दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय, 26 फरवरी : फोन और इंटरनेट से दुनिया के गरीबों की जिंदगी तब्दील

संपादकीय
26 फरवरी 2018


आज हिन्दुस्तान के किसी भी गांव-कस्बे से गुजरें, तो कुछ बरस पहले वहां जितने चाय-पानठेले हुआ करते थे, अब उससे कई गुना अधिक मोबाइल-फोन दुकानें हो गई हैं। इनमें से कुछ दुकानें फोन बेचती हैं, कुछ केवल सिमकार्ड-रीचार्ज करने का काम करती हैं, कुछ दुकानें फोन सुधारती हैं, और कुछ इनमें से तमाम काम करती हैं। इनकी गिनती को गांव-शहर में देखा जाए तो लगता है कि आज कारोबारी और कारीगरी के रोजगार का एक बहुत बड़ा जरिया यह बन गया है। दूसरी तरफ जिन लोगों के हाथों में फोन आ गया है, उनकी जिंदगी और उनके रोजगार पर क्या फर्क पड़ा है यह उन्हें बारीकी से देखने पर ही समझ आ सकता है। सबसे कम मजदूरी वाले मजदूर भी अब घर बैठे काम पर बुला लिए जाते हैं, एक दिन का काम पूरा होता नहीं है, और वे दूसरे दिन का काम तय कर पाते हैं। कारीगर काम पा रहे हैं, छोटे कारोबारी घरों तक सामान पहुंचा रहे हैं, और अभी 30-40 बरस पहले तक हिन्दुस्तान में टेलीफोन संपन्नता का एक सुबूत होता था, आज बेरोजगारों के हाथ में भी फोन है, सड़कों को साफ करती महिलाएं भी अपने फोन पर संगीत सुनते हुए काम करते दिखती हैं। 
इस बात पर चर्चा इसलिए जरूरी है कि छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में अगले आधे बरस के भीतर ही राज्य सरकार करीब एक चौथाई आबादी के हाथ में स्मार्टफोन थमाने जा रही है। इसमें गरीब लोग, कॉलेज के छात्र-छात्राएं होंगे, और अगर एक परिवार में चार बड़े लोग हैं, तो उन चारों को सरकार से फोन मिलने जा रहा है। दुनिया की आर्थिक समझ रखने वाले लोगों का यह नतीजा निकाला हुआ है कि किसी इलाके में आबादी के अनुपात में जैसे-जैसे फोन बढ़ते चलते हैं, वैसे-वैसे वहां का आर्थिक विकास भी बढ़ते चलता है। अभी हम आंकड़ों पर बहुत ज्यादा जाना नहीं चाहते, लेकिन अगर छत्तीसगढ़ में सरकार 55 लाख लोगों को स्मार्टफोन थमाने जा रही है, इनमें से हर किसी की जिंदगी पर कुछ न कुछ असर पड़ेगा। परिवार का काम निपटेगा, और रोजगार या कारोबार में बढ़ोत्तरी-तरक्की होगी, अब तक जो बिना फोन के हैं, वे अपने घर या रोजगार की जगह से फोन से जुड़ जाएंगे। 
अमरीकी कारोबारी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने आज ही एक रिपोर्ट छापी है कि किस तरह इंटरनेट दुनिया के सबसे गरीब लोगों की जिंदगी को बदल रहा है। फोन और इंटरनेट से होने वाले फायदों को हिन्दुस्तान में भी देखा गया है कि किस तरह आन्ध्र में जब मछुआरे मछली मारकर किनारे लौटते होते हैं, तो समंदर की लहरों पर से ही वे मछली बाजार के व्यापारी से सौदा कर लेते हैं, और टोकरे उठाकर उन्हें व्यापारियों के पास घूमना नहीं पड़ता। छत्तीसगढ़ में सरकार ने स्मार्टफोन बांटना तो तय कर लिया है, लेकिन फोन और इंटरनेट से सबसे गरीब लोगों की जिंदगी में किस तरह का वैल्यू-एडिशन हो सकता है, इसके लिए भी सरकार को योजना बनानी चाहिए। यह हो सकता है कि रमन सरकार का मौजूदा कार्यकाल ऐसी लंबी योजना पर अमल करने के लिए छोटा हो, लेकिन दीर्घकालीन फायदे की योजनाओं के लिए सरकारों को अपने कार्यकाल से परे की भी निरंतरता जारी रखनी चाहिए। छत्तीसगढ़ में लोगों की क्षमताओं के इस्तेमाल की भारी संभावना बाकी है, और सरकार को इसके लिए जनता से जुड़े हुए लोगों को शामिल करके योजना बनानी चाहिए। (Daily Chhattisgarh)

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन वीर सावरकर और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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