संपादकीय
12 अगस्त 2017

उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अपने शहर के सरकारी मेडिकल कॉलेज हास्पिटल में ऑक्सीजन सप्लायर का भुगतान नहीं हुआ तो उसने कई नोटिसों के बाद ऑक्सीजन सप्लाई बंद कर दी, और इस वजह से वहां भर्ती तीन दर्जन बच्चों की मौत पिछले दो दिनों में हो चुकी है, और कुल मिलाकर पिछले चार-पांच दिनों में साठ के करीब मौतों का अंदाज है। खुद भाजपा के सांसद और नेता इसे सरकारी लापरवाही मान रहे हैं, और हत्या का मुकदमा चलाने की बात कह रहे हैं, लेकिन कुछ और लोगों का यह भी कहना है कि सप्लायर से कमीशन और दलाली पर मुख्यमंत्री के करीबी लोग मोल-भाव कर रहे थे और इसी की वजह से भुगतान रोका गया था, और बड़ी संख्या में यह मौतें हुईं। यह मामला इतना भयानक है कि दो दिन बाद आजादी की सालगिरह उत्तरप्रदेश में मनाई जाए या न मनाई जाए, इस बारे में सोचना चाहिए। और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सार्वजनिक रूप से देश की जनता से यह मांग रहे हैं कि वे किन-किन मुद्दों पर लालकिले से बोलें, इस पर जनता राय दे। इससे बड़ी और राय क्या हो सकती है कि देश में भाजपा के राज वाले कई राज्यों में अस्पतालों में थोक में ऐसी मौतें हुई हैं, वे कम से कम अपनी पार्टी के राज पर तो बोल ही दें।
दरअसल सरकारी अस्पतालों का हाल अधिकतर राज्यों में कुल मिलाकर ऐसा ही है। सरकारी डॉक्टर अपनी निजी प्रैक्टिस पर पूरा ध्यान देते हैं, और अस्पतालों में खानापूर्ति के लिए चले जाते हैं। दवाईयां कई गुना दाम पर खरीदी जाती हैं, और नकली खरीदी जाती हैं। ऐसी मशीनें खरीद ली जाती हैं जिनका कोई इस्तेमाल नहीं रहता, जिन्हें चलाने के लिए प्रशिक्षित चिकित्सक-कर्मचारी नहीं रहते, और वे मशीनें जंग खाते-खाते खराब हो जाती हैं। छत्तीसगढ़ में अभी कल ही बर्खास्त हुए एक आईएएस बाबूलाल अग्रवाल के स्वास्थ्य सचिव रहते हुए हमारे ही अखबार ने सबसे पहले ये रिपोर्ट छापी थी कि किस तरह उनके कार्यकाल में नकली मशीनें खरीदी गईं, बिना जरूरत खरीदी गईं, बिना प्रशिक्षित कर्मचारियों के खरीदी गईं, और उनका करोड़ों का भुगतान भी किया गया। बाबूलाल अग्रवाल तो अब जाकर बर्खास्त हुए हैं, लेकिन उस फर्जी और नकली मशीन-घोटाले पर आज तक किसी को सजा नहीं मिली है।
छत्तीसगढ़ के अस्पतालों में, और राजधानी रायपुर के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भी मरीजों की बदहाली, और सरकारी डॉक्टरों-कर्मचारियों की आपराधिक लापरवाही रोज अखबारों में दिखती है, लेकिन किसी पर कोई कार्रवाई नहीं होती, और प्रदेश की जनता अच्छी तरह जानती है कि यह भ्रष्टाचार किसकी छत्रछाया में चल रहा है। वह दिन दूर नहीं है जब बिलासपुर के नसबंदी कांड की तरह फिर छत्तीसगढ़ में किसी सरकारी अस्पताल में ऐसा कोई मानवनिर्मित हादसा होगा, और दर्जनों लोगों की जानें जाएंगी। मौतें तो आज भी हो रही होंगी लेकिन चूंकि वे थोक में नहीं हो रही, इसलिए किसकी जानकारी में नहीं है। प्रधानमंत्री को पूरे देश के राज्यों को सचेत करना चाहिए, और खासकर अपनी पार्टी के राज वाले प्रदेशों को तो सबसे पहले। आज उत्तरप्रदेश में योगी आदित्यनाथ इसमें लगे हुए हैं कि वहां के मदरसे तिरंगा फहराते हैं या नहीं, और उसका वीडियो बनाकर अपनी देशभक्ति का सुबूत भेजते हैं या नहीं। हमारे हिसाब से ऑक्सीजन के दलाल हत्यारों से कम नहीं हैं, देशद्रोही से कम नहीं हैं, और उन्हीं को पहले सजा हो जाए, मदरसों की देशभक्ति बाद में नापी-तौली जाए।
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