ज्ञान तो बढ़ता जा रहा है, पर हिन्दुस्तानी समझ घट रही है

संपादकीय
9 जून 2017


कन्नौज की एक खबर है कि खजाना दिलाने का झांसा देकर एक मां-बाप के सामने में उनकी नाबालिग लड़की के साथ एक तांत्रिक ने पहले बलात्कार किया, और फिर उसे बलि चढ़ा दी। उनके घर पर खजाना गड़ा होने की बात कहकर उसने परिवार के लालच का फायदा उठाया, और यह सारा काम परिवार के सामने ही किया। ऐसा कोई न कोई मामला रोज कहीं न कहीं से सामने आता है, और हमारा यह भी मानना है कि ऐसे एक मामले के सामने आने के पीछे सैकड़ों छुपे हुए मामले रह जाते होंगे, क्योंकि लोग धोखे का शिकार होने के बाद सामाजिक अपमान के डर से कई बातों को छुपा भी जाते हैं। अंधविश्वास का यह हाल है कि छत्तीसगढ़ और झारखंड जैसे राज्यों में महिलाओं को टोनही कहकर लगातार प्रताडि़त किया जाता है, और झारखंड में हर बरस बहुत सी हत्याएं ऐसे आरोपों के साथ होती हैं। जबकि हकीकत यह पाई गई है कि किसी महिला को टोनही कहकर मारने वाले लोग आमतौर पर वे रहते हैं जो कि उस महिला का देह शोषण करना चाहते हैं, और उनकी हसरत पूरी नहीं होती, या कि उस महिला के नाम पर बची जमीन-जायदाद को हड़पना चाहते हैं।
भारत में अंधविश्वास लोगों के साक्षर और शिक्षित होने के बावजूद कम होते नहीं दिखता है। यहां टीवी पर ऐसे चैनलों को रात-दिन ऐसे जालसाजों को दिखाने का लाइसेंस सरकार की तरफ से मिलता है, जो कि आगे चलकर बलात्कारी या ठग निकलते हैं, और उसके बावजूद उनके कार्यक्रम प्रसारित होते रहते हैं। अंधविश्वास और पाखंड को बढ़ावा देने के लिए आस्था का बड़ा सहारा ठगों को मिलता है। इस देश में लोगों की आस्था किसी भी तरह के धार्मिक या आध्यात्मिक दिखने वाले लोगों पर आनन-फानन पैदा हो जाती हैं। कुछ खास किस्म के कपड़े, जटा या भभूत, चिमटा या माला, इन सबको लेकर लोग ठगी का एक कारोबार शुरू कर सकते हैं, और अखबारों में ईश्तहार देकर, होटलों में कमरे लेकर लोगों को लूट सकते हैं, और महिलाओं के साथ बलात्कार कर सकते हैं। यह सिलसिला घटते नहीं दिख रहा है, बढ़ते हुए ही दिख रहा है।
दरअसल इस देश में वैज्ञानिक सोच घटती जा रही है। पढ़ाई बढ़ रही है, लोगों का ज्ञान बढ़ रहा है, लेकिन उनकी समझ घटती चल रही है। एक तरफ तो यह देश दुनिया भर के विकसित देशों के भी उपग्रह लेकर अपने रॉकेट आए दिन अंतरिक्ष में भेजता है, और भारत का अंतरिक्ष-संस्थान देश के लिए कमाई का जरिया भी बन गया है। वहां के हर अंतरिक्ष अभियान में महिला वैज्ञानिकों की बहुत बड़ी हिस्सेदारी सामने आती है, लेकिन दूसरी तरफ देश के कुछ हिस्सों में महिलाओं को टोनही कहकर मारा जा रहा है, देश भर के मंदिरों में महिलाओं को महीने के कुछ दिनों में दाखिला नहीं दिया जाता है, और धर्म या आध्यात्मक के नाम पर महिलाओं का देह शोषण लगातार होता है। आस्थावान लोग बहुत समय तक पाखंडियों को बर्दाश्त करते हैं, बल्कि अपने परिवार की महिलाओं के शोषण को वे ईश्वर या गुरू की सेवा भी मान बैठते हैं। बहुत से मामलों में परिवार के लोग अपनी नाबालिग बच्चियों को भी बलात्कारी बाबाओं तक खुद ही पहुंचाते हैं। यह सिलसिला बहुत खतरनाक है, और देश को इससे उबरने के लिए अपनी सोच को तर्कसंगत और न्यायसंगत बनाना होगा। यह काम आसान नहीं होगा क्योंकि हाल के बरसों में अवैज्ञानिक बातों को इतना बढ़ावा दिया गया है कि लोग अब पाखंड को वैज्ञानिक सच मानने लगे हैं। कानून अकेले ऐसी नौबत से नहीं निपट सकता, खासकर तब जब राजनीतिक और सामाजिक ताकतें ऐसे पाखंड को बढ़ावा देकर अपने वोट बढ़ाने, या अपने बाहुबल को बढ़ाने मेें लगी हुई हैं। समाज के ही जिम्मेदार और जागरूक तबके को खुलकर आगे आना होगा, और यह नौबत सुधारनी होगी।

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