बलात्कारी बापू-बाबा भांडाफोड़ से देश को यह सबक लेना चाहिए

संपादकीय
10 सितंबर 2017


वैसे तो डेरा सच्चा सौदा के बलात्कारी बाबा राम रहीम के बारे में लिखने को अधिक कुछ नहीं बचा है क्योंकि पिछले कुछ हफ्तों में कई बार उस पर लिखा गया, लेकिन अब जब इस बाबा को चारों तरफ से धिक्कार मिल रही है, और डेरा की तलाशी में इस बाबा की ऐशगाह से साध्वियों के कमरों तक, छात्राओं के हॉस्टल तक सुरंग मिलने की खबरें आ रही हैं, तो इस पूरे सिलसिले पर फिर से एक नजर डालने की जरूरत है कि इससे देश को क्या सबक लेना चाहिए। इसके अलावा आज ही अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद में फर्जी बाबाओं की एक लिस्ट जारी की है जिसमें कई चर्चित बाबाओं में से आसाराम बापू, राधे मां, राम रहीम, निर्मल बाबा, स्वामी असीमानंद, आसाराम के बेटे नारायण सांई, रामपाल जैसे बहुत से लोगों के नाम जारी किए गए हैं, और कहा गया है कि इन लोगों को संत जैसी उपाधि देने के पहले एक प्रक्रिया से उनको आंका जाएगा। इस परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरी का कहना है कि इस बैठक के पहले तीन दिनों में तीन अलग-अलग मोबाइल नंबरों से उन्हें धमकी दी गई कि वे ऐसी कोई लिस्ट जारी न करें और फोन करने वालों ने खुद को आसाराम का शिष्य बताया है। यह बात अच्छी तरह दर्ज है कि आसाराम पर चल रहे नाबालिग से बलात्कार के मामले में बहुत से गवाहों की अब तक हत्या हो चुकी है, और उसी के चलते कई बरस से आसाराम को जमानत भी नहीं मिल पाई है, सारे गवाहों के बयान भी अदालत में दर्ज नहीं हो पाए हैं।
हम इन तमाम बातों को देखते हुए लोगों के सामने यह बात रखना चाहते हैं कि अपने परिवार के बालिग और नाबालिग लोगों को किसी भी धार्मिक या आध्यात्मिक गुरू के सामने पेश करने के पहले उनको यह समझ लेना चाहिए कि दुनिया में धर्म और अध्यात्म से जुड़े हुए लोगों का इतिहास ऐसे मामलों से भरा हुआ है। जब कभी अपने परिवार को लोग ऐसी जगहों पर ले जाते हैं, वे एक बहुत बड़ा खतरा मोल लेते हैं। कैथोलिक ईसाई धर्म के बड़े-बड़े पादरियों से लेकर दूसरे बहुत से धर्मों के लोगों तक को बच्चों से बलात्कार में पकड़ा गया है, भारत में बहुत से भगवाधारी और स्वघोषित संत या बाबा की सेक्स-फिल्में इंटरनेट पर भरी पड़ी हैं। आसाराम जिस नाबालिग बच्ची के साथ बलात्कार के आरोप में जेल में है, वह बच्ची भी आसाराम की संस्था द्वारा चलाई जा रही एक स्कूल की हॉस्टल की थी, और उसके मां-बाप आसाराम के भक्त थे। बाबा राम रहीम ने जिन साध्वियों के साथ बलात्कार करके 20 बरस की कैद हासिल की है, वे साध्वियां भी उस बाबा के भक्तों के परिवार की नाबालिग बच्चियां थीं, और उसी उम्र में आश्रम को सौंप दी गई थीं। इसलिए लोगों की आस्था उनके परिवारों के लिए भी जानलेवा साबित होती है।
जब तक हिन्दुस्तान में यह अंधविश्वास बने रहेगा कि ऐसे बाबाओं के प्रति हर तरह का समर्पण उन्हें पापों से मुक्ति दिला देगा, या कि स्वर्ग पहुंचा देगा, या कि ईश्वर से मिला देगा, तब तक ऐसे अंधभक्तों के परिवार भी खतरे में रहेंगे। धर्म और आध्यात्म का चोला पहनकर बहुत से लोग देह शोषण में जुट जाते हैं, और ऐसे हजारों में से कोई एक-दो मामले ही शिकायत और पुलिस-अदालत तक पहुंच पाते हैं। देश में अवैज्ञानिक सोच, अंधविश्वास, और धर्मान्धता के चलते लोग अपनी तर्कशक्ति, अपनी सामान्य समझबूझ खो बैठते हैं, और ऐसे बाबाओं, पाखंडियों, और स्वघोषित संतों के हाथों न सिर्फ खुद लुटते हैं, बल्कि अपने परिवार को भी झोंक देते हैं। यह सिलसिला इस ताजा बलात्कार कांड के खुलासे के बाद कुछ थमना चाहिए। चूंकि इन साध्वियों के साथ हुए बलात्कार को तो वापिस किया नहीं जा सकता, इसलिए अब केवल यही बात काम की हो सकती है कि ऐसे खतरों से देश के लोगों को अधिक से अधिक आगाह किया जाए, और देश की बाकी बच्चियों को, बच्चों को, महिलाओं को बचाया जाए। और बाबा राम रहीम के मामले में तो यह भी सामने आया है कि वह अपने भक्तों में से सैकड़ों नौजवानों को भी अपने एक ऑपरेशन थियेटर में डॉक्टरों से सर्जरी करवाकर नपुंसक बनवा देता था ताकि वे अपना सेक्स खोकर पूरी तरह इस बाबा के लिए ही समर्पित रहें। इसलिए हर उम्र और हर सेक्स के लोगों को हर तरह के बाबाओं से बचकर रहना चाहिए यह सबक आज देश की हवा में है, और राम रहीम कांड से अब देश में शुरू हुई इस नई चर्चा से एक जागरूकता आनी चाहिए, और ऐसे हर बाबा का भांडाफोड़ करने के लिए जागरूक लोगों को कैमरे-माइक्रोफोन सबका इस्तेमाल करके जनता का भला करना चाहिए। 

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