संपादकीय
३१अक्टूबर 2012
छत्तीसगढ़ के स्थापना दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह इस पल एक प्रेस कांफे्रंस में अपनी सरकार की कई नई नीतियों की घोषणा कर रहे हैं जिनसे मौजूदा उद्योगपतियों से लेकर संभावित पूंजी निवेशकों तक को फायदा होने की उनको उम्मीद है, और साथ-साथ इस राज्य में रोजगार बढऩे से लेकर अर्थव्यवस्था विकसित होने तक का उनका अंदाज है। पिछले कुछ हफ्तों में उन्होंने महानगरों तक जाकर देश-विदेश के उद्योगपतियों और कारोबारियों से इस राज्य में संभावनाओं पर चर्चा की थी, और इस हफ्ते ऐसी चर्चा और आगे बढऩे वाली है। राज्य के स्थापना दिवस के साथ-साथ इस बार एक और बात जुड़ी हुई है कि इस सरकार के इस दूसरे कार्यकाल का यह आखिरी स्थापना-समारोह है क्योंकि अगले बरस चुनाव करीब होने से ऐसा कोई समारोह नहीं होगा। मुख्यमंत्री जिस उत्साह के साथ अपनी अभी तक की उपलब्धियों के आंकड़े सामने रख रहे हैं, और नई नीतियों की घोषणा कर रहे हैं, उन्हें इस राज्य के संदर्भ में तो देखना ही होगा, जिस मध्यप्रदेश का हिस्सा छत्तीसगढ़ सन 2000 तक रहा है, उसके साथ जोड़कर भी इसे देखना होगा। तीसरी बात यह कि देश के आज के बाकी माहौल के साथ भी छत्तीसगढ़ की तुलना करनी होगी।
अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने देश में तीन नए राज्य बनाए थे, उन तीनों की तुलना करें तो छत्तीसगढ़ एक अभूतपूर्व और महत्वपूर्ण स्थिरता और निरंतरता का गवाह रहा है। कुछ राजनीतिक साजिशों के बावजूद इस राज्य में सरकारें न पलटी गईं और न ही उन सरकारों के भीतर मुख्यमंत्री को बदलने की नौबत आई। रमन सिंह सरकार के दस बरस पूरे करने के आसार हैं, और ये दस बरस नए राज्यों को जायज ठहराने के लिए इस देश में आज तक की सबसे बड़ी मिसाल भी रहेंगे। कोई भी दूसरा छोटा राज्य न तो इस तरह राजनीतिक स्थिरता देख पाया, और न ही आर्थिक विकास पा सका। इसलिए छत्तीसगढ़ की कामयाबी भारतीय लोकतंत्र में इस वजह से भी अहमियत रखती है कि इसके बिना बाकी तमाम छोटे राज्य राजनीतिक अस्थिरता, सत्तापलट, सत्ता के अपराध, और विकास में दिक्कतों के मॉडल साबित हुए हैं। छत्तीसगढ़ अकेला ऐसा उदाहरण है जिसे देखकर इस देश में आगे नए छोटे राज्यों को जायज ठहराया जाएगा।
छत्तीसगढ़ की तरह का ही खनिज सपन्न राज्य झारखंड था। लेकिन अभी यह याद रखना मुश्किल है कि वहां किस पार्टी या गठबंधन की सरकार का कौन मुखिया है, कौन सा पिछला मुख्यमंत्री जेल में है या जमानत पर है, किस पार्टी के नेता कटघरों में हैं। इसी तरह उत्तराखंड कांगे्रस के भीतर बगावत झेल चुका है, भाजपा के भीतर एक निहायत गैरजरूरी सत्तापलट देख चुका है। ऐसे में छत्तीसगढ़ अपने साथ पैदा हुए इन दो राज्यों से अलग एक कामयाब राज्य रहा। फिर एक दूसरे पैमाने पर देखें तो खनिज संपन्न झारखंड से लेकर कर्नाटक तक और गोवा तक, जितने राज्य सारी निचली अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मुकदमे