खाली पड़े एटीएम सरकार की विश्वसनीयता खाली कर रहे

संपादकीय
17 अप्रैल 2018


देश के बहुत बड़े हिस्से में एटीएम खाली पड़े हैं। लोग दर्जन-दर्जन भर जगहों पर धक्के खा रहे हैं, और अब तो बैंकों ने एटीएम पर यह नोटिस लगाने की जहमत भी उठाना बंद कर दिया है कि कैश नहीं है। कुछ ही दिन पहले हमने रिपोर्ट छापी थी कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की कैश मशीनें बैंक एटीएम से ही निकले हुए नए और असली नोटों को भी नहीं ले रही हैं, और 40 हजार रूपए जमा करने के लिए एसबीआई की आधा दर्जन मशीनों तक जाकर 21 बार कोशिश करनी पड़ी, तब उतनी रकम जमा हो पाई। आज पूरे देश में नोटबंदी के दिनों जैसी हड़कंप है, और लोगों के खाते में पैसा है लेकिन एटीएम खाली है। दूसरी तरफ वित्तमंत्री का कहना है कि देश में पर्याप्त से अधिक नोट चलन में हैं, और कुछ जगहों पर अधिक रकम निकालने से एटीएम खाली हुए हैं जो कि अगले कुछ दिनों में सामान्य हो जाएंगे। 
यह नौबत दो वजहों से खराब है। एक तो इससे सरकार की और बैंकों की साख चौपट हो रही है जो कि तरह-तरह की जालसाजी और धोखाधड़ी में बैंकों की भागीदारी साबित होने पर वैसे भी मिट्टी में मिली हुई है। दूसरी बात यह कि नोटबंदी के भयानक दिनों को जनता अब तक भूली नहीं है, और एक बार फिर उसे डर लग रहा है कि कहीं यह दो हजार रूपए वाले नोटों को बंद करने की तैयारी तो नहीं है। जब लोग मेहनत से की गई अपनी बचत को अपनी जरूरत के समय न निकाल सकें, तो सरकार और बैंकों के ये तमाम आंकड़े फिजूल हैं कि देश में कितने नोट चलन में हैं। हम पिछले कई दिनों से इस बारे में लिख रहे थे कि मशीनें काम नहीं करती हैं, जहां काम करती हैं वहां नोट नहीं रहते। और यह नौबत अब बढ़ते-बढ़ते देश के बहुत से प्रदेशों में आ गई है। 
गैस सिलेंडरों से लेकर एटीएम तक, और बैंकों तक जब आम जनता की लंबी-लंबी कतारें लगती हैं, तो ऐसा लगता है कि सरकार की नजर में आम जनता के वक्त और उसकी उत्पादकता की कोई कीमत नहीं है। जब किसी को कुछ हजार रूपए निकालने के लिए आधा दर्जन एटीएम तक धक्का खाना पड़ता है, तो छोटे लोगों का बड़ा वक्त बर्बाद होता है। बड़े लोगों को तो कोई फर्क नहीं पड़ता, और वे तो अपने क्रेडिट कार्ड से भुगतान कर लेते हैं, या पूरे के पूरे बैंक को अपने क्रेडिट कार्ड की तरह इस्तेमाल करके दूसरे देश जा बसते हैं। लेकिन गरीब जनता को घर में नोट रखने में भी डर है कि कब कौन सा नोट बंद हो जाए, दूसरी तरफ बैंकों में रखने में भी डर है कि वक्त -जरूरत निकल पाए या नहीं। पिछले कुछ महीनों से यह बात भी चर्चा में है कि मोदी सरकार संसद में एक ऐसा कानून लाने जा रही है जिसमें किसी बैंक के डूबने की नौबत आने पर बैंक उसमें लोगों की जमा रकम का इस्तेमाल करके अपने आपको बचा सकेगा। यह बात महज अफवाह नहीं थी, और संसद में लाए जा रहे विधेयक में इस तरह की बात थी, जिसे सरकार को हटाना पड़ा। फिर हर बार एटीएम इस्तेमाल करने पर कुछ बार के बाद बैंक एक चार्ज वसूलने लगती है, और वह भी गरीबों पर बड़ा भारी पड़ता है। कुल मिलाकर ऐसा लगता है कि बैंकों की शक्ल में मुगल-ए-आजम अनारकली से कह रहे हैं कि सलीम तूझे मरने नहीं देगा, और हम तुझे जीने नहीं देंगे। 
देश की जनता में आत्मविश्वास का इतना टूटना लोकतंत्र के लिए घातक और खतरनाक है। दूसरी तरफ सरकार की साख का इतने बड़े पैमाने पर चौपट होना सत्तारूढ़ पार्टी या गठबंधन के राजनीतिक-चुनावी हितों के खिलाफ भी है। (Daily Chhattisgarh)

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