हाफिज पर अमरीकी बयान बेईमानी और पाखंड ही है..

संपादकीय
18 मई 2018


अमरीकी विदेश विभाग ने एक सवाल के जवाब में कहा है कि पाकिस्तान में जमात-उद-दावा के सरगना, हाफिज सईद के सिर पर अमरीकी सरकार ने ईनाम रखा हुआ है और वह पाकिस्तान में खुलेआम घूम रहा है जो कि अमरीका के लिए बड़ी फिक्र का मामला है। पिछले हफ्ते नवाज शरीफ द्वारा मुंबई हमले के हमलावर आतंकियों के पाकिस्तान से जाने पर हामी भरने पर अमरीकी विदेश विभाग से पूछा गया था, और उसके जवाब में यह बात कही गई। 
अमरीका का यह कहना निहायत फिजूल बात है क्योंकि पाकिस्तान का आतंकी हमलों में शामिल होना, वहां पर घरेलू मोर्चे पर आतंकियों का बोलबाला, वहां पर समय-समय पर लोकतंत्र में फौज की दखल जैसे कई मुद्दे अमरीका के सामने आधी सदी से चले आ रहे हैं। दुनिया के इतिहास का सबसे बड़ा आतंकी हमला अमरीका पर करने वाला ओसामा-बिन-लादेन पाकिस्तान में ही बसा हुआ था, और अब तक ऐसे कोई सुबूत नहीं आए हैं कि उसकी खबर पाकिस्तान सरकार को नहीं थी। खुद अमरीका को पाकिस्तान में घुसकर लादेन को मारना पड़ा था, और पाकिस्तान से उसे अपनी इस फौजी कार्रवाई को छुपाकर भी रखना पड़ा था। जब अमरीका का पाकिस्तान से ऐसे तजुर्बे का एक लंबा इतिहास है, तो फिर सवाल यह उठता है कि उस पाकिस्तान को एक लंबी-चौड़ी फौजी मदद और आर्थिक मदद देना अमरीका क्यों जारी रखता है? 
अमरीका का इतिहास अगर देखें तो वह हमेशा से दुनिया के अलग-अलग देशों में आतंकी ताकतों की मदद करते आया है। कहीं पर वह तालिबानों को बढ़ावा देता है, तो कहीं किसी और गुरिल्ला संगठन की फौजी मदद करता है ताकि वह अपने देश की लोकतांत्रिक सरकार को गिरा सके। अमरीका कुछ राष्ट्रप्रमुखों के कत्ल का गुनहगार भी है, और पूरी दुनिया में तरह-तरह की बर्बादी में उसका बड़ा हाथ रहते आया है। उसने दुनिया में दर्जनों देशों में लोकतंत्र को कमजोर करने का काम किया है, और अपना पि_ू सरकारों को बिठाया है ताकि वहां का तेल अमरीका को मिल सके, या फिर रूस और चीन जैसे देशों के मुकाबले उसे दुनिया के उस हिस्से में फौजी ठिकाना मिल सके। पाकिस्तान की शक्ल में अमरीका को ऐसा ही एक फौजी ठिकाना हिन्द महासागर के इस इलाके में मिला हुआ है, और अमरीका उसी का भुगतान करता है। चीन की सरहद से लगे हुए पाकिस्तान में अमरीका आतंक-विरोधी कार्रवाई कहते हुए तमाम किस्म की फौजी हरकतें भी करता है। और मजे की बात यह है कि जिस पाकिस्तान ने अमरीका ने अपने इतिहास के सबसे बड़े दुश्मन ओसामा-बिन-लादेन को टीकाकरण अभियान की आड़ में जासूसी करके ढूंढा और मारा, उसी अमरीका का एक ईनामी-आतंकी हाफिज सईद अमरीका को पाकिस्तान में खुले घूमते दिख रहा है, और उसे मारने के बजाय अमरीका बयानबाजी कर रहा है। लादेन और हाफिज के बीच अमरीका की नीति-रणनीति में ऐसा फर्क क्यों है? 
दुनिया के आतंक के मोर्चे पर, देशों के गृहयुद्धों के मोर्चे पर, लोकतंत्र के सत्ता पलट के मोर्चे पर अमरीका से अधिक बदनाम दुनिया में कोई देश नहीं है। खुद अमरीका के विद्वान विचारक अपने देश को दुनिया का सबसे बड़ा आतंकी करार देते हैं। और यह देश तोप की नोंक पर ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों को हमलों में अपने गिरोह में शामिल कर लेता है। इसलिए भारत को सुहानी लगने वाली अमरीकी-बकवास किसी काम की नहीं है। अगर अमरीका को हाफिज सईद किसी फिक्र का सामान लगता है, तो वह मिनटों में पाकिस्तान में उसका कत्ल करवा सकता था। हम तो किसी भी कत्ल के हिमायती नहीं हैं, लेकिन जो अमरीका सरकारी तौर पर ऐसे कत्ल मंजूर करता है, और दुनिया भर में जगह-जगह अपनी फौज या सीआईए से करवाता है, भाड़े के हत्यारे रखकर करवाता है, उस अमरीका को हाफिज सईद पर ईनाम रखने के बाद, पाकिस्तान को हर किस्म की मदद जारी रखने के बाद बयानबाजी का कोई हक नहीं है। उसकी बयानबाजी महज धोखा है, वरना अगर वह अपनी जमीन से परे भी कहीं आतंक का विरोधी होता, तो मुंबई हमले के बाद वह पाकिस्तान की मदद बंद कर देता। इसलिए अमरीकी बयानों पर किसी हिन्दुस्तानी को खुश नहीं होना चाहिए। (Daily Chhattisgarh)

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