झेल रहे हैं, उनके मुकाबले छत्तीसगढ़ वैसे किसी भ्रष्टाचार से अब तक बचा हुआ है। इन तीनों बड़े खनिज राज्यों में अदालती दखल इस हद तक हुई कि दसियों हजार करोड़ का भ्रष्टाचार सामने आया, छत्तीसगढ़ अब तक किसी भी कटघरे से बाहर है। इसके अलावा महाराष्ट्र के आदर्श घोटाले, दूसरे कई राज्यों के दूसरे घोटालों से परे छत्तीसगढ़ अब तक साफ-सुथरा बना हुआ है, एक भी मंत्री या एक भी सचिव किसी मामले में न गिरफ्तार हुए, न कुर्सी से हटाए गए। हमारा ख्याल है कि यह बात भी बाहर से आने वाले लोगों के लिए राहत की बात होगी।
छत्तीसगढ़ जिस तरह कई अंधेरे राज्यों के बीच रौशन बना हुआ है, बिजली की वह हालत भी आज कम मायने नहीं रखती। दूसरी तरफ प्रदेश के सबसे गरीब लोगों के लिए जिस तरह रियायती अनाज की योजना लागू करने, और उसे पूरे देश में सबसे अच्छी तरह, सबसे अधिक कामयाबी से चलाने का सर्टिफिकेट इस राज्य को अनगिनत मौकों पर भाजपा विरोधी यूपीए सरकार से मिला है, वह इस राज्य की हम एक सबसे बड़ी कामयाबी मानते हैं। हमारा राजनीतिक अंदाज तो यह है कि रमन सिंह के पहले कार्यकाल के बाद उनकी पार्टी दुबारा सत्ता में चावल के दाने पर सवार होकर ही पहुंची थी। करोड़ से अधिक की जिस गरीब आबादी में दो वक्त भेट भरकर कभी खाया नहीं, उनको जिस तरह से रियायती अनाज पहुंचाया गया, उसे लेकर प्रदेश के कांगे्रस नेता चाहे जो बयान दें, सोनिया गांधी की राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के एक से अधिक लोगों ने छत्तीसगढ़ की तारीफ में अपने नाम से लंबे-लंबे लेख लिखे, यहां आकर, देखकर रिपोर्ट बनाईं, और हिंदू जैसे भाजपा-विरोधी अखबार में प्रमुखता से उनको छापा। यह बात कांगे्रस के कुछ लोगों को कम महत्वपूर्ण लग सकती है, लेकिन जिन लोगों को सबसे गरीब तबके की भूख कम महत्वपूर्ण लगती है, वे छत्तीसगढ़ सरकार की इस योजना और इसकी कामयाबी के खिलाफ कागजों पर बयान जारी करते रह सकते हैं। अविभाजित मध्यप्रदेश के हिस्से के रूप में छत्तीसगढ़ का जो बुरा हाल कांगे्रस की सरकारों ने करके रखा था, उससे उबरकर छत्तीसगढ़ का इतना आगे बढऩा महत्वपूर्ण है।
इस राज्य की, यहां की सरकार की बहुत सी छोटी-छोटी खामियां हो सकती हैं, हैं भी, लेकिन उनको भारतीय लोकतंत्र के मौजूदा हाल के साथ, उस पैमाने पर ही नापा जा सकता है, उसके लिए अलग से कोई कसौटी नहीं गढ़ी जा सकती। उन तमाम पैमानों पर यह राज्य आज दूसरे लगभग तमाम राज्यों के मुकाबले बेहतर दिखता है। सांप्रदायिकता से आजाद, जनकल्याणकारी कार्यक्रमों से सबसे गरीब का भला करते हुए, यह देश के आर्थिक विकास की औसत दर के मुकाबले बहुत अधिक रफ्तार से आगे बढ़ रहा है, और सालगिरह के मौके पर इस राज्य के लिए यह राहत की एक बात है। आने वाला वक्त मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और उनकी सरकार के लिए राजनीतिक चुनौतियों वाले चुनाव भी लेकर आएगा, और वह एक अलग कसौटी होगी।



















