सुषमा पर नफरती हमले से सबक लेने की जरूरत

संपादकीय
26 जून 2018


केन्द्र सरकार में सुषमा स्वराज एक ऐसी मंत्री हैं जो कि मोदी सरकार बनने के पहले लोकसभा में भाजपा की सबसे बड़ी नेता मानी जाती थीं, और अब भाजपा की अगुवाई वाली सरकार आने के बाद सरकार में उनका महत्व खासा कम हो गया है। लेकिन फिर भी वे विदेश मंत्रालय की सकारात्मक दखल को लेकर ट्विटर जैसे सोशल मीडिया पर बनी रहती हैं, और उनकी वजह से सरकार को एक अच्छी छवि हासिल होती है। अब अभी उन्होंने सोशल मीडिया पर ही आए एक मामले में दखल दिया, और एक अंतरधर्मीय जोड़े के साथ लखनऊ के पासपोर्ट अफसर द्वारा की गई बदसलूकी की भरपाई करते हुए तुरंत ही इस जोड़े को पासपोर्ट जारी करवाया। लेकिन हिन्दुस्तान के बहुत से लोग ऐसे अंतरधर्मीय जोड़ों के सख्त खिलाफ हैं और उन्हें लवजिहाद का मामला मानते हैं। उन्हें यह बात बहुत नागवार गुजरी कि भाजपा की एक मंत्री एक ऐसे अफसर का तबादला कर रही हैं जिसने एक मुस्लिम से शादी करने वाली एक हिन्दू महिला के पासपोर्ट में अड़ंगा लगाया था। इसके एवज में सुषमा स्वराज को ऐसे सैकड़ों लोगों ने गालियां लिखना शुरू किया जो कि आमतौर पर रात-दिन भाजपा और मोदी सरकार की तारीफ के कसीदे पढ़ते रहते हैं। लेकिन सुषमा ने बड़े सब्र से काम लिया और गालियों वाले ऐसे ट्वीट भी अपने ट्विटर पेज पर पोस्ट किए। 
यह सुषमा स्वराज की एक ऐसी भलमनसाहत की बात रही जो कि देश के भीतर हिन्दू-मुस्लिम विभाजन को घटाने का काम भी करती है, और देश के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान भी करती है। आज अगर कोई साम्प्रदायिक नेता अपनी सरकार के अफसरों से साम्प्रदायिक नीयत से काम की उम्मीद करते हैं, तो वे सरकारी अफसरों के मुंह एक ऐसा खून लगाते हैं जो कि आगे चलकर किसी दूसरे समुदाय को खाकर पेट भरना सिखाएगा। और सोशल मीडिया पर सुषमा स्वराज जैसी महिला को जिस तरह की गालियां दी जा रही हैं, उन्हें जिस तरह पाकिस्तान का दलाल या पाकिस्तानी करार दिया जा रहा है, जिस तरह उन्हें मुस्लिम बताया जा रहा है, वह धिक्कार के लायक बर्ताव है। देश में जो लोग सोशल मीडिया पर ऐसे पेशेवर और भाड़े के कटखने लोगों को बढ़ावा देते हों, वे लोकतंत्र का बेजा इस्तेमाल कर रहे हैं। यह बात भूलनी नहीं चाहिए कि भाजपा के भीतर बहुत से ऐसे मुस्लिम नेता हैं जिन्होंने हिन्दू लड़कियों से शादी की हैं। और ऐसे हिन्दू नेता भी होंगे जिन्होंने मुस्लिम लड़कियों से शादी की होगी। लेकिन जब आम जनता के बीच के लोग ऐसे अलग-अलग धर्मों के बीच शादी करते हैं, तो उनके पीछे लोग खूंखार अंदाज में काटने को दौड़ पड़ते हैं। उत्तरप्रदेश में पिछले बरसों में जिस तरह लवजिहाद नाम से एक नफरत और हिंसा फैलाई गई है, उसी का असर था कि पासपोर्ट दफ्तर का एक अफसर भारत सरकार की तनख्वाह पाकर साम्प्रदायिक बर्ताव करते मिला, और अब साम्प्रदायिक लोगों की फौज उस अफसर को बचाने के लिए, और ऐसे हिन्दू-मुस्लिम जोड़े के खिलाफ तरह-तरह की जांच करने के लिए जुट गई है। 
इस देश में साम्प्रदायिक सद्भाव की परंपरा धीरे-धीरे करके कई सदियों में विकसित हुई है, और लोकतंत्र आने के बाद उसे एक संवैधानिक दर्जा भी दिया गया है। कानून के खिलाफ जाकर हिंसक, नफरती, और साम्प्रदायिक बर्ताव इस देश की हवा में जहर घोल रहा है। देश का आईटी कानून इस मामले में बड़ा साफ है, लेकिन साम्प्रदायिक सोच के साथ लोग अगर हत्या और बलात्कार की खुली धमकी दे रहे हैं, तो भी उन पर कोई कार्रवाई न होना हैरानी की बात है। दूसरी तरफ अगर एक कार्टून को किसी ने दुबारा पोस्ट कर दिया है, तो सरकार की आलोचना वाली ऐसी सामग्री के लिए लोगों पर राजद्रोह के मुकदमे दर्ज हो रहे हैं। राजद्रोह क्या वे लोग नहीं कर रहे जो कि हिन्दू और मुस्लिम के आधार पर इस देश में कत्लेआम के फतवे दे रहे हैं? लेकिन उनकी धमकियों के, उनकी हिंसा के, साइबर-सुबूत होते हुए भी अगर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है, तो यह बहुत ही फिक्र की बात है। सुषमा स्वराज को जिस तरह से अपमान झेलना पड़ा है, उसे लेकर तो कम से कम अब भारत सरकार को और प्रदेशों की सरकारों को यह सोचना चाहिए कि नफरत को खत्म करने, उसे जेल भेजने का वक्त अब आ चुका है, अब और अधिक देर नहीं की जानी चाहिए। (Daily Chhattisgarh)

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