एक मिसाल, यह सीखने कि क्या-क्या नहीं करना चाहिए

संपादकीय
20 अप्रैल 2018


पिछले कुछ महीनों से लगातार बुरी बातों की वजह से खबरों में बने रहने वाले एक वक्त के मशहूर और लोकप्रिय कॉमेडियन कपिल शर्मा के बारे में जब-जब ऐसा लगा कि उनके बारे में सबसे बुरी खबर आ चुकी है, और अब वे वापिस सुधार के रास्ते पर दिखेंगे, तब-तब उन्होंने और घटिया हरकत करके अपने प्रशंसकों को निराश किया है, और बाकी लोगों के सामने भी एक मिसाल रखी है कि किस तरह कामयाबी और शोहरत लोगों के सिर पर चढ़कर नंगा नाचने लगती हैं, और लोग समझदारी छोड़कर आत्मघाती गलतियां करने लगते हैं। 
आज जब फोन और टेक्नालॉजी के नमूने के रूप में रोजाना ही किसी न किसी की बातचीत की रिकॉर्डिंग मीडिया में छाई रहती है, तब कपिल शर्मा ने किसी पत्रकार से गंदी बातें कहने और धमकाने का एक नया रिकॉर्ड कायम किया है। उन्होंने जो गालियां दीं, उन्हें न छापा जा सकता, और न ही टीवी पर सुनाया ही जा सकता। उनकी जुबान से निकले शब्द बीच-बीच में दूसरे निशान लगा-लगाकर ही कहीं पोस्ट किए गए हैं, और कहीं छापे गए हैं। एक पूरी तरह से नाकामयाब हो चुका कॉमेडियन इतना बड़ा मुद्दा नहीं है कि उस पर हम यहां लिखें, लेकिन इस मिसाल पर लिखना जरूरी लग रहा है कि कामयाबी और शोहरत की ताकत के बीच अपने दिमाग को काबू में रखना कितना जरूरी होता है। जो ऐसा नहीं कर पाते, उनका बेकाबू दिमाग उन्हें कहां ले जाकर पटकता है, यह देखना हो तो कपिल शर्मा सामने है जो अपने टीवी शो की रिकॉर्डिंग करने की हालत में भी नहीं बचे हैं। 
शोहरत और कामयाबी का नशा शराब जैसे नशे के मुकाबले भी अधिक खतरनाक होता है, और राजनीति से लेकर कारोबार तक बहुत सी जगहों पर आसमान पर पहुंचे लोग इस नशे में जमीन पर आ गिरते हैं। इसीलिए बुजुर्गों ने दिमाग को काबू में रखने के लिए अनगिनत कहावतें और मुहावरे गढ़े हैं, और सयाने लोग आसपास के लोगों को ऐसी मुफ्त नसीहत भी बांटते रहते हैं। ऐसी नौबत से बचने के लिए लोगों को अपने आसपास कुछ ऐसे लोगों को रखना चाहिए जिनके लिए कहा गया था कि निंदक नियरे राखिए। दिक्कत यह है कि कामयाबी और ताकत में आसपास चापलूसों की भीड़ खींच लेने की अद्भुत ताकत होती है। लोग अपने मुसाहिबों के मुंह से अपनी तारीफ सुन-सुनकर अपने को खुदा मान बैठते हैं, और ऐसे लोगों के लिए किसी ने एक वक्त लिखा था कि तुमसे पहले वो जो इक शख्स यहां तख्त नशीं था, उसको भी अपने खुदा होने पे इतना ही यकीं था।
मनोरंजन की दुनिया से दूर, खासकर सत्ता की राजनीति में ऐसी बददिमागी बहुत अधिक दिखती है जब ताकतवर नेता पेशाब करने को जाते हुए भी सायरन बजाते हुए जाने की जिद पर अड़े रहते हैं। उन तमाम लोगों को चापलूसी से परे यह भी देख लेना चाहिए कि उनके पहले के नेताओं का क्या हाल हुआ है। हो सकता है कि उन्होंने एक वक्त लालू-कुनबे जैसी कमाई कर ली हो, लेकिन उनको आज लालू-कुनबे जैसी सजा और कोर्ट-कचहरी भी देखना पड़ रहा है। कपिल शर्मा की मिसाल सिर्फ मनोरंजन के कारोबार की मिसाल नहीं है, यह इंसान की बददिमागी की मिसाल है, और उसे देखकर लोगों को यह समझ लेना चाहिए कि इंसान को क्या-क्या नहीं करना चाहिए। (Daily Chhattisgarh)

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