सरकारी कॉलेज में यौन शोषण, सरकार, महिला आयोग चुप

संपादकीय
17 जुलाई 2017


छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े सरकारी महिला महाविद्यालय में बहुत सी छात्राओं की यह शिकायत सामने आई है कि एक प्राध्यापक लगातार उनसे लंबे समय से अश्लील व्यवहार करते आ रहे हैं। अब बहुत सी छात्राओं की शिकायत के बाद जोगी कांग्रेस ने इसे एक आक्रामक आंदोलन के रूप में उठा लिया है, और रोज प्रदर्शन हो रहे हैं। दूसरी तरफ खबर है कि इस मुद्दे पर कॉलेज एक जनसुनवाई कर रहा है ताकि जिन लड़कियों को शिकायत हो वे सामने आ सकें।
लड़कियों या महिलाओं के यौन शोषण की शिकायतों पर कॉलेज का यह रूख समझ से परे है। पहली बात तो यह कि अगर लंबे समय से किसी एक प्राध्यापक के खिलाफ ऐसी शिकायतें चली आ रही थीं तो इसके पहले कॉलेज में कार्रवाई क्यों नहीं की? देश का कानून इस बारे में बड़ा ही सख्त है, और पहली शिकायत पर ही वह जांच कमेटी को अनिवार्य कर देता है। ऐसे में किसी मामले को महज इसलिए टालते जाना कि प्राध्यापक के बड़े ऊंचे राजनीतिक रिश्ते हैं, यह सत्तारूढ़ पार्टी के लिए एक बड़ी बदनामी और शर्मिंदगी की बात भी है। दूसरी हैरानी यह है कि सत्तारूढ़ भाजपा के छात्र संगठन, उसका महिला मोर्चा भी अब तक चुप बैठे हुए हैं। राज्य की महिला आयोग तक शिकायत पहुंचीं, लेकिन उसकी भी कोई कार्रवाई अब तक सुनाई नहीं पड़ी है। फिर अगर कॉलेज किसी प्राध्यापक द्वारा की जा रही यौन प्रताडऩा या यौन शोषण की शिकायतों को सच में ही सुनना चाहता है तो उसे तो गोपनीय रूप से बंद कमरे में ही सुना जा सकता है, ये शिकायतें बिजली-पानी की बिल की शिकायतें नहीं हैं जिसके लिए जनसुनवाई की जाए। ऐसी शिकायतों को कौन सी लड़की या महिला एक कार्यक्रम में पहुंचकर सामने रख सकती हैं, और कैसे कॉलेज इन शिकायतों को एक आयोजन में सुन सकता है? यह बताता है कि प्रदेश का सबसे बड़ा सरकारी महिला महाविद्यालय भी महिलाओं के शोषण के मामले में पूरी तरह से गैरजिम्मेदार है।
हमारा ख्याल है कि राज्य सरकार, प्रदेश की हाईकोर्ट, और राष्ट्रीय स्तर पर महिला आयोग को दखल देना चाहिए, क्योंकि प्रदेश का महिला आयोग कुछ करते दिख नहीं रहा है। इस मामले को एक राजनीतिक आंदोलन की तरह कॉलेज के गेट पर रोज चलने देना शर्मनाक है। ऐसी शिकायतों पर कॉलेज को तुरंत ही प्राध्यापक को छुट्टी पर भेज देना चाहिए, और उच्च शिक्षा विभाग को अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए प्राध्यापक को तुरंत हटा देना चाहिए। इसके बाद पुलिस और सरकार की दूसरी एजेंसियों की भी जिम्मेदारी है कि वे लड़कियों के इस हौसले को देखते हुए जरूरी कानूनी कार्रवाई करें। एक तो भारत में महिलाओं और लड़कियों के लिए ऐसा माहौल नहीं रहता कि वे इस तरह की शिकायतें करने का हौसला दिखाएं, और जब ऐसी शिकायत पर महज राजनीतिक दबाव के चलते कार्रवाई नहीं होती है, तो उससे आगे फिर दूसरी लड़कियों या महिलाओं का शिकायत का हौसला खत्म हो जाता है। प्रदेश में महिला मुद्दों को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाने वाले लोगों को आगे की कानूनी पहल करनी चाहिए।

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