सोशल मीडिया एक औजार, और आत्मघाती हथियार भी

संपादकीय
4 जून 2017


इन दिनों पढ़े-लिखे और इंटरनेट या फोन तक पहुंच वाले लोगों का एक बड़ा हिस्सा सोशल मीडिया पर सक्रिय है, लेकिन दो बातों की कमी दिखाई पड़ती है। पहली तो यह कि लोगों को भारत जैसे देश में कानूनी खतरों का अंदाज नहीं है। किसी भी कम्प्यूटर या दूरसंचार प्रणाली के इस्तेमाल से भारत के सूचना तकनीक कानून को बुलावा देना हो जाता है। अब ऐसे में लोग अगर खुद भी कुछ न लिखें, और उनके फेसबुक पेज पर दूसरे लोग कुछ लिखते चलें, तो भी एक खतरा खड़ा रहता है। तो लोगों को पहले तो अभिव्यक्ति की इस नई आजादी के इस्तेमाल के कानूनी खतरों को समझना चाहिए। दूसरी बात यह कि इंटरनेट पर एक बार जो शब्द लिख दिया गया, या कि जो तस्वीर डाल दी गई, वह कभी मिटती नहीं। और आज अमरीका किसी वीजा-अर्जी पर यह शर्त लगा रहा है कि लोग अपने पिछले पांच बरस के सोशल मीडिया की जानकारी अमरीकी सरकार को दें। अब अगर किसी ने अमरीका के खिलाफ उत्तेजना के किसी दौर में कोई हिंसक बात लिखी हो, तो उसे मिटा दिए जाने के बावजूद अमरीकी अधिकारी वहां तक पहुंच सकते हैं, और कचरे के डिब्बे से उसे निकालकर देख सकते हैं। और ऐसा सिर्फ अमरीकी अधिकारियों की ताकत में नहीं है, दुनिया भर की पुलिस ऐसा कर सकती है, और करती है। इसलिए यह ध्यान रखना चाहिए कि आज लापरवाही से सोशल मीडिया पर लिखी गई कोई बात कल किसी कारोबार को शुरू करने में, बैंक से कर्ज लेने में, सरकारी नौकरी पाने में, या कि स्कॉलरशिप पाने में, और तो और जीवनसाथी पाने में भी आड़े आ सकती है।
दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर आपकी हरकतें आपके परिवार और आपके दायरे के लिए मिसाल भी रहती हैं, और जो-जो गलतियां आप करते हैं, उनके आपके बच्चों तक पहुंचने का खतरा बने रहता है। एक वक्त शराबी के बच्चे शराब पीने का खतरा रखते थे, सिगरेट पीने वालों के बच्चे बेधड़क सिगरेट पीना सीख लेते थे, यही तम्बाकू के साथ होता था। आज कुछ ऐसा ही हाल सोशल मीडिया पर गालियां और धमकियां देने वालों के साथ है कि वे जो लिख रहे हैं उनकी अगली पीढ़ी उसे सीख भी रही है, और वह भी एक खतरनाक सिलसिले में पड़ सकती है। फिर समाज के भीतर आज लोगों की साख इस पर भी टिकी रहती है कि वे सोशल मीडिया पर क्या लिखते हैं, वॉट्सऐप जैसे मैसेंजर पर क्या भेजते हैं। कुछ लोग ऐसा समझते हैं कि उनकी भेजी गई बातें उनके दोस्तों तक ही रह जाती हैं। लेकिन आज यह आम तजुर्बा है कि लोग आपके भेजे हुए संदेशों के स्क्रीनशॉट लेकर उन्हें भी आगे बढ़ा देते हैं जिनसे आपके संबंध भी खत्म हो सकते हैं, कारोबार भी खत्म हो सकता है, और नौकरी भी जा सकती है।
सोशल मीडिया एक ऐसा औजार बनकर आया है जो कि सही तरीके से इस्तेमाल न किया जाए तो एक आत्मघाती हथियार भी बन जाता है। हमारा ख्याल तो यह है कि लोगों को स्कूल-कॉलेज में सोशल मीडिया के इस्तेमाल के बारे में कुछ पढ़ाने और सिखाने की जरूरत भी है। लोग अपने परिवार के भीतर भी बाकी लोगों को सावधान कर सकते हैं, किसी संगठन के सदस्य अपने लोगों के लिए प्रशिक्षण का आयोजन कर सकते हैं, और लोगों को कानूनी खतरों से, सामाजिक अपमान से बचा सकते हैं।

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