संपादकीय
31 दिसम्बर 2017

तमिलनाडु में फिल्म स्टार रजनीकांत ने राजनीति में आने की घोषणा करके उस राज्य की चुनावी तस्वीर को बदल देने का काम किया है। अगर वे अपनी कही इस बात पर कायम रहते हैं कि वे हर सीट पर उम्मीदवार खड़ा करेंगे, और विधानसभा चुनाव के भी पहले होने वाले लोकसभा चुनावों में उम्मीदवार खड़े करने के बारे में भी सोचेंगे, तो इस राज्य में पहले से स्थापित दोनों पार्टियों के लिए एक बड़ी परेशानी खड़ी हो सकती है। उन्होंने जिस तरह से भ्रष्टाचार के खिलाफ लडऩे की बात कहते हुए राजनीति की घोषणा की है, वहां की दोनों बड़ी पार्टियां भ्रष्टाचार के आरोपों से लदी हुई हैं। इसलिए रजनीकांत अकेले अपने दम पर भी, अपनी बेमिसाल शोहरत की वजह से तमिल राजनीति की तस्वीर बदल सकते हैं।
दक्षिण भारत में फिल्मी सितारों का राजनीति में आना नया नहीं है। इसी तमिलनाडु में एमजी रामचंद्रन और उनके बाद उनकी राजनीतिक वारिस जयललिता दोनों ही फिल्मों से आए थे। उनके विरोधी रहे एम करूणानिधि भी फिल्मों से राजनीति में आए। पड़ोस के आंध्र में एनटी रामाराव फिल्मों के लंबे करियर के बाद राजनीति में आए। कर्नाटक में फिल्म अभिनेता राजकुमार की बड़ी शोहरत रही और वह राजनीति में उनके काम आई। रजनीकांत के साथ एक बात यह कही जाती है कि वे तमिलनाडु के बाहर भी पूरे दक्षिण भारत में सबसे कामयाब, सबसे मशहूर, और सबसे जाने-पहचाने व्यक्ति हैं। राजनीति के जानकार लोगों का मानना है कि तमिलनाडु का एक भी पोलिंग बूथ ऐसा नहीं होगा जहां पर कि रजनीकांत के भक्त न रहते हों, और जहां उन्हें कार्यकर्ता न मिलें।
हम राजनीति में नए लोगों के आने के हिमायती हैं, और ऐसा भी नहीं है कि परंपरा से हटकर जो लोग आते हैं उन्हें कभी कामयाबी मिल ही नहीं सकती। असम में प्रफुल्ल महंत छात्र राजनीति से चुनावी राजनीति में आए थे, और अभी हाल में दिल्ली में अरविंद केजरीवाल ने भारतीय राजनीति के कई किस्म के रिकॉर्ड तोड़े हैं। केजरीवाल तो बिल्कुल ही अनजाना चेहरा थे, उनके पास कोई प्रशंसक नहीं थे, और न ही उनके पास कोई पैसा था। तमिलनाडु में रजनीकांत के पास वह सब कुछ है जो कि राज्य स्तर की एक कामयाब पार्टी को पूरे प्रदेश में चुनाव लडऩे के लिए लगता है। और हो सकता है कि इस राज्य की राजनीति में एक ऐसी पार्टी सचमुच ही खड़ी हो जाए जो कि भ्रष्ट न हो।
भारत की राजनीति में महज भ्रष्टाचार ही अकेला मुद्दा नहीं है। साम्प्रदायिकता और सहनशीलता भी बहुत बड़े मुद्दे हैं, और रजनीकांत को तमिलनाडु के बाहर केंद्रीय स्तर पर किसी भी गठबंधन के लिए यह भी देखना होगा कि केंद्र के किस गठबंधन की रीति-नीति के साथ वे जा सकते हैं। अभी उनकी पहली घोषणा ही आई है, इसलिए हम तुरंत ही बहुत दूर की नहीं सोच रहे, लेकिन फिलहाल यह जानकर अच्छा लग रहा है कि राजनीति में एक और चेहरा आ रहा है, अब तक का साफ-सुथरा चेहरा। (Daily Chhattisgarh)


















