रूपा गांगुली का बयान बंगाल की इज्जत के साथ एक बलात्कार

संपादकीय
15 जुलाई 2017


पश्चिम बंगाल से भाजपा की सांसद रूपा गांगुली ने कैमरों के सामने बयान दिया है कि बंगाल के बाहर के जो लोग तृणमूल कांग्रेस सरकार का बचाव कर रहे हैं, उन्हें अपनी बीवी, बहन और बेटी बंगाल भेजनी चाहिए, और अगर वे यहां पन्द्रह दिन बलात्कार की शिकार हुए बिना गुजार सकें तो वे आकर उन्हें बताएं। एक सांसद होने के अलावा वे एक बंगाली भी हैं, और महिला भी हैं, इसलिए उनसे दो बातों की उम्मीद की जाती है कि वे संसदीय गरिमा के मुताबिक बात करें, एक बंगाली होने के नाते अपने प्रदेश को झूठा अपमानित करने वाली बात न करें, और एक महिला होने के नाते बलात्कार शब्द का ऐसा संवेदनाशून्य इस्तेमाल न करें। लेकिन उन्होंने इन तमाम उम्मीदों को खारिज करते हुए बहुत ही ओछी और घटिया जुबान में यह हमला किया है, जो कि वे करना तो ममता बैनर्जी पर चाहती हैं, लेकिन उन्होंने पूरे बंगाल पर यह हमला किया है।
लेकिन यह याद रखने की जरूरत है कि लोग जैसा बोते हैं, वैसी ही फसल पाते हैं। ममता बैनर्जी ने मुख्यमंत्री बनने के कुछ दिनों के भीतर ही कोलकाता में हुए एक चर्चित बलात्कार के बारे में आनन-फानन यह बयान दिया था कि यह उनकी सरकार को बदनाम करने की राजनीतिक साजिश है। ममता बैनर्जी भी न केवल निर्वाचित सांसद-विधायक रही हुई हैं, बल्कि जिस दिन यह घटना हुई उस दिन वे बंगाल के राजकाज के लिए जिम्मेदार मुख्यमंत्री भी थीं, और वे एक महिला तो हैं ही। ऐसे में बलात्कार की शिकार एक महिला की पुलिस में कराई गई रिपोर्ट पर मुख्यमंत्री का ऐसा कहना सीधे-सीधे जांच और इंसाफ में दखल के बराबर था। खैर, उनके मुंह पर तमाचा लगाने जैसी नौबत आई, और उन्हीं की पुलिस ने न सिर्फ इस महिला की शिकायत को सही पाया, मामले को अदालत तक पहुंचाया, बल्कि कुछ महीनों के भीतर ही बलात्कारी को सजा भी हो गई। अब जब बलात्कार के एक सही आरोप पर राज्य की महिला मुख्यमंत्री का यह रूख था, तो फिर उस मुख्यमंत्री के खिलाफ भाजपा की विपक्षी नेता का रूख संसदीय या सही होने की उम्मीद कैसे की जा सकती है? नतीजा यह हुआ कि रूपा गांगुली ने अपने ही प्रदेश बंगाल के खिलाफ ऐसी बेहूदी बात कह दी कि जिसे उनकी पार्टी भी शायद ही सही ठहरा पाएगी।
सांसद रूपा गांगुली को केन्द्र सरकार के कम्प्यूटरों में दर्ज ये आंकड़े बड़ी आसानी से हासिल होंगे कि 2015-16 के बरस में देश में दर्ज 34600 बलात्कारों में से सबसे अधिक उनकी ही पार्टी भाजपा के राज वाले मध्यप्रदेश में दर्ज हुए हैं, और उनके ही लेफ्टिनेंट गवर्नर के पुलिसराज वाले दिल्ली-प्रदेश में हुए हैं। अकेले मप्र में 4391 बलात्कार हुए, और दिल्ली में 2199 बलात्कार दर्ज हुए। इसके बाद रूपा गांगुली की पार्टी की सरकार वाले महाराष्ट्र में 4144, उन्हीं की पार्टी की सरकार वाले राजस्थान में 3644 बलात्कार दर्ज हुए। दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल में 1129 बलात्कार दर्ज हुए, और आकार-आबादी में बंगाल के एक चौथाई हरियाणा में भाजपा की सरकार के तहत 1070 बलात्कार दर्ज हुए। इसलिए रूपा गांगुली ने एक बहुत ही गैरजिम्मेदार सांसद और बंगाली बनकर दिखाया है कि उन्होंने दूसरे देश-प्रदेश के लोगों को बंगाल आने के लिए एक तरह से मना ही कर दिया है।
दरअसल बलात्कार को लेकर इस देश में खबरों का ऐसा सैलाब हर दिन रहता है कि धीरे-धीरे बेरहम और बेशर्म नेताओं के बीच इसे लेकर संवेदना शून्य ही हो जाती है। हमने अलग-अलग कई पार्टियों के नेताओं के ऐसे बयान पढ़े हैं जो कि बलात्कार की शिकार महिला पर एक और बलात्कार की तरह रहते हैं। उत्तरप्रदेश के बकवासी समाजवादी पार्टी नेता आजम खां को ऐसी ही हिंसक बकवास के लिए सुप्रीम कोर्ट की लताड़ पड़ी और बिना शर्त माफी मांगकर ही वे जेल जाने से बचे। यह सिलसिला थमना चाहिए। हमारा मानना है कि जिस तरह सुप्रीम कोर्ट ने आजम खां को अदालती कटघरे में घसीटा था, ठीक वैसे ही पश्चिम बंगाल के हाईकोर्ट को रूपा गांगुली को नोटिस भेजकर बुलवाना चाहिए और यह पूछना चाहिए कि इस प्रदेश का ऐसा नुकसान करने के झूठ पर उन्हें क्या सजा दी जाए? लोगों को याद होगा कि रूपा गांगुली ने टीवी सीरियल महाभारत में द्रोपदी की भूमिका की थी। उस भूमिका में द्रोपदी के साथ कौरवों की तरफ से जिस तरह की बदसलूकी की गई थी, कम से कम उसका दर्द तो उन्हें याद रहना चाहिए कि ज्यादती की शिकार एक महिला के मन पर क्या गुजरती है। रूपा गांगुली का बंगाल के बलात्कारों की संस्कृति पर जो कहना है, वह बंगाल में रहने वाली हर लड़की या महिला के लिए बहुत बड़ी बेइज्जती की बात भी है, और शर्मिंदगी की बात भी है कि क्या बंगाल में कोई भी लड़की या महिला बलात्कार की शिकार हुए बिना है ही नहीं। रूपा गांगुली अदालत के अलावा भी महिला आयोग, मानवाधिकार आयोग में घसीटी जानी चाहिए।

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