बच्चों पर सेक्स हमलों से बचाव के लिए बड़ी जागरूकता जरूरी

संपादकीय
11 सितंबर 2017


दिल्ली और उसके आसपास के हादसे कुछ बड़ी खबरें बनते हैं क्योंकि वहीं पर बड़े अखबार, बड़े टीवी चैनल, देश की सबसे बड़ी अदालत, देश की सबसे बड़ी सरकार, और देश के बाकी तमाम किस्म के सबसे बड़े ओहदे भी बसते हैं। जिस तरह इंसान के शरीर में सिर के सबसे करीब लगने वाली चोट का सबसे अधिक असर होता है, उसी तरह देश की राजधानी की बातें बाकी देश के मुकाबले अधिक मायने रखती हैं। और जैसे-जैसे हादसे महानगरों से दूरी पर होते हैं, उनका महत्व घटते जाता है। लेकिन हादसे तो हादसे होते हैं, और इनके अधिक चर्चा में आने से इतना तो होता है कि देश भर का ध्यान उनकी तरफ जाता है, और ऐसे मौके पर समझदार तबकों को कोशिश करके उनके मुद्दों पर एक व्यापक और बड़ी चर्चा करवानी चाहिए ताकि देश में भी खतरों पर फिक्र हो सके और लोग चौकन्ने हो सके, कुछ रास्ता ढूंढा जा सके।
दिल्ली के बगल गुडग़ांव में अभी एक स्कूल में छोटे से बच्चे को बलात्कार की कोशिश के बाद स्कूल के बस कंडक्टर ने ही मार डाला।  और दिल्ली में एक स्कूल में एक बच्ची से बलात्कार हुआ। इन दो घटनाओं से सबक लेते हुए देश भर में बाकी सरकारों, बाकी स्कूलों, और बाकी मां-बाप को भी अपने-अपने इंतजाम दुरूस्त कर लेने चाहिए। आज स्कूलें घरों से बहुत दूर-दूर हो गई हैं, और बच्चे हर दिन औसतन घंटे-दो घंटे तो सफर करते ही हैं। ऐसे में उनकी हिफाजत एक आसान बात नहीं होती, और सरकार के नियम-कायदे, उसकी नसीहतें सब धरे रह जाते हैं, और स्कूलें, बहुत महंगी स्कूलें भी लापरवाह साबित होती हैं। अभी गुडग़ांव में जिस स्कूल में यह बलात्कार-हत्या का मामला सामने आया है वह देश की सबसे बड़ी और चर्चित स्कूलों की एक चेन है, और उसकी मालकिन देश के सबसे ताकतवर नेताओं से परिचित भी है। हम इस मौके पर उस मालकिन की राजनीतिक पार्टी और नेताओं के साथ उसकी शिष्टाचार मुलाकातों की तस्वीरों को महत्वपूर्ण नहीं मानते जो कि रोजाना सामने आ रही हैं। लेकिन हम इस बात को महत्वपूर्ण मानते हैं कि इस स्कूल ने जहां-जहां गलती की है और गलत काम किए हैं, वहां-वहां उसे सजा मिलनी चाहिए।
लेकिन एक दूसरे मुद्दे पर भी चर्चा जरूरी है कि सरकार स्कूल और मां-बाप के अलावा खुद बच्चों के भीतर जागरूकता कैसे पैदा की जाए। हो सकता है कि अभी के दो हादसों में बच्चे कुछ अधिक छोटे हों और उनके लिए किसी हिंसा का मुकाबला करना मुमकिन न हो, लेकिन देश में बच्चों के यौन शोषण के खिलाफ बच्चों में एक व्यापक जागरूकता की जरूरत है क्योंकि उन पर ऐसे सेक्स हमले न सिर्फ स्कूल या खेल के मैदान में हो सकते हैं, बल्कि घर में भी हो सकते हैं। कल ही कोई खबर आई है कि मां-बाप पड़ोस में बैठने गए थे, और घर पर रह गई अकेली बच्ची के साथ पड़ोसी ने बलात्कार किया। इसलिए बच्चों को जागरूक करना जरूरी है कि परिवार के सदस्य, पड़ोस के लोग, स्कूल या दूसरी जगहों के लोग उन्हें अगर किसी तरह से छूते हैं, तो उन्हें क्या करना है। भारत में किसी भी तरह की सेक्स शिक्षा, शरीर शिक्षा, या जागरूकता की बात करना झंडों-डंडों को न्यौता देना हो जाता है, और दकियानूसी लोग ऐसा माहौल खड़ा करने लगते हैं कि ये सारे सेक्स अपराध भारत में नहीं होते, और ये पश्चिमी संस्कृति हैं। हकीकत यह है कि दकियानूसी देश में ऐसी बातें अधिक होती हैं क्योंकि पश्चिमी देशों में तो मां-बाप भी चौकन्ने रहते हैं और बच्चों को भी सावधानी सिखाई जाती है। भारत ऐसे बचाव से अछूता है। लेकिन अब ऐसे हादसों को देखते हुए यह जरूरी है कि लोग कई तरह के अलग-अलग मंचों पर इस मुद्दे पर चर्चा करें, और मां-बाप से लेकर बच्चों तक सबकी सावधानी को बढ़ावा दें।

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