हर जानकारी तो डिजिटल हो गई लेकिन उसकी हिफाजत का क्या?

संपादकीय
2 जुलाई 2017


जीएसटी, आधार कार्ड, पैन नंबर के साथ अब सारे बैंक खातों, सारे टैक्स खातों, और सारी संपत्तियों को जोडऩे की तैयारी भारत सरकार के हाथ में लोगों की निजी और कारोबारी जिंदगी की सारी छुपी और निजी बातें तश्तरी पर रखकर पेश करने जा रही हैं। लोगों के मोबाइल नंबर भी आधार कार्ड से जुड़ रहे हैं, और सरकार की पहुंच टेलीफोन कॉल या इंटरनेट की हर जानकारी तक अभी भी है। यह पूरी तस्वीर दो वजहों से बड़ी फिक्र पैदा करती है।
आज से पन्द्रह बरस पहले अमरीका की एक फिल्म आई थी कि जब सरकार अपनी खुफिया निगरानी की पूरी ताकत झोंककर किसी बेकसूर नागरिक को फंसाने और खत्म करने की कोशिश करती है, तो क्या होता है। उस तैयारी में उपग्रह से मिली जानकारी, और सार्वजनिक जगहों पर लगे हुए कैमरों से जुड़ी हुई जानकारी और शामिल हो जाती है। इसमें से कुछ भी विज्ञान कथा की तरह का भविष्य का मामला नहीं है, और यह पूरे का पूरा आज सरकार के हाथ मौजूद साज-सामान से मुमकिन निगरानी है। आज बैंक के खातों के अलावा क्रेडिट या डेबिट कार्ड से होने वाली खरीदी, या उससे होने वाले किसी भी भुगतान की जानकारी भी सरकार के कम्प्यूटरों पर दर्ज है, और घर बैठे सरकारी जांच एजेंसियां, खुफिया एजेंसियां लोगों की निजी जिंदगी में पूरी तरह, और बुरी तरह झांक सकती हैं, और लोगों को अपने शिकंजे में रख सकती हैं।
एक देश एक टैक्स का नारा टैक्स के नजरिए से अच्छा है, लेकिन इसके साथ-साथ सरकार के पास हर कारोबार की जानकारी कम्प्यूटर की एक बटन दबाने से हासिल होने जा रही है। निजी और कारोबारी दोनों तरह की सारी बातों को लेकर जब हम सोचते हैं, और उसके साथ हम दुनिया के कम्प्यूटर-घुसपैठियों की ताकत को देखते हैं, तो लगता है कि कल दुनिया में कहीं भी बैठे हुए साइबर-अपराधी भारत के हर नागरिक की हर बात को जान सकते हैं, और सरकारी रिकॉर्ड में अगर छेडख़ानी करना उनके बस में हो, तो वे ये रिकॉर्ड बदल भी सकते हैं। इस बात को सोचें कि हर हिन्दुस्तानी की उंगलियों के निशान अपराधियों के पास मानो पहुंच ही चुके हैं, हर हिन्दुस्तानी के ट्रेन या प्लेन के रिजर्वेशन उनके पास पहुंच ही चुके हैं, लोगों की खरीदी की आदतें उनके पास पहुंच चुकी है, तो फिर ये किस-किस तरह की साजिशें नहीं कर सकते? लोगों की बायोमैट्रिक जानकारी पल भर में पूरी दुनिया के अपराधियों के पास रहेगी, और लोगों के फिंगरप्रिंट से ऐसे लोग अपने घर बैठे हिन्दुस्तानियों के फोन या कम्प्यूटर के पासवर्ड फिंगरप्रिंट से खोल सकेंगे।
देश की इतनी जानकारी कम्प्यूटर और इंटरनेट पर रहना सरकार के लिए तो सहूलियत की बात हो सकती है, लेकिन दूसरी तरफ इतनी संवेदनशील और नाजुक जानकारी की हिफाजत का भी कोई जरिया हो सकता है? अभी हमने योरप के बहुत से देशों में साइबर-घुसपैठ को देखा है और विकसित-संपन्न देश भी अपने सरकारी कम्प्यूटरों को भी ऐसी सेंधमारी से नहीं बचा पाए। भारत में आज भी आधार कार्ड को लेकर बहुत से लोगों के मन में यह शक है कि इतनी निजी जानकारी पाकर उसे सुरक्षित रखने का सरकार के पास कोई जरिया नहीं है। और इसीलिए सुप्रीम कोर्ट में इसका मुकदमा चल रहा है। जीएसटी से कारोबारी और ग्राहक की हर जानकारी सरकारी कम्प्यूटरों पर आ जाएगी, और उसका बेजा इस्तेमाल भी आसान हो जाएगा। सरकार को देश के डिजिटलीकरण के साथ-साथ सुरक्षा को बढ़ाना चाहिए।

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