लालकिले के बाद अब राजघाट भी गोद देंगे?

संपादकीय
28 अप्रैल 2018


दिल्ली से एक बड़ी अजीब सी खबर आई है कि लालकिले को डालमिया उद्योग ने गोद लिया है। डालमिया इसके लिए अगले पांच बरस तक लालकिले की देखरेख करेगा, और पच्चीस करोड़ रुपये खर्च करेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की धरोहरों को गोद देने की योजना की घोषणा की थी और इसके तहत लालकिले के लिए इंडिगो एयरलाइंस और जीएमआर जैसी कंपनियों ने भी बोली लगाई है। यह बोली जीतने के बाद अब डालमिया के मुखिया का कहना है कि वे लालकिले को पर्यटकों के बीच लोकप्रिय बनाएंगे और हर पर्यटक उनके लिए एक ग्राहक होगा जिसे वे वहां बार-बार लाने की कोशिश करेंगे।
विरासत की धरोहरों को इस तरह गोद दिया जा रहा है कि मानो वे अनाथ हों, और उन्हें पालने के लिए कोई बच न गया हो। यह बात कुछ सदमा पहुंचाती है क्योंकि लालकिला राजस्थान या दक्षिण भारत का कोई एक आम किला नहीं है। आजादी के वक्त से लालकिला आजाद  का प्रतीक बना हुआ है, और स्वतंत्रता दिवस पर हर प्रधानमंत्री यहीं से झंडा फहराते आए हैं। इसका महत्व एक इमारत से अधिक है, और वह भारतीय लोकतंत्र का एक बड़ा प्रतीक है। देश की तमाम ऐसी ऐतिहासिक इमारतों का रखरखाव केंद्र सरकार की संस्था करती है, और ऐसे में यह देखना अटपटा है कि सरकार इसके रखरखाव के लिए इसे कारोबारियों को गोद दे रही है। क्या इसके बाद राजघाट की भी बारी आएगी, और उस पर गांधी की क्या प्रतिक्रिया होगी? अगर देश के सबसे बड़े प्रतीकों  की जिम्मेदारी उठाने से भी सरकार कतराएगी, और इस जिम्मेदारी का भी निजीकरण और बाजारूकरण किया जाएगा, तो वह देश के लिए गौरव की बात बिल्कुल नहीं होगी। 
पिछले बरस मोदी सरकार की धरोहर गोद देने की योजना के तहत देश भर के सौ स्मारकों और धरोहर स्थलों को बाजार के सामने रखा गया जिसमें ताजमहल से लेकर मुंबई की बौद्ध कनेरी गुफाएं तक शामिल हैं। परंपरागत रूप से इन सबकी रखवाली और रखरखाव का काम भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण नाम की केंद्र सरकार की संस्था करते आई है और अब एकाएक इनकी मार्केटिंग तय की गई, और बाजार को उसमें शामिल किया गया। यह बात सुनने में ही तकलीफ देती है कि इस लोकतंत्र के प्रधानमंत्री जिस किले पर से आजादी का भाषण देते आए हों, अब उसका रखरखाव भी बाजार करेगा, और लालकिले को इस तरह गोद लेगा कि मानो वह कोई बेघर, अनाथ बच्चा हो। सरकार का बाजार और कारोबार से प्रेम राष्ट्रीय गौरव और उसके प्रतीकों से परे रखना चाहिए। (Daily Chhattisgarh)

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