संपादकीय
30 जून 2012
पंजाब में कांग्रेस पार्टी के एक विधायक ने विधानसभा के भीतर एक प्रस्ताव रखा कि वहां के तमाम आवारा कुत्तों को पकड़कर चीन, नगालैंड और मिजोरम भेज दिया जाए। बाद में विधानसभा के बाहर कांग्रेस पार्टी ने इस बयान से किनारा कर लिया और कहा कि वह इससे सहमत नहीं हैं। लेकिन इसके पहले उत्तरपूर्वी राज्यों से कांग्रेस विधायक के इस बयान के खिलाफ आवाजें उठने लगी थीं। इस मामले से यह समझ आने लगता है कि इस बहुत बड़े और किस्म-किस्म के राज्यों वाले देश में कैसी दिक्कतें सतह के नीचे बनी हुई हैं।
यह बात जाहिर है के नगालैंड में चीन की तरह कुत्ते खाए जाते हैं, और वहां यह काम कोई छुपकर नहीं नहीं होता। हर किस्म के जानवर, पशु-पक्षी, मछलियाँ अलग-अलग लोग खाते हैं, और यह सोचना या कहना गलत है कि कोई एक जानवर दूसरे से अधिक गंदा या अच्छा है। कुछ धर्म, कुछ जातियां किसी एक जानवर को खाना अच्छा मानते हैं, या दूसरे जानवर को खाने पर उनमें कड़ी मनाही है। मुस्लिम दुनिया में सूअर को बुरा मन जाता है, और कुत्तों को पालने पर रोक है। हिन्दुओं में बहुत से ऐसे है जिन्होंने गाय को काटने के खिलाफ कानून की बनवा दिया है, फिर जानवरों को मारने के तरीकों पर भी बहुत किस्म के धार्मिक रीति-रिवाज हैं। बहुत से धर्मों में जानवरों की बलि या कुर्बानी देने के रिवाज हैं, और तरीके हैं। इनमें से बहुत सी बातें उसी तरह का सच हो सकती हैं, जिस तरह का सच पंजाब के कांग्रेस विधायक ने दो दिन पहले कहा है, लेकिन क्या हर सच इस किस्म से कहने के लायक होता है?
इन दिनों टीवी पर एक इश्तहार आ रहा है जिसमें कोई सैलानी किसी चीनी रेस्तरां में अपनी समझ में मुर्गा मंगाकर खाते दिखता है, और बाद में उसे पता लगता है कि वह मुर्गा नहीं कुत्ता है। हो सकता है कि पंजाब के इस कांग्रेस विधायक की सलाह इस इश्तहार को देखने के बाद उपजी हो, लेकिन ना सिर्फ हिंदुस्तान के भीतर, बल्कि पूरी दुनिया में लोगों को एक दूसरे की इज्जत करना सीखने की जरूरत है। जिस पंजाब से यह सलाह निकली है, वहां के लोगों को लेकर अनगिनत लतीफे जमाने से चले आ रहे हैं, और पंजाब के लोग दरियादिली से उन्हें बर्दाश्त भी करते आ रहे हैं, लेकिन पंजाब की कुछ और बातें हो सकती हैं जिनको लेकर की गयी कोई मजाक वहां के लोग बर्दाश्त नहीं करेंगे, फिर चाहे वे बातें सच ही क्यों ना हों। यह हाल देश के हर प्रदेश का है। हिंदुस्तान की गैजिम्मेदार फिल्मों के चलते पूरे दक्षिण भारत के लोगों को काले, मद्रासी बोलने वाले दिखाया जाता रहा है और उनकी टूटी-फूटी हिंदी मजाक का सामान मान ली गई। यह नहीं सोचा गया कि हिंदी इलाके के लोग क्या उतनी तमिल भी बोल पाते हैं, जितनी हिंदी दक्षिण के लोग बोल लेते हैं? जुबान, रिवाज, खान-पान को लेकर हर कोई एक दूसरे का मजाक उड़ाने लगें, तो भारत जितना बड़ा, इतनी विविधताओं वाला देश सिर्फ टकरावों से भर जाएगा। जातियों को लेकर, नेताओं को लेकर किस किस किस्म की अपमान की बातें नहीं छेड़ी जा सकती?
कुछ दिन पहले ही हमने लिखा था कि कांग्रेस पार्टी को अपने कार्यकर्ताओं को देश के संविधान से लेकर सिद्धांतों तक की पढ़ाई करवाने के लिए, लीडरशिप सिखाने के लिए कॉलेज खोलने चाहिए, ताकि बाद में दूसरी बड़ी पार्टियां भी देखकर ऐसा ही करें। हो सकता है कि भाजपा ऐसी शुरुआत करे और कांग्रेस बाद में ऐसा करे। या फिर कोई राज्य अपने विश्विद्यालयों में ऐसे कोर्स शुरू कर सकते हैं ताकि इस लोकतंत्र को हांकने वाली अगली खेप कुछ बेहतर आए। कांग्रेस के पंजाब के विधायक की सलाह चाहे कितनी ही तर्कसंगत हो, वह संवेदनाशून्य है, समझ की कमी से उपजी है। इस देश के बहुत से जानवरों के बारे में कहा जा सकता है कि उनको किस नेता के जन्मस्थान पर भेज दिया जाना चाहिए, जहां पर उनको खाया जाता है, लेकिन ऐसा कहना गंदगी के अलावा और क्या होगा? हर सच का बेदिमाग इस्तेमाल किस काम का होता है? कौन से ऐसे प्रदेश हैं, धर्म हैं, जातियां हैं, जिनमें मजाक के लायक, आलोचना के लायक कुछ नहीं मिलेगा? कांग्रेस को अपने लोगों को यह बताना चाहिए कि उसके लोगों का सार्वजनिक बर्ताव कैसा होना चाहिए।


































