विशेषाधिकारों के खतरों की ताजा मिसाल है ट्रंप

संपादकीय
23 जुलाई 2017


अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप जिस तरह से जीतकर आए थे, उस पर भी अमरीका सहित दुनिया के बहुत से देशों के समझदार लोग हक्का-बक्का थे। लोगों को लग रहा था कि ऐसा नफरतजीवी और युद्धोन्मादी, सिद्धांतहीन, और बदसलूकी से भरा हुआ आदमी किस तरह चुनकर आ गया। अमरीकी जनता के एक मुखर हिस्से ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन भी किया था कि यह उनका राष्ट्रपति नहीं है। तब से लेकर अब तक लगातार ट्रंप के बारे में विचलित करने वाली बातें सामने आती रही हैं, और अब तो ट्रंप सरकारी, कानूनी, और संसदीय जांच से बुरी तरह घिरे हुए दिख रहे हैं कि उनके चुनाव अभियान के दौरान उनके बेटे, दामाद, और सहयोगियों ने रूस के उन लोगों के साथ मुलाकात की, और तालमेल बनाया जिन्होंने हिलेरी क्लिंटन के खिलाफ नुकसान पहुंचाने वाली जानकारी देने का वादा किया था। अब जब यह लग रहा है कि ट्रंप परिवार जांच के ऐसे घेरे में है जो कि मजबूत दिखता है, और खुद ट्रंप ऐसे हाल में संसद में महाभियोग में घेरे जा सकते हैं, तो ऐसी खबरें आ रही हैं कि वे राष्ट्रपति के अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करके अपने परिवार को, सहयोगियों को, और अपने आपको भी क्षमादान दे सकते हैं।
यह एक बहुत ही भयानक सोच दिखती है जिसमें अमरीकी राष्ट्रपति को मिले हुए इस विशेष संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल वह अपने ही परिवार को बचाने के लिए कर सकता है, और खुद अपने आपको बचाने के लिए। जब इस बारे में ट्रंप से पूछा गया तो उनका कहना है कि उन्हें किसी को भी माफी देने का पूरा हक है। अमरीकी संविधान के मुताबिक राष्ट्रपति लोगों को उनका जुर्म साबित हो जाने के बाद, या उन पर कोई मुकदमा शुरू होने के पहले भी, किसी भी वक्त उन्हें माफी दे सकते हैं। आमतौर पर अमरीकी राष्ट्रपति कुछ बहुत ही चुनिंदा मामलों में, दूसरे देशों की सरकारों की अपील पर उन देशों के नागरिकों को माफी देते आए हैं, और कभी-कभी अमरीका के कुछ लोगों को भी। लेकिन ऐसी नौबत कभी नहीं आई कि इस अधिकार का उपयोग कोई अमरीकी राष्ट्रपति अपने परिवार और अपने खुद के जुर्म को खत्म करने के लिए करे, लेकिन आज अमरीका इसी मोड़ पर खड़ा हुआ दिख रहा है। अपने अनैतिक आचरण या गैरकानूनी काम के लिए संसद में महाभियोग का सामना करना अमरीका के लिए एकदम अनोखा भी नहीं है। दो चर्चित अमरीकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन, और बिल क्लिंटन अपने सरकारी और निजी फैसलों की वजह से संसद में महाभियोग झेल चुके हैं, लेकिन किसी ने भी कभी अपने आपको माफ करने जैसा शायद सोचा भी नहीं था। यह कुछ उसी किस्म का होगा कि मानो भारत में राष्ट्रपति के परिवार ने, या खुद राष्ट्रपति ने कोई जुर्म किया, और फिर खुद ही उसे माफी दे दी। हालांकि भारतीय लोकतंत्र इस मामले में अमरीका के मुकाबले अधिक परिपक्व है, और यहां पर राष्ट्रपति को अदालत के आखिरी फैसले हो जाने के बाद, और वह भी महज मौत की सजा के मामलों में की गई रहम की अपील पर माफी देने का हक है, न उसके पहले, और न ही केन्द्रीय मंत्रिमंडल की सिफारिश के बिना। अमरीका ने अपने राष्ट्रपति को अधिक हक दिए हुए हैं, और अब वह इनके बेजा इस्तेमाल का गवाह भी बन सकता है।
दरअसल ट्रंप के राष्ट्रपति बनते ही अमरीका कई तरह के हितों के टकराव के खतरे में पड़ गया है। बहुत से देशों के साथ ट्रंप के परिवार के कारोबारी रिश्ते हैं, वहां के व्यापारियों से भी, और वहां की सरकारों से भी। खुद अमरीका के भीतर ट्रंप परिवार के कारोबार और सरकार के बीच हितों के टकराव के कई मामले सामने आए हैं, और इन पर ट्रंप को यह सफाई देनी पड़ी है कि ट्रंप-होटलों को सरकार से मिलने वाले किसी भी भुगतान की रकम वे दान में दे देंगे, लेकिन दूसरी तरफ ट्रंप के साथ औपचारिक रूप से उनके बेटे-बेटी-दामाद जुड़े हुए हैं, और उन सबके अपने-अपने कारोबारी हित हैं जो कि राष्ट्रपति भवन के प्रभाव का इस्तेमाल करते दिखते हैं, और जो ट्रंप के साथ दुनिया के दूसरे देशों में सफर भी करते हैं। अब ऐसी जटिलता के बीच आज ट्रंप अगर यह सोचते हैं कि वे अपने परिवार और सहयोगियों को उनके किसी जुर्म, या कि संभावित जुर्म से माफी दे देंगे, तो अमरीकी राष्ट्रपति के ओहदे की साख चौपट हो जाएगी, और अमरीकी जनता के बीच से यह मांग भी उठने लगेगी कि राष्ट्रपति का ऐसा संवैधानिक अधिकार खत्म किया जाए।
फिर अमरीका से परे बाकी देशों को भी सोचना चाहिए कि वे किसी भी पद को किए गए विशेषाधिकारों को किस तरह से खत्म करें। लोकतंत्र और विशेषाधिकार ये दोनों बातें एक साथ नहीं चल सकतीं। लोकतंत्र को खत्म करने की कीमत पर कुछ चुनिंदा कुर्सियों को असीमित अधिकार देना एक भ्रष्ट और बुरी तानाशाही को खड़ा करना ही हो सकता है, और ट्रंप इसकी ताजा मिसाल हैं।

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