नफरती-हिंसा रोकने के लिए केन्द्र-राज्य तुरंत कुछ करें

संपादकीय
30 जुलाई 2017


केरल में आरएसएस के एक कार्यकर्ता की हत्या के खिलाफ आज प्रदेश स्तर का बंद रखने का आव्हान भाजपा-आरएसएस ने किया है। वहां पुलिस ने इस हत्या के मामले में ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया है जो कि सीपीएम से जुड़े हुए बताए गए हैं। राज्य में आरएसएस और सीपीएम के लोगों के बीच बरसों से ऐसी खूनी लड़ाई चल रही है जिसमें सड़कों पर एक-दूसरे पर बम भी चलाए जाते हैं, और कत्ल भी किए जाते हैं। लोगों को याद होगा कि कुछ महीने पहले एक सीपीएम कार्यकर्ता के कत्ल के पुराने मामले में आरएसएस के कई लोगों को सजा हो चुकी है। दोनों ही तरफ से लड़ाई कत्ल तक पहुंच जाती है, और देश में शायद केरल अकेला राज्य है जहां पर इन दोनों के बीच टकराहट इतनी हिंसक है।
कुछ अरसा पहले तक बंगाल में भी ममता के समर्थकों और वामपंथियों के बीच ऐसा ही टकराव देखने मिलता था, लेकिन केरल जितने कत्ल वहां भी देखने में नहीं आते। इसकी एक वजह तो शायद यह है कि केरल में हिन्दू धर्म छोड़कर ईसाई और मुस्लिम बनने वाले लोगों की बहुत बड़ी संख्या है। वहां पर स्थानीय स्तर पर लोग ईसाई बनते आए हैं, और खाड़ी के देशों में काम करने जाने वाले लोगों में से बहुत से लोग वहां पर काम की सुविधा और इजाजत के लिए मुस्लिम भी बनते हैं। इस तरह केरल में धार्मिक अनुपात पिछली आधी-पौन सदी में बड़ा बदला है, और यह बात आरएसएस के लिए एक किस्म की चुनौती रहती है कि वहां पर अब तक जो हिन्दू हैं, उन्हें संगठित किया जाए, और खासकर उन वामपंथी कार्यकर्ताओं से टक्कर ली जाए जो कि धर्म परिवर्तन के मामले को कोई महत्व नहीं देते हैं।
लेकिन देश के एक प्रदेश में होने वाली हिंसा का दूसरी जगहों पर भी बड़ा बुरा असर पड़ता है। आज ही उत्तरप्रदेश की खबर है कि वहां योगी राज के चलते मेरठ में एक मजार पर सिंदूर जैसा रंग पोतकर उस पर बजरंग बली की प्रतिमा बिठा दी गई। और ऐसा करने वाले एक हिन्दू संगठन ने यह कहा कि अमरनाथ में यात्रियों पर हुए हमले और कश्मीर में भारतीय फौज पर चलने वाले पत्थरों के जवाब में पूरे उत्तरप्रदेश में मजारों का भगवाकरण किया जाएगा। इसका एक वीडियो भी सामने आया है जो बताता है कि ऐसा साम्प्रदायिक जुर्म करने वाले लोगों का हौसला आज कितना बुलंद है। इसके साथ-साथ मध्यप्रदेश की एक खबर है कि किस तरह बीफ के शक में एक मुस्लिम महिला के साथ हिंसा की गई है। ऐसी सारी घटनाओं की प्रतिक्रिया देश के दूसरे हिस्सों में तो होती ही है, देश के बाहर भी उन जगहों पर हिन्दुस्तानियों को इसकी प्रतिक्रिया झेलनी पड़ती है जहां पर स्थानीय सरकारें किसी धर्म को महत्व देती हैं। अब जैसे खाड़ी के देश हैं, वहां पर उन तमाम घटनाओं की प्रतिक्रिया हिन्दुस्तानियों को झेलनी पड़ती है जो कि भारत में मुस्लिमों के खिलाफ होती हैं।
पूरी दुनिया में जगह-जगह सिक्खों को लोगों की हिंसा झेलनी पड़ती है, भेदभाव झेलना पड़ता है, क्योंकि पश्चिम के लोग उनकी पगड़ी और पहरावे से उन्हें मुस्लिम मान बैठते हैं, और दुनिया में जगह-जगह मुस्लिम आतंकी जो हिंसा कर रहे हैं, उसका हर्जाना अमन-पसंद मुस्लिमों के साथ-साथ सिक्खों को भी देना पड़ता है। और सिर्फ हिंसा से यह भेदभाव सामने नहीं आता, भारत में होने वाले ऐसे हमलों को देखते हुए पूरी दुनिया में भारत की तस्वीर गंदी होती है, यहां आने वाले पर्यटक घटते हैं, यहां से कारोबार करने की दिलचस्पी घटती है।
भारत सरकार को बहुत तेजी से सारे प्रदेशों के साथ मिलकर देश में फैल रहे नफरत के सैलाब को रोकना चाहिए। अभी दो दिन पहले ही दिल्ली के अंग्रेजी के एक बड़े अखबार ने इंटरनेट पर अपने पेज पर भारत में नफरती-हिंसा की सारी घटनाओं को एक साथ इक_ा करके रखा है। इसे देखकर दिल दहल जाता है कि यह देश किस तरफ जा रहा है। इसलिए आज केन्द्र और राज्य की सरकारों को अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी पूरी करनी चाहिए, और हिंसा को रोकना चाहिए। हिंसा के जख्म बरसों तक जवाबी हिंसा के लिए लोगों को उकसाते हैं।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें