आसाराम की दौलत भी जब्त करके लड़कियों में जागरूकता बढ़ाने पर खर्च करना चाहिए...

संपादकीय
25 अप्रैल 2018


हजारों करोड़ की दौलत के मालिक, और करोड़ों अनुयायियों वाले आसाराम को अदालत ने एक नाबालिग छात्रा के साथ बलात्कार का मुजरिम करार दिया है, और इस फैसले का बड़ा इंतजार किया जा रहा था। यह छात्रा मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में आसाराम के ही एक स्कूल के हॉस्टल में रहती थी, और इस मुकदमे की जानकारी के मुताबिक उसे देह शोषण की साजिश के तहत आसाराम के पास भेजा गया था। इस छात्रा का परिवार आसाराम का भक्त था। इसके बाद पिछले कुछ बरस से आसाराम जेल में ही बंद रहा क्योंकि जमानत की हर कोशिश हर अदालत से खारिज होती चली गई। इसकी वजह शायद यह थी कि आसाराम के खिलाफ इस मुकदमे में जितने गवाह थे उनकी एक-एक कर हत्या होती गई, या रहस्यमय मौत हो गई। नतीजा यह निकला कि जेल में रहते हुए आसाराम की मदद के लिए बाहर अगर कोई ऐसा कर रहे थे, तो जेल के बाहर रहने पर आसाराम और क्या नहीं करते, शायद इसीलिए आसाराम को जमानत नहीं मिल पाई। 
इक्कीसवीं सदी के भारत को हिन्दू धर्म के सबसे बड़े जनाधार वाले लोगों में से आसाराम एक है, और वह आसाराम बापू नाम से मशहूर रहा, सत्ता से जुड़े हुए लोग उसके पैरों तले ऐसे बिछे रहते थे कि उन पैरों पर खड़े बदन के ऊपर का दिमाग बददिमाग हो जाना जायज ही है। लेकिन मामला अकेले आसाराम का नहीं था, आसाराम के बेटे नारायण सांई पर भी इसी किस्म के आरोप लगे, और गिरफ्तारी हुई। बाप-बेटे दोनों के बलात्कारी होने के मामले सामने आए, बाप के खिलाफ साबित हो गया, लेकिन इनके भक्तों का हाल यह है कि अभी कुछ दिन पहले तक वे देश भर में आसाराम की तस्वीरें लेकर रैली निकालते आए हैं, आसाराम के समर्थन में पर्चे बांटते आए हैं, और इसे पाकिस्तानी, मुस्लिम, और विदेशी साजिश करार देते आए हैं। 
नाबालिग के साथ बलात्कार की सजा अभी आसाराम को सुनाई नहीं गई है, लेकिन वह शायद दस बरस से अधिक हो। वकीलों ने आसाराम की अधिक उम्र का हवाला देते हुए सजा कम करने की मांग की है, लेकिन दोषी करार देने के बाद किसी एक जैन धर्मगुरू की प्रतिक्रिया टीवी की खबरों पर आ रही थी कि बलात्कार के वक्त भी तो आसाराम की उम्र अधिक थी, उस वक्त तो अधिक उम्र की वजह से वह हरकत नहीं टली। इस जैन धर्मगुरू ने कहा कि यह सजा दूसरे साधु-संतों और ऐसे धर्मगुरूओं के लिए एक सबक भी रहेगी। अभी कुछ महीने पहले ही एक दूसरे स्वघोषित धर्मगुरू बाबा गुरमीत राम रहीम इंसान को भी बलात्कार में सजा हुई है, और हर कुछ हफ्तों में देश में कोई न कोई ऐसा भगवा या दूसरे धर्म का रंग ओढ़ा हुआ इंसान बलात्कार में गिरफ्तार होते दिखता ही है। 
