लेकर दक्षिण भारत के कई योग गुरुओं तक ने बिना साबुन और नूडल्स बेचे सिर्फ योग को फैलाया है। यह अलग बात है कि आज रामदेव भारत के राजकीय योग गुरु बने बैठे हैं, और सरकारी मंच से शोहरत पाते हुए अपने हजारों करोड़ के कारोबार को दसियों हजार करोड़ का कर रहे हैं।
लेकिन इन सबसे परे अगर हम पते की बात पर सीधे आएं, तो राज्य सरकारों और स्थानीय संस्थानों को साफ-सुथरी, खुली और हवादार जगहों पर योग का इंतजाम करना चाहिए जिससे कि भारत की आबादी में बढ़ते चल रहे डायबिटीज सरीखे रोग पर काबू हो सके। अभी-अभी छत्तीसगढ़ सरकार ने यह घोषणा की है कि हर जिला मुख्यालय में योग उद्यान बनाया जाएगा। हमारे नियमित पाठकों को याद होगा कि हम इसी जगह इसी कॉलम में बरसों से यह मांग करते आ रहे हैं कि योग उद्यान बनाकर जनता को सेहतमंद रखने की एक लगभग मुफ्त कोशिश करनी चाहिए ताकि सरकार पर बीमार और इलाज का खर्च न आए। कई किस्म की गंभीर बीमारियां भी इस मुफ्त की जीवनशैली से घट सकती हैं, जिंदगी बढ़ सकती है, और चुस्त-दुरुस्त रहने से इंसान की उत्पादकता भी बढऩे की गारंटी रहती है। आज दिक्कत यह है कि खुली हुई जितनी जगह सरकार के पास है, उस पर स्थानीय संस्थाएं और सरकारी संस्थाएं सिर्फ कारोबार के कॉम्पलेक्स बनाने पर आमादा रहती हैं, और जनता की जरूरत के लायक मैदान और बाग-बगीचे बच नहीं जा रहे। देश में सरकार ही जमीनों की सबसे बड़ी मालिक है, इसलिए जमीन तो उसे ही देनी होगी, लेकिन समाज योग प्रशिक्षकों को जुटाने में मदद कर सकता है, और बहुत मामूली से खर्च से लोगों की जिंदगी को बहुत ही सेहतमंद बनाया जा सकता है, बीमारियों से लोगों को बचाया जा सकता है जो कि आगे चलकर सरकारी खर्च में बचत का एक तरीका भी साबित होगा। छत्तीसगढ़ में अभी हम शहरों की सार्वजनिक जगहों पर म्युनिसिपल द्वारा लगाई गई कसरत की मशीनों को देखते हैं जिन पर लोग दिखते ही हैं। जो लोग कसरत करते हैं, उनके लिए योग को अपनाना आसान भी रहता है, और राजधानी रायपुर के बगीचों में ये दोनों काम साथ-साथ करते हुए लोगों की भीड़ दिखती है। योग उद्यान बनाने के साथ-साथ जो मौजूदा उद्यान हैं, उनमें भी सरकार को थोड़ी सी पहल करके जनता के बीच के लोगों में से ही वालंटियर योग प्रशिक्षक तलाशने चाहिए। दूसरी तरफ स्कूल और कॉलेज भी खेलकूद के साथ-साथ योग को अपना सकते हैं, और इससे नफा छोड़ कोई नुकसान नहीं होगा।
अभी हमारे सामने 31 मार्च 2012 का संपादकीय है जिसमें हमने लिखा था-'....हम समाज और सरकार दोनों के स्तर पर एक सेहतमंद जीवनशैली के लिए जागरूकता के एक बड़े अभियान को तुरंत शुरू करने की मांग करते हैं। इसके तहत हर शहर और कस्बे में लोगों के लिए साफ हवा में घूमने-फिरने, कसरत करने, बीमारियों से बचाव की जानकारी पाने, योग और प्राणायाम के विवादहीन तरीकों को बढ़ावा देने का इंतजाम करना चाहिए। एक योजना के तहत सरकार ही जिला स्तर से शुरू करके बाद में और नीचे के स्तर तक ऐसे प्राकृतिक केंद्र विकसित कर सकती है जिनमें पेड़ों के बीच साफ और खुली हवा में ऐसे तमाम काम चल सकते हों। यह बात हम पहले भी सरकार को सुझा चुके हैं। छत्तीसगढ़ में जहां पर कि एक आयुर्वेदिक डॉक्टर रमन सिंह मुख्यमंत्री हैं, और मंत्रिमंडल में बहुत से लोग गंभीर बीमारियों के शिकार हैं, वहां पर फिर ऐसी जरूरत के लिए जागरूकता आसानी से आनी चाहिए। समाज अपने-आपमें इतने बड़े प्राकृतिक स्वास्थ्य केंद्र खुद तो नहीं बना सकता, लेकिन वह सरकार को इसके लिए  तैयार जरूर कर सकता है...'

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