बहादुरी चाहे न रही हो, ईमानदारी तो है ही...

संपादकीय
23 अप्रैल 2018


अमरीका में एक रेस्त्रां में घुसकर अंधाधुंध गोलियां चलाकर एक गोरे नौजवान ने चार लोगों को मार डाला, और बहुत से लोगों को जख्मी कर दिया। यह नौजवान पहले से आत्मघाती मिजाज का था, और उसके परिवार ने एक बार पहले पुलिस को खबर भी की थी। पिछले बरस उसे राष्ट्रपति भवन के पास एक सुरक्षा घेरे को लांघने के जुर्म में गिरफ्तार भी किया गया था। लेकिन इसके बावजूद अमरीकी कानून के मुताबिक उसे कई तरह के हथियार रखने की छूट दी, और वह एक ऑटोमेटिक रायफल लेकर इतवार की सुबह रेस्त्रां में घुसा, और गोलीबारी की। अमरीका में हर नागरिक के पास कितने भी हथियार हो सकते हैं, और ये हथियार आत्मरक्षा के हथियार जैसे न होकर, हमला करने के हथियार भी रहते हैं, और हर कुछ दिनों में वहां गोलीबारी के बाद हथियारों पर काबू की मांग उठती है, लेकिन हथियार कंपनियां सरकार पर अपने दबाव के चलते ऐसा होने नहीं देती। अमरीका की कुख्यात गन-लॉबी बहुत सी पार्टियों, और बहुत से उम्मीदवारों को चुनाव में बहुत सा पैसा देती है, और उनके कारोबार पर रोक नहीं लग पाती। 
लेकिन आज इस गन कंट्रोल की मांग पर लिखने का मकसद नहीं है, बल्कि इस हादसे में हीरो की तरह सामने आए एक नौजवान पर लिखना है जिसने इस बंदूकबाज पर कब्जा किया, और बाकी बहुत सी जिंदगियों को बचाया। एक अश्वेत नौजवान उस वक्त जिस रेस्त्रां में ही था, और वह ठीक हमलावर की तरह 29 बरस का ही था। उसने मौका मिलते ही इस बंदूकबाज को दबोचा, उसका हथियार छीना, और उससे वहां मौजूद बाकी लोगों की जिंदगियां बचीं। लेकिन जब अमरीकी मीडिया और वहां मौजूद लोग जख्मी हो गए इस अश्वेत नौजवान को एक हीरो की तरह मानकर उसका शुक्रिया अदा कर रहे हैं, तो उसने कहा कि- सब लोग जो कह रहे हैं उसे मान लेना बहुत स्वार्थी बात होगी, मैंने जो कुछ किया वह अपने आपको बचाने की कोशिश थी, मेरे सामने एक मौका आया और मैंने हथियार छीनने की कार्रवाई की। 
अब एक नौजवान को खबरों में हीरो बनने का यह मौका बिना मांगे मिला, पुलिस से लेकर प्रेस, और पब्लिक तक लोगों ने उसे हीरो माना, और वह अपने मन की बात को उजागर करके इस तारीफ के हक को नकार रहा है। यह विनम्रता आसान नहीं है। आज दुनिया में लोग किसी तरह का सम्मान या पुरस्कार पाने के लिए सौ किस्म के झूठ गढ़ते हैं, इतिहास को बदल डालते हैं, और सम्मान को एक किस्म से खरीद लेते हैं। हमने अपने आसपास ही ऐसे पुलिस वाले देखे हैं जो कि बहादुरी के किस्से गढऩे के लिए झूठी मुठभेड़ को असली बताकर प्रदेश की राजधानी से लेकर देश की राजधानी तक जलसों में मैडल पाते हैं। कुछ लोग ऐसे भी रहते हैं जो अपने गुजर चुके मां-बाप को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी साबित करने के लिए कई तरह के किस्से गढ़ लेते हैं, और गवाह भी जुटा लेते हैं। ऐसे में अगर अमरीका में किसी अश्वेत नौजवान के सामने बहादुर कहे जाने का मौका खुद चलकर आया, और उसे वह बहादुरी नहीं, महज आत्मरक्षा कह रहा है, तो यह ईमानदारी और विनम्रता सोचने-समझने लायक बातें हैं। 
दुनिया में अधिकतर लोग ऐसे मौकों पर चुप रहकर तारीफ को ले लेते, और उनके अपने दिल-दिमाग पर यह बोझ भी नहीं रहता कि उन्होंने कुछ झूठ कहा, कुछ गलत कहकर यह सम्मान हासिल किया। लेकिन अपने खुद के तात्कालिक हितों के खिलाफ जाकर सिर्फ खुद को मालूम सच को इस तरह सामने रखने के लिए इंसान में एक महानता की जरूरत होती है। चाहे इस नौजवान ने महज अपने आपको बचाने के लिए हमलावर का हथियार छीना हो, लेकिन उसने इस तारीफ को जिस विनम्रता से नकारा है, उस विनम्रता के लिए तो वह सम्मान का अधिकारी है ही। यह बात बहुत छोटी सी है, लेकिन लोगों को यह सोचना चाहिए कि ऐसे कितने मौके उनके सामने आ सकते हैं, जब वे ऐसी ही सच्चाई और ईमानदारी से घर पहुंची शोहरत और तारीफ को विनम्रता से लौटा सकें कि वे उसके हकदार नहीं हैं। (Daily Chhattisgarh)

1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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