31 अगस्त 2013
संपादकीय
पिछले कई दिनों से हिंदुस्तान, और खासकर कांगे्रस सरकार वाला राजस्थान पूरी दुनिया की नजरों में एक मखौल बन गए हैं। हिंदुस्तान के भीतर के लोगों को केंद्र सरकार और राजस्थान सरकार से इस बात पर नफरत हो गई है कि एक बच्ची की रिपोर्ट के बाद भी आसाराम नाम का पहले से बदनाम चले आ रहा प्रवचनकर्ता फरार घूम रहा है, मीडिया को धमका रहा है, और राजस्थान की पुलिस उसको छूने में भी हिचकिचा रही है। केंद्र सरकार की मुखिया और राजस्थान की सत्तारूढ़ कांगे्रस पार्टी की अध्यक्ष एक महिला होने के बाद भी अगर एक बच्ची की पुलिस रिपोर्ट पर पुलिस का यह रूख है, तो इसका मतलब साफ है कि देश में आगे कोई बलात्कार की रिपोर्ट करवाने की न सोचे, क्योंकि किसी भी किस्म की ताकत वाले के खिलाफ कोई कार्रवाई होने से रही।
जिस मध्यप्रदेश में आसाराम घूम रहा है, वहीं पर राजस्थान की पुलिस पहुंची हुई है। मध्यप्रदेश की सत्तारूढ़ भाजपा के बड़े-बड़े दिग्गज लोग बलात्कार के आरोपी आसाराम को बचाने में सार्वजनिक रूप से लग गए हैं, और उनके हिंसक बयान छाए हुए हैं कि आसाराम एक साजिश का शिकार है। किसी बच्ची की बलात्कार की शिकायत को एक साजिश कहना हमारे हिसाब से एक जुर्म है। लोकतंत्र में किसी को भी यह हक नहीं पहुंचता कि वे किसी बच्ची की शिकायत को जांच के पहले ही साजिश करार दे दें, ऐसा करना उस बच्ची की मानहानि है, तमाम महिलाओं की मानहानि है, लोकतंत्र के खिलाफ एक गंदा और हिंसक हमला है। जो लोग आसाराम को एक प्रवचनकर्ता होने की वजह से बचाना चाहते हैं, उन लोगों को संसद में दिए गए वे बयान भी सुनने चाहिए जिनमें आसाराम को फांसी देने की मांग की गई है। हम किसी को भी मौत की सजा देने के खिलाफ हैं, इसलिए हम फांसी की मांग से सहमत नहीं हैं, लेकिन एक बच्ची की ऐसी शिकायत जांच के बाद अगर अदालत में खरी साबित होती है, तो ऐसे बलात्कारी को पूरी जिंदगी जेल में रखने को हम अधिक नहीं मानेंगे।
राजस्थान की पुलिस ने अपनी जिम्मेदारी पूरी करने के बजाय मुंह चुराने का काम किया है। आज देश भर में जगह-जगह यह पता लगता है कि बलात्कार के आरोपियों को कुछ घंटों के भीतर, या कुछ दिनों में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। ऐसे में आसाराम नाम के इस आदमी को अब तक क्यों छोड़ा गया है? क्यों पुलिस उसके दरबार में हाजिरी बजाने के अंदाज में एक नोटिस देने के लिए घंटों खड़ी रही है, और उसकी गिरफ्तारी अब तक नहीं की गई है। यह सोनिया गांधी की पार्टी की राजस्थान सरकार द्वारा शिकायत करने वाली छोटी बच्ची के साथ हिंसा है। यहां पर हम एक बार फिर जदयू के लोकसभा के नेता शरद यादव के बयानों की तारीफ करेंगे जो कि खुलकर लोकसभा के भीतर यह सवाल उठा रहे हैं कि आसाराम को अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया? दूसरी तरफ उन्हीं में यह हौसला है कि वे विपक्ष की ही नेता सुषमा स्वराज से खुलकर यह सवाल करते हैं कि वे जब मुंबई बलात्कार कांड के आरोपियों को फांसी देने की मांग कर रही हैं, तो वे आसाराम पर कार्रवाई की मांग क्यों नहीं करतीं?
इस पूरे सिलसिले में ऐसी खबरें आ रही हैं कि भाजपा के भविष्य नरेन्द्र मोदी ने पार्टी के भीतर यह कहा है कि भाजपा नेता आसाराम का बचाव बंद करें। अगर यह खबर सच है तो हम मोदी की इस बात के लिए तारीफ करेंगे। पहले भी यह बात रिकॉर्ड में दर्ज है कि गुजरात में आसाराम के अवैध आश्रम को मोदी ने तुड़वा दिया था। जो लोग आज आसाराम का साथ दे रहे हैं, उनको यह बात सोचना चाहिए कि उनके परिवार की किसी बच्ची को ऐसे किसी बड़े आदमी के हाथों ऐसा बर्ताव झेलना पड़े, बलात्कार का शिकार होना पड़े, तो भी क्या वे लोग उस बड़े आदमी को बचाने के लिए ऐसे ही बयान देंगे? लोगों को किसी बच्ची को साजिश कहने के पहले इंसानियत नाम के उस शब्द की बात भी सोच लेनी चाहिए जिसका प्रचलित अर्थ अब तक अच्छा माना जाता है। हालांकि हम इंसानियत को तथाकथित हैवानियत से परे का नहीं मानते। अच्छी से अच्छी, और बुरी से बुरी, दोनों किस्म की बातें इंसानों के भीतर ही हैं। और इनमें से आसाराम किस्म के लोगों को तुरंत ऐसे कड़े मुकदमे तक पहुंचाना चाहिए जहां से एक छोटी और गरीब बच्ची को इंसाफ मिल सके, जिससे अंधश्रद्धा के शिकार हिंदुस्तानियों के साथ बलात्कार करने के पहले ढोंगी बाबाओं को सौ बार सोचने का सबक मिले।



























