29 नवंबर 2014
संपादकीय
दिल्ली के आसपास उत्तरप्रदेश में कई सरकारी विभागों और संस्थानों का काम देखने वाले एक बड़े इंजीनियर पर आयकर विभाग का छापा पड़ा, और पहली खबरों के मुताबिक उसकी दौलत हजार करोड़ की हो सकती है। सैकड़ों करोड़ के गहने, जिनमें हीरों के गहने ही दो किलो बताए जा रहे हैं, कार में दस करोड़ नगदी, ऐसी आंखें फाड़ देने वाली जानकारियां हैं। हम अभी इस बात पर नहीं जा रहे कि अदालत में आखिर तक यह काली कमाई हजार करोड़ साबित हो पाएगी या सौ दो सौ करोड़ पर टिकेगी, लेकिन जितनी भी है, वह पूरे देश को यह सोचने पर मजबूर करती है कि बदनाम राजनीति से परे सरकारी अफसरों की कमाई का क्या हाल है। और केन्द्र सरकार या राज्य सरकारों के तहत इस तरह की कमाई करने का मौका लोगों को कैसे मिलता है, और यह जाहिर है कि जब कोई अफसर कारोबारियों को दस-बीस हजार करोड़ का फायदा देने की हालत में होगा, तो ही जाकर उसके पास हजार करोड़ की दौलत जुट पाएगी।
हम छत्तीसगढ़ के बारे में सोचते हैं तो इस राज्य में भ्रष्ट अफसरों के सैकड़ों मामले राज्य बनने के बाद से पकड़ में आए हैं, और शायद ही किसी को सजा मिलते लोगों ने देखा होगा। जांच में मामलों को कमजोर कर देना, सारी कोशिश के बाद भी अगर कोई मामला मजबूत बन गया है, तो उसे अदालत तक जाने की इजाजत नहीं देना, और अगर अदालत चले भी गया है तो उसे बरसों तक खींचते चले जाना, यह सब लोग देख-देखकर थक चुके हैं। दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ का सरकारी इतिहास इस बात का गवाह है कि हर किस्म के भ्रष्ट व्यक्ति को निलंबन के बाद कुछ अरसा गुजरने पर फिर खासी कमाई और खासे भ्रष्टाचार की संभावना वाली कुर्सी पर तैनात कर दिया जाता है, और फिर ऐसे लोग चेहरे पर नकाब बांधे बिना ही लूटपाट में लग जाते हैं। जांच कभी पूरी नहीं होती, और पूरी हो भी जाती है, तो सरकार ऐसी फाईलों पर जमकर और टिककर बैठ जाती है, कि मानो भ्रष्ट की कमाई बंद न हो जाए।
सरकार के कुछ जानकार लोगा के मुताबिक मध्यप्रदेश सरकार के तहत भ्रष्टाचार के ऐसे ही मामलों किसी के पकड़ाने पर सरकार उसे जेल से निकलने का मौका नहीं देती, और किसी भी हालत में उसे सरकारी कुर्सी पर दुबारा नहीं बैठने देती। छत्तीसगढ़ में अभी आर्थिक अपराध ब्यूरो ने कुछ अफसरों को गिरफ्तार करके जेल भेजा है जो कि लंबे समय से भ्रष्टाचार के मामलों में फंसे हुए थे, लेकिन अदालत और जेल से परे खुले घूम रहे थे। पूरे देश में सरकारी कामकाज में भ्रष्टाचार का जो बुरा हाल है, उसके चलते एक बात जरूरी लगती है कि जो लोग रिश्वत लेते पकड़ाएं, कोई घपला करते पकड़ाएं, या अनुपातहीन संपत्ति के साथ पकड़ाएं, उनको सरकार किसी कुर्सी पर न बैठने दे, काम न करने दे, वही सस्ता पड़ेगा। ऐसे तमाम मामलों में मध्यप्रदेश से जब लोग छत्तीसगढ़ की तुलना करते हैं, तो छत्तीसगढ़ भ्रष्ट लोगों के लिए बड़ा रहमदिल साबित होता है। परले दर्जे के भ्रष्ट लोग पुख्ता मामलों के बावजूद फिर अपने विभागों में, या दूसरे विभागों में फिर कमाऊ कुर्सियों पर पहुंच जाते हैं, और जनता की खजाने को दीमक की तरह खोखला कर देते हैं।
जनता के बीच से सरकार पर एक दबाव पडऩा चाहिए कि भ्रष्ट लोगों को अदालत से बेकसूर साबित होने के पहले सरकारी कामकाज से अलग रखा जाए। ऐसा न होने पर यह देश-प्रदेश लुटना कभी भी बंद नहीं होगा। अब हजार करोड़ से अधिक का अफसर आने के बाद ही क्या देश-प्रदेश की सरकारों को होश आएगा?



