वैज्ञानिक सोच की कमी से जनता लुटने को तैयार है...

संपादकीय
10 मई 2018


दिल्ली की बड़ी दिलचस्प खबर है कि पुलिस ने वहां एक ऐसे बाप-बेटे के गिरोह को गिरफ्तार किया है जो लोगों को एक वैज्ञानिक झांसा देकर उनसे करोड़ों रूपए ठग लेते थे। अब किसी गांव-देहात में विज्ञान की जानकारी न रखने वाले लोगों से कोई इस तरह की ठगी कर ले वह तो समझ में आता है लेकिन दिल्ली के करोड़पतियों को भी ऐसा कामयाब झांसा दिया जा सकता है, यह पढऩा बड़ा दिलचस्प है। ये बाप-बेटे अपने पास एक ऐसी मैटल प्लेट होने का दावा करते थे जो कि चावल तो खींच सकती है और अमरीकी अंतरिक्ष संस्थान नासा ऐसी प्लेट को खरीदने के लिए हमेशा तैयार रहती है। उनके कहे मुताबिक नासा एक इंच की ऐसी प्लेट को दसियों हजार करोड़ में खरीदती है। उसके बाद ये बाप-बेटे अंतरिक्ष यात्री जैसे कपड़े पहनकर, और ठगने के लिए तैयार आदमी को भी ऐसे कपड़े पहनाकर उसके सामने ऐसी प्लेट की खूबी दिखाने का नाटक करते थे। कुल मिलाकर इन्होंने ऐसे करोड़ों रूपए ठग लिए, और अब गिरफ्तार हुए हैं। 

हिन्दुस्तान में दो चीजों की दिक्कत है। एक तो यह कि लोग वैज्ञानिक नजरिया खोते चल रहे हैं, और वे अंधविश्वास से लेकर फर्जी वैज्ञानिक बातों तक किसी पर भी भरोसा करने का मिजाज बढ़ाते जा रहे हैं। दूसरी बात यह हो रही है कि लोग बहुत रफ्तार से अपनी रकम बढ़ाना चाहते हैं, और छत्तीसगढ़ में साल भर में ही ऐसी कुछ हत्याएं सामने आ चुकी हैं जिनमें गड़ा खजाना दिलवाने के नाम पर किसी को ठगा गया, और फिर उसकी हत्या भी कर दी गई। बिना अंधविश्वास के बाजार के ठगी के कुछ और तौर-तरीके भी हैं जिनमें छत्तीसगढ़ के लाखों लोगों ने पिछले बरसों में चिटफंड या ऐसी ही दूसरी फर्जी कंपनियों में सैकड़ों या हजारों करोड़ रूपए खो दिए हैं। 
इन दोनों ही मामलों को देखें तो लगता है कि जनता के बीच बाजार की समझ भी कमजोर है, विज्ञान की समझ भी कमजोर है, और अंधविश्वास भरपूर है। जब इसके साथ-साथ रातों-रात दौलत कमाने की हसरत और जुड़ जाती है, तो लोग किसी भी तरह के झांसे में आ जाते हैं, और अपनी दौलत लुटाने को तैयार हो जाते हैं। हम पैसों के लुटने से परे की बात करें, तो लोग अपनी बीवी, बहन, और बेटी तक को ले जाकर पाखंडी बाबाओं के हवाले कर देते हैं, और यह भरोसा रखते हैं कि उनकी नाबालिग या बालिग लड़कियां-महिलाएँ बाबाओं के साथ स्वर्ग पहुंच जाएंगी। यह पूरा सिलसिला देश के लोगों में जागरूकता की कमी बताता है, और अंधविश्वास की अधिकता बताता है। लोगों के बीच वैज्ञानिक सोच को बढ़ाए बिना उनका झांसे में आना कम नहीं हो सकता। यह बात दौलत की ठगी से लेकर कौमार्य की ठगी तक, तन-मन की ठगी तक सब जगह जारी है, और इसके पीछे जो एक बात एक सरीखी है, वह यह कि लोग वैज्ञानिक तरीके से सोचना कम कर चुके हैं, और इसीलिए उनकी तर्कशक्ति कम हो गई है, और वे शिकार बनने के लायक हो गए हैं। देश में कहीं धर्मान्धता, तो कहीं कुतर्क के नारे, तो कहीं तंत्र-मंत्र, कहीं आध्यात्म को इस तरह बढ़ावा मिल रहा है कि मानो जनता कहीं अक्ल की कोई बात समझ न लें। लोगों को कम से कम खुद को, और अपने परिवार को एक वैज्ञानिक तर्कशक्ति देनी चाहिए, क्योंकि अवैज्ञानिक कुतर्क से जिन ठगों की रोजी-रोटी चलती है, वे तो लोगों का मूर्ख ही बने रहना पसंद करेंगे। (Daily Chhattisgarh)

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