दो महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय योजनाओं की आज से बस्तर में शुरूआत...

संपादकीय
14 अप्रैल 2018


छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर के बीजापुर जिले से इस वक्त प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक बहुत महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम का उद्घाटन कर रहे हैं। आयुष्मान भारत कार्यक्रम के तहत पूरे देश के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों को बेहतर और मजबूत बनाया जाएगा, और देश की 40 फीसदी आबादी को स्वास्थ्य बीमा दिया जाएगा ताकि वे इससे और ऊपर के इलाज के लिए भी जा सकते हैं। इसके साथ-साथ बीजापुर जिले को देश के उन 115 आकांक्षी जिलों में से छांटा गया है जहां प्रधानमंत्री विकास का सबसे अधिक फोकस करना चाहते हैं क्योंकि ये जिले देश में सबसे पिछड़े हुए हैं, और इन्हें विकास की मूलधारा में लाए बिना न तो समानता आ सकती है, और न ही देश का पूरा विकास ही हो सकता है। 
ये दोनों ही बातें अभी तक की घोषणाओं में और कागजों पर अच्छी लग रही हैं, लेकिन आने वाले बरस बताएंगे कि केन्द्र और राज्य मिलकर कहां-कहां पर कामयाब होते हैं, और कहां-कहां पर ये दोनों योजनाएं महज कागजों पर रह जाएंगी। पिछली करीब आधी सदी में हिन्दुस्तान में अलग-अलग केन्द्र सरकारों के कार्यकाल में तरह-तरह की योजनाओं को सुना है। इनमें से कुछ कामयाब रहीं, और कुछ बड़ी सहूलियत से भुला दी गईं। अब जैसे छत्तीसगढ़ में ही हर आदिवासी परिवार को एक गाय देने की घोषणा जब किसी किनारे नहीं पहुंची, तो राज्य सरकार ने उसे छोड़ ही दिया। दूसरी तरफ राज्य के हर गरीब को बहुत ही रियायती अनाज देने की योजना न सिर्फ जमीन पर उतरी, बल्कि उसकी कामयाबी आसमान पर पहुंची, और छत्तीसगढ़ सरकार ने उसे लगातार आगे बढ़ाया, उसका विस्तार किया, और दूसरे राज्य भी इसे देखने छत्तीसगढ़ आए। 
अब जहां तक आयुष्मान भारत कार्यक्रम के तहत प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के विकास की सोच है, और इन्हें स्वास्थ्य एवं स्वस्थ जीवन केन्द्र का नया ब्रांड नाम भी दिया गया है, तो इनकी कामयाबी के लिए हम अभी शुभकामनाएं ही दे सकते हैं, अभी कोई उम्मीद इसके लिए नहीं कर सकते। छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में सरकारी स्वास्थ्य सेवा को लेकर लोगों का तजुर्बा बहुत ही खराब रहा है। एक तरफ तो सरकार स्वास्थ्य सेवा से जुड़े हुए कुछ चुनिंदा अभियानों में कामयाबी गिनाते थकती नहीं है, तो दूसरी तरफ बिना किसी अभियान के जो रोजमर्रा के काम हैं, उनमें सरकारी केन्द्रों और अस्पतालों की बदहाली गांव-गांव से लेकर प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल तक एक आम बात है। ऐसे में केन्द्र सरकार तो बजट ही दे सकती है, उस योजना पर अमल और खर्च तो राज्य सरकार को ही करना है, और आज शायद ही कोई ऐसा दिन है जो कि स्वास्थ्य विभाग के व्यापक, संगठित, और भयानक भ्रष्टाचार की खबरों के बिना आता हो। दिल्ली में बैठकर प्रधानमंत्री अपनी ही पार्टी के राज्यों में अमल पर कितना काबू रख पाएंगे, इस पर हमें भारी शक है। 
दूसरी योजना, आकांक्षी जिलों, की कामयाबी की संभावना हमें अधिक दिखती है क्योंकि सबसे पिछड़े जिले में अगर मेहनत हो, तो उनमें तेजी से सुधार लाने की गुंजाइश हमेशा रहती है, और ऐसे जिलों में तैनात अफसरों को छांटने में अगर सावधानी बरती जाए तो वे राज्य स्तर के भ्रष्टाचार से कुछ या अधिक हद तक बचे भी रह सकते हैं। आज भी छत्तीसगढ़ सहित बहुत से ऐसे राज्य हैं जहां पर नौजवान कलेक्टर अपने पहले या दूसरे जिलों की जिम्मेदारी को एक चुनौती की तरह लेते हैं, और उन जिलों में कुछ ऐसा कर दिखाने की कोशिश करते हैं जो कि बाकी देश के लिए भी एक मिसाल बने। छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार ने खनिज विकास निधि को पूरी तरह जिला कलेक्टरों के विवेक पर छोड़ दिया है, और उससे भी कई जिलों में बहुत बड़े और अच्छे काम हो रहे हैं। हम कलेक्टरों के काम और खनिज विकास निधि के फैसले पर अपनी कुछ असहमति के बावजूद यह सोचते हैं कि सबसे पिछड़े जिलों में सचमुच ही एक चुनौती की तरह काम करने वाले नौजवान अफसरों को मौका देना चाहिए, और उनके बीच राष्ट्रीय स्तर पर एक मुकाबला करवाने में भी कोई बुराई नहीं है। आकांक्षी जिलों को लेकर केन्द्र सरकार इसी तरह की सोच रखती है, और हम देश की एक बड़ी आबादी को विकास के पैमानों पर बाकी लोगों की ओर बढ़ाने के हिमायती हैं। इसलिए चाहे किसी भी पार्टी के प्रधानमंत्री हों, चाहे किसी भी पार्टी की राज्य सरकार हो, बिना किसी मतभेद और टकराव के इस संघीय लोकतंत्र में सबसे पिछड़ों की सबसे बढ़ोत्तरी की कोशिश की जानी चाहिए। देश की 15 फीसदी आबादी इन आकांक्षी जिलों में बसी है, और ये जिले सभी 28 राज्यों में बिखरे हुए हैं। छत्तीसगढ़ में ऐसे 10 आकांक्षी जिले हैं जिनमें से कई नक्सल-हिंसा प्रभावित हैं। आने वाले बरसों में यह योजना एक दिलचस्प अध्ययन का मुद्दा रहेगी, और आज बस्तर एक किस्म से इन दोनों ही योजनाओं की शुरूआत देख रहा है। (Daily Chhattisgarh)

1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन डॉ. भीमराव अंबेडकर और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

    उत्तर देंहटाएं