सुनीता फिर अंतरिक्ष की ओर.., हिन्दुस्तान को गर्व का क्या हक?

संपादकीय
4 अगस्त 2018


भारत के जिन लोगों को दुनिया भर में कामयाब हुए भारतवंशियों को लेकर फख्र होता है, उन्हें इस खबर से भी बड़ी खुशी होगी कि अंतरिक्ष में जा चुकी सुनीता विलियम्स अब 52 बरस की उम्र में फिर से अंतरिक्ष जाने वाली हैं। और अमरीका का यह अंतरिक्ष कार्यक्रम उसकी पहली अंतरिक्ष उड़ान रहेगी जो कि व्यावसायिक होगी। इस उड़ान के 9 अंतरिक्ष पायलटों में सुनीता विलियम्स एक हैं। वे भारतवंशी भी हैं, महिला भी हैं, और उनकी कामयाबी आसमान छूती हुई नहीं, आसमान को चीरकर अंतरिक्ष पहुंची हुई है। लेकिन जिस वक्त भारत के लिए गर्व की यह खबर आई है, उसी वक्त भारत के भीतर लड़कियों और महिलाओं के हाल को लेकर देश के एक सबसे बड़े राज्य का मुख्यमंत्री कहता है कि प्रदेश का सिर शर्म से झुक गया है। 
बिहार में सरकारी पैसों पर चलने वाले एक (अनाथ) बालिकागृह में जिस संगठित तरीके से दर्जनों छोटी-छोटी बच्चियों से वहां के करोड़पतियों और राजनीति से जुड़े दिग्गज लोगों ने लंबे समय से बलात्कार जारी रखा है, वह न सिर्फ बिहार का सिर झुकाने के लिए काफी है, बल्कि इससे पूरी दुनिया में हिन्दुस्तान का सिर भी झुक गया है। भारत को अगर दुनिया में लोग बलात्कार की राजधानी कहते हैं, तो वह बात बहुत गलत भी नहीं लग रही है क्योंकि कुछ देशों के आंकड़े उन्हें अगर भारत से बड़ा बलात्कारी बताते भी हैं, तो वे आंकड़े महज दर्ज होने वाले मामलों के हैं, असल जिंदगी में, हकीकत में होने वाले बलात्कारों के नहीं। भारत में ही अब इस एक बालिकागृह की दर्जनों बच्चियां महीनों से बलात्कार झेल रही थीं, लेकिन यह भांडा फूटने के पहले तक ये किसी सरकारी आंकड़ों में तो शामिल थी नहीं। अब अचानक कुछ दर्जन बच्चियां इस जुर्म की फेहरिस्त में दर्ज हो गई हैं, लेकिन देश भर में ऐसे अनगिनत और बालिका और महिला आश्रम होंगे, या कि बालक आश्रम होंगे जहां कि ऐसे बलात्कार हो रहे होंगे, लेकिन उसे जांचने-परखने की फुर्सत और फिक्र शायद ही किसी को हो। बिहार के इस आश्रम का भांडा भी तब फूटा जब टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साईंसेज के शोधकर्ता वहां सर्वे के लिए पहुंचे, यह जानकारी सरकार को अपनी मशीनरी से नहीं मिली। अब यह भी जाहिर हो रहा है कि जिस आश्रम संचालक की अगुवाई में संगठित सामूहिक बलात्कार का यह महीनों का सिलसिला चल रहा था, वह बिहार के बड़े-बड़े नेताओं का करीबी था। 
अमरीका की एक खबर के साथ हम भारत की इस एक खबर को जोड़कर आज यहां इसलिए लिख रहे हैं कि क्या हम सौ फीसदी अमरीकी माहौल की वजह से वहां संभावनाओं के अंतरिक्ष में पहुंचने वाली सुनीता विलियम्स पर गर्व करने के हकदार हैं? या हम महज चुल्लूभर पानी में डूब मरने के ही हकदार हैं क्योंकि अब तो आत्महत्या भी जुर्म नहीं रह गया है। यह देश ऐसे ही पाखंड के बीच जीता है जिसमें वह बिना अपने किसी योगदान के किसी कामयाबी के जश्न में बेगानी शादी के अब्दुल्ला दीवाने की तरह शामिल हो जाता है, और दूसरी तरफ जब अपने ही भीतर दुनिया की सबसे भयानक हैवानियत होती है, तो उसे अनदेखा करता है, उस पर चुप्पी साध लेता है, उसे दबाने में जुट जाता है, और बलात्कारियों की हिमायत करते हुए तिरंगे झंडे लेकर जुलूस निकालने लगता है कि गिरफ्तार लोगों को छोड़ा जाए। अब ऐसे पाखंडी देश को अमरीका में किसी महिला की कामयाबी पर गर्व करने का कोई हक क्यों होना चाहिए? क्या महज इसलिए कि उसकी रगों में पिछली किसी पीढ़ी के किसी हिन्दुस्तानी का लहू दौड़ रहा है? यह देश अपने बच्चों को, खासकर अपनी बच्चियों को, अपनी महिलाओं को जिस तरह के जुल्म और जुर्म का शिकार बनाता है, उसे कोई हक नहीं है कि दूसरे देशों की वहां की अपनी स्थानीय कामयाबी की वाहवाही खुद लूटने की कोशिश करे। हिन्दुस्तान का यह पूरा सिलसिला बहुत ही भयानक है और इससे भी अधिक भयानक है इस देश के बड़े-बड़े लोगों की चुप्पी जो कि शर्मिंदगी के ऐसे हर मौके पर सिले हुए होठों के भीतर से चीख-चीखकर बोलने लगती है। जो देश अपनी सबसे कमजोर बच्चियों, सबसे कमजोर महिलाओं के साथ बलात्कार करता है उसे सिर्फ सिर झुकाने का हक है, उठाने का नहीं। और अब तो यह देश एक नया रिकॉर्ड भी बना चुका है, एक गर्भवती बकरी से आधा दर्जन मर्दों के बलात्कार के बाद बकरी की मौत का। (Daily Chhattisgarh)

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