धर्म और जुर्म, न सिर्फ उच्चारण में मिलते-जुलते हैं, बल्कि इनका मेल भी बहुत दिखता है। बहुत से लोगों के जुर्म के लिए धर्म एक किस्म की बुलेटप्रूफ जैकेट की तरह काम आता है कि कानून की गोलियां उन तक पहुंच नहीं पातीं। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में विख्यात चंबल के इलाके का एक धर्मगुरू ऐसा है जिसके आश्रम से डकैतों और मुजरिमों को भाड़े पर हथियार मिलने की जानकारी आम हैं, लेकिन इस बात के लिए कुख्यात होने पर भी पुलिस और जजों के बीच खासा लोकप्रिय यह गुरू सार्वजनिक रूप से विख्यात ही बना हुआ है। धर्म का कुल मिजाज देखें, तो वह लोकतंत्र, कानून, इंसानियत कहे जाने वाले शब्द, इन सबके ठीक खिलाफ रहता है। धार्मिक रंग ओढ़े हुए लोगों के भक्तों ने जितने ताकतवर लोग जितनी संख्या में रहते हैं, उतनी ही बददिमागी उनमें आ जाती है, और उतने ही जुर्म वे करने लगते हैं। लोगों को यह बात ठीक से याद नहीं कि एक भक्त परिवार की नाबालिग छात्रा से आसाराम ने यह बलात्कार 56 महीने पहले 15 अगस्त 2013 को किया था, आजादी की सालगिरह पर। और गिरफ्तारी से लेकर अब तक उसके जुर्म के कई गवाह या तो मार डाले गए, या वे लापता हो गए। 
लेकिन इस मौके पर देश के तमाम लोगों को सावधान भी हो जाना चाहिए कि वे किसी भी बाबा या संत-पाखंडी के पास अपने परिवार के लोगों, अपने बच्चों को भेजने के पहले सावधान हो जाएं कि वहां उन पर सेक्स-हमला भी हो सकता है, उनके दिमाग को किसी साजिश में फंसाया भी जा सकता है, और उन्हें एक किस्म के सम्मोहन में फांसकर स्थायी रूप से अपना भक्त बनाकर घर-परिवार से दूर भी किया जा सकता है। लोगों को धर्म और आध्यात्म से जुड़े पाखंडियों से दूर रहना चाहिए, और अपने परिवार को भी दूर रखना चाहिए। ईश्वर अगर कहीं है, तो वह ऐसा कारोबारी तो हो नहीं सकता कि वह अपने तक लोगों को लाने के लिए दलाल तैनात करे। आसाराम को मिली सजा से पहले ही उसकी गिरफ्तारी के वक्त से उसका बापू का स्वघोषित दर्जा खत्म हो गया था, और उसका बचाखुचा करिश्मा अब कमजोर पडऩा चाहिए। जिन लोगों को इस सजा के बाद भी आसाराम में भलाई दिखती है, उन्हें लेकर देश के कानून में यह इंतजाम रहना चाहिए कि उनके बच्चों की देखरेख सरकार भी करे, सरकार भी ऐसे गैरजिम्मेदार मां-बाप के बच्चों पर निगरानी रखे, उन्हें सुरक्षित रखने के लिए। यह फैसला बहुत ही अच्छा फैसला है, और इतने ताकतवर एक बलात्कारी-पाखंडी की सारी लोकप्रियता के बावजूद जांच एजेंसियों से लेकर अदालत तक पर कोई असर न पडऩा एक बड़ी बात है। जिन पैरों पर मुख्यमंत्रियों से लेकर प्रधानमंत्री तक गिरे पड़े दिखते आए हैं, उन पैरों में बेडिय़ां लगना कानून की कामयाबी है। आसाराम के इस जुर्म के बाद उसकी दौलत के जब्त होने की संभावना भी कानून में ढूंढनी चाहिए, और ऐसा न होने पर सरकार को एक नया कानून बनाकर भी ऐसा करना चाहिए। और हजारों करोड़ की उसकी दौलत का इस्तेमाल लड़कियों में जागरूकता बढ़ाने के लिए करना चाहिए। (Daily Chhattisgarh)

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