फौजियों के लिए गहने बेचती शिक्षिका और एक अफसर सैकड़ों करोड़ का

संपादकीय
27 अप्रैल 2018


पुणे की एक स्कूल शिक्षिका ने जब यह देखा कि भारत के सबसे बर्फीले इलाके सियाचिन में ऑक्सीजन की कमी से हिन्दुस्तानी फौजियों की मौत होती है, तो उसने यह तय किया कि वहां एक ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए वह अपनी एक संस्था के माध्यम से धन जुटाएगी। परिवार में पति फौज से रिटायर्ड हैं, और बेटा अब तक फौज में है। लेकिन गृहिणी की चाह फौज के लिए और कुछ करने की है, इसलिए उसने एक करोड़ के ऑक्सीजन प्लांट के लिए दान और चंदा इक_ा करने की ठानी। इसके लिए सबसे पहले उसने अपने गहने बेचकर सवा लाख रूपए जुटाए, और अब ये और लोगों को इस संगठन में दान देने के लिए प्रेरित कर रही हैं। यह संगठन लगातार फौजियों की मदद का काम करता है। 
एक तरफ तो एक शिक्षिका अपने गहने बेचकर फौजियों के लिए कुछ कर रही है, दूसरी तरफ मध्यप्रदेश में आज एक आबकारी अफसर पर छापा पड़ा है, तो पहली खबर में उसके पास पांच सौ करोड़ की दौलत मिलने का अंदाज बताया गया है। हो सकता है कि यह आंकड़ा कई गुना बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया हो, लेकिन पांच सौ करोड़ की दौलत नहीं होगी, तो सौ-पचास करोड़ की तो होगी ही। और एक सरकारी अफसर जब एक निहायत ही बदनाम और संगठित भ्रष्टाचार वाले विभाग में काम करते हुए इतनी दौलत इक_ा कर चुका है, तब उस पर कार्रवाई हो रही है। इसी विभाग में इस दर्जे के सैकड़ों अधिकारी होंगे, और विभाग का ढर्रा ऐसा है कि उसमें से शायद अधिकतर लोग ऐसे ही भ्रष्ट हों। और छत्तीसगढ़ या मध्यप्रदेश जैसे प्रदेशों में यह अकेला भ्रष्ट विभाग नहीं है। तो फिर सरकार की बहुत सारी दौलत ऐसे भ्रष्टाचार में जाती है, और जो टैक्स या कमाई सरकार को मिलनी चाहिए, उस संभावना को भी यह भ्रष्टाचार बाजार में बेच देता है। 
यह देश विसंगतियों से इसी तरह भरा हुआ है। एक महिला अपने गहने बेचकर फौजियों के लिए कुछ कर रही है, दूसरी तरफ ऐसे अफसर हैं, नेता हैं, मंत्री और सांसद-विधायक हैं जो कि देश को जोंक की तरह चूस रहे हैं। सांसद हैं कि संसद के भीतर सवाल पूछने के लिए रिश्वत मांगते, लार टपकाते पकड़ाते हैं, बड़े-बड़े अफसर हैं जो छत्तीसगढ़ जैसे राज्य की पैदाइश हैं, और इसे लूटते-लूटते रंगे हाथों पकड़ाकर बर्खास्त हो रहे हैं। यह सिलसिला तकलीफदेह है और इससे देश का एक व्यापक नुकसान भी हो रहा है। जब आम जनता यह देखती है कि उसके दिए हुए टैक्स के पैसों से या तो सरकारी फिजूलखर्ची हो रही है, नेताओं का ऐश हो रहा है, या फिर उसे भ्रष्टाचार में सीधे-सीधे लूटा जा रहा है, तो जनता के मन में टैक्स देने की कोई इच्छा बाकी नहीं रहती, उसे लगता है कि जब नेता-अफसर-ठेकेदार मिलकर उसके दिए पैसे को लूटने वाले हैं, तो फिर वह क्यों टैक्स दे? 
मध्यप्रदेश में एक भ्रष्ट अफसर के इस तरह पकड़े जाने के मौके पर हम छत्तीसगढ़-मध्यप्रदेश जैसे राज्यों के लिए सिर्फ यही लिख सकते हैं कि राज्य सरकारों को भ्रष्टाचार को रोकने के लिए एक खुफिया तंत्र विकसित करना चाहिए ताकि भ्रष्टाचार होने के पहले उस पर नजर रखी जा सके, और इसके पहले की कोई अफसर सैकड़ों करोड़का आसामी हो सके, उस पर कार्रवाई हो जानी चाहिए। हमारी सामान्य जानकारी यह बताती है कि जब किसी भ्रष्ट अफसर पर छापा पड़ता है, तो उसके पहले वह अपनी अधिकतर काली कमाई को ठिकाने लगा चुका रहता है। छापामार अफसरों के हाथ उसकी काली कमाई का एक छोटा सा हिस्सा ही लग पाता है। और जब ऐसा हिस्सा ही सैकड़ों करोड़ का आंका जा रहा है, तो फिर सरकार को पूरे नुकसान का क्या अंदाज लगाया जाए? 
राज्य सरकारों में कुछ विभाग अपनी जड़ों से लेकर पत्तों तक भ्रष्ट रहते हैं। इसलिए इनकी शिनाख्त करके बड़ी आसानी से इस भ्रष्टाचार को रोका जा सकता है। जब एक के बाद दूसरी, कई सरकारें आती और चली जाती हैं, और इस भ्रष्टाचार पर कार्रवाई नहीं होती, तो उसका एक ही मतलब होता है कि नई सरकार पिछली सरकार की इस विरासत को खोना नहीं चाहती। ऐसे में यह भी सोचने की जरूरत है कि क्या जनता ऐसे भ्रष्टाचार के सुबूत जुटाकर सोशल मीडिया पर भांडाफोड़ कर सकती है? (Daily Chhattisgarh)

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