सोशल मीडिया पोस्ट पर एफआईआर, कैसे बचें?

 19 जनवरी 2026  

 

यूपी की पुलिस ने आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह, और कांग्रेस के एक चर्चित नेता पप्पू यादव समेत कई लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है कि उन्होंने वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर चल रहे निर्माण कार्य के बारे में झूठी और मनगढ़ंत सामग्री सोशल मीडिया पर फैलाई है। इन लोगों ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लोकसभा क्षेत्र में मंदिरों को तोड़ा गया, काशी विश्वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार कराने वाली माता अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा को भी तोड़ा गया। संजय सिंह ने कहा कि इस पर लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष सुमित्रा महाजनजी ने भी विरोध दर्ज कराया था, लेकिन एफआईआर मेरे खिलाफ हुई है। सोशल मीडिया पर आनन-फानन कुछ पोस्ट करने की हड़बड़ी लोगों को ऐसी रहती है कि वे बिना जांचे-परखे भी कई चीजों को पोस्ट कर देते हैं। आज कम्प्यूटर और इंटरनेट से अधिकतर चीजों की सच्चाई परखी जा सकती है, इसके