मौसम की मुसीबतों से निपटने की तैयारी हो

संपादकीय
10 जुलाई 2017


छत्तीसगढ़ वैसे तो बड़ी कुदरती मुसीबतों से बचा हुआ प्रदेश है क्योंकि यह समंदर से दूर है और यहां समुद्री तूफान य सुनामी जैसे खतरे नहीं है। यह पहाड़ी इलाका भी नहीं है इसलिए यहां भूस्खलन नहीं होता, और उत्तराखंड जैसी बाढ़ नहीं आती, इस इलाके में भूकंप की तबाही भी नहीं होती, और इन्हीं सब वजहों से यहां पर जनता और सरकार इन दिनों का चौकन्नापन प्राकृतिक विपदाओं के लिए नहीं रह जाता। यहां सिर्फ एक किस्म की दिक्कत आती है, मानसून में अधिक पानी गिरने से शहरों के भीतर बस्तियों में पानी भर जाता है, और शहरों के बीच कहीं-कहीं पर पुल डूब जाते हैं, कहीं पर सड़कें बह जाती हैं। लेकिन हर राज्य को अपनी छोटी या बड़ी हर किस्म की दिक्कत से जूझने की बेहतर तैयारी करनी चाहिए।
चूंकि छत्तीसगढ़ में प्राकृतिक विपदा में बड़ी संख्या में मौतें नहीं होती हैं, इसलिए लोगों का अधिक ध्यान बाकी छोटी दिक्कतों की तरफ नहीं जाता है। शहरी बस्तियों में जब पानी भरता है तो गरीबों के घर बहुत तबाह होते हैं। उनके सामान की बर्बादी की कोई भरपाई भी नहीं हो पाती है, और उनकी रोजी-कमाई भी खत्म होती है। दूसरी तरफ सरकार की अपनी योजनाओं का सामान गांव-गांव तक अगर बारिश के पहले पहुंच नहीं जाता है, तो बारिश के महीनों में लोगों को राशन या मिट्टीतेल, और अब गैस सिलेंडर की दिक्कत भी होती है, खेती में खाद और बीज वक्त पर न पहुंचे तो उससे भी बड़ा नुकसान होता है। इसलिए छत्तीसगढ़ जैसे राज्य की सरकार को जिलों के स्तर पर अपनी इसी तैयारी में ताकत झोंकनी चाहिए कि बारिश की वजह से आने वाली दिक्कतों का यथासंभव इलाज पहले से कैसे ढूंढ लिया जाए।
दूसरी तरफ स्कूलों का हाल है जहां पर इमारत खराब रहती है, फर्नीचर टूटे रहते हैं, और बच्चों को वक्त पर सरकारी मुफ्त-पोशाक नहीं मिल पाती है। सरकार को अपने अमले को कमर कसकर ऐसे काम में भी लगाना चाहिए। स्कूलों में अगर समय पर पढ़ाई नहीं हो पाती है, तो देश की उत्पादकता के उस नुकसान का कोई हिसाब नहीं लग पाता लेकिन वह नुकसान होता तो है। एक दूसरी बड़ी जरूरत ईलाज की रहती है, इस मौसम में होने वाली बीमारियों के साथ-साथ सांप के काट लेने से बहुत मौतें होती हैं, और सरकारी अस्पतालों में इसके लिए जरूरी दवाईयां नहीं रहतीं। वैसे तो सरकार बहुत सी बैठकें करती है, लेकिन सरकारी अमला या तो पूरी जिम्मेदारी के साथ काम करने का आदी नहीं रहता है, या फिर कहीं बजट की कमी, तो कहीं अफसरों की कमी से काम समय पर नहीं हो पाता।
राज्य सरकार को बारिश के मौसम में ही साल भर की दिक्कतों को झेलना पड़ता है, लेकिन ये दिक्कतें हर बरस तकरीबन एक सी रहती हैं, और इनसे जूझने का पुख्ता इंतजाम कर लेना चाहिए।

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