ऐसा होने पर गधे गाली खाने से बचेंगे, और बाबा लोग जेल...

संपादकीय
15 सितंबर 2017


अभी देश में यह बहस चल रही है कि कौन बाबा असली है, और कौन नकली। कुछ बाबाओं ने एक बैठक करके कुछ दूसरे बाबाओं को नकली घोषित कर दिया, तो जवाब में मानहानि के नोटिस की चर्चा है। अब एक नाबालिग के साथ बलात्कार के आरोप में बरसों से जेल में बंद, एक वक्त बापू कहलाने वाले, आसाराम से अभी मीडिया ने पूछा कि वे किस श्रेणी के बाबा हैं। तो इसके जवाब में आसाराम ने कहा कि वे गधों की श्रेणी में आते हैं। बरसों से जेल में बंद एक बुजुर्ग का आपा खोना समझ में आता है क्योंकि आराम और इज्जत की लंबी जिंदगी के बाद जब ऐसी जेल नसीब होती है, और आगे का भविष्य अंधकारमय दिखता है, तो कोई भी अपना आपा खो सकते हैं। लेकिन फिर भी गधे से अपनी तुलना करना ठीक नहीं है, क्योंकि दुनिया में किसी भी गधे पर कभी बलात्कार का कोई मुकदमा नहीं चला है, और इंसानों से परे जानवरों की दुनिया में न तो इस तरह के बलात्कार होते हैं, और न ही जानवर अपनी प्रजातियों के नाबालिग बच्चों से ऐसी हरकत करते हैं। फिर भी जानवरों के अधिकारों के लिए लडऩे वाले लोग अब तक महज उनके साथ हिंसा के मामलों को लेकर लड़ते हैं, उन्हें गाली देने वाले लोगों के खिलाफ मुकदमा लडऩे का समय अभी किसी के पास आया नहीं है।
लेकिन आसाराम ने चाहे झल्लाहट में यह बात कही हो, और चाहे अपने को गधा कहने के पीछे उनकी नीयत गधे को एक बेवकूफ जानवर साबित करने की रही हो, हकीकत यही है कि सेक्स के बहुत से अपराधों में जो लोग पकड़ाते हैं, वे गधे तो नहीं रहते, बेवकूफ जरूर रहते हैं। आज हिन्दुस्तान में सेक्स की खरीद-बिक्री गैरकानूनी है, और इस पर सजा हो सकती है। लेकिन दुनिया के दर्जनों ऐसे देश हैं जहां पर इसे कानूनी दर्जा मिला हुआ है, और बैंकाक जैसे भारत के पास के कुछ देश ऐसे भी हैं जहां पर सेक्स-पर्यटन एक बड़ा कारोबार है। ऐसे में भारत के जो अतिसंपन्न लोग हैं, वे अगर अपनी सेक्स-जरूरतों के लिए नाबालिग लड़कियों या अनुयायी महिलाओं पर हमला करते हैं, तो इसके बजाय बेहतर यह होता कि वे दुनिया के दूसरे देशों में चले जाते, और वहां सेक्स खरीदकर अपनी जरूरत पूरी कर लेते। इससे भारत में उनका आडंबर भी बचे रह जाता, भारत की मासूम बच्चियां भी बची रह जातीं, और दुनिया के दूसरे देशों में सेक्स-कर्मियों को एक ग्राहक भी मिल गया होता। हमको इस बात का पक्का भरोसा है कि अगर इन बाबाओं जितनी दौलत किसी गधे के पास होती, और उस गधे की ऐसी सेक्स जरूरतें होतीं, तो वह गधा उन देशों में चले जाता जहां सेक्स खरीदना कानूनी है, और मजे करके लौट आता। लेकिन इंसानों में समझ गधे से कुछ कम ही है, इसलिए सैकड़ों करोड़ की, शायद हजारों करोड़ की दौलत वाले लोग भी बलात्कार के जुर्म में जेल में हैं।
दरअसल होता यह है कि जब किसी बहुत कामयाब और मशहूर, लोकप्रिय या भक्तों से घिरे हुए इंसान को कानून का खतरा समझना बंद हो जाता है, तो फिर वे ऐसी चूक कर बैठते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि देश का कानून उनके ऊपर लागू नहीं होता। ऐसी बददिमाग और बेदिमाग ताकत दुनिया के दूसरे देशों में इस्तेमाल नहीं होती, खासकर जहां पर लोकतंत्र मजबूत है, और अदालतों को खरीदना मुमकिन नहीं है। यही वजह है कि भारत में लोकतंत्र की कमजोरी की वजह से अरबपति-खरबपति लोग भी बलात्कार के मामलों में जेल में हैं। हमारी सलाह तो देश की सरकार और जनता को यह है कि वेश्यावृत्ति को भारत में कानूनी दर्जा देना चाहिए, ताकि ऐसे संभावित बलात्कारियों से बाकी लोगों को बचाव मिल सके। वेश्यावृत्ति को कानूनी बनाने से वेश्याओं को भी बहुत बड़ी सामाजिक और कानूनी सुरक्षा मिलेगी जो कि आज बिल्कुल भी नहीं है। आज पुलिस, दूसरे सरकारी अमले, इलाके के गुंडे, और कई मामलों में स्थानीय नेता, ये सब वेश्याओं से उगाही करते हैं, और अपना बदन बेचकर मिलने वाली उसकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा इन लोगों पर लुट जाता है। इसलिए सेक्स-अपराधों को घटाने के लिए, और सेक्स-कर्मियों को सुरक्षा देने के लिए भारत में वेश्यावृत्ति को कानूनी बनाने की जरूरत है। कहने के लिए हिन्दुस्तान की संस्कृति में भी नगरवधुओं की पुरानी परंपरा है, और सैकड़ों बरस से इसे दुनिया का सबसे पुराना पेशा कहा भी जाता है, लेकिन सरकारों में इतना नैतिक साहस नहीं रहता है कि वे वेश्यावृत्ति को कानूनी बनाने जैसा फैसला ले सकें। ऐसा होने पर गधे गाली खाने से बचेंगे, और बाबा लोग जेल जाने से। 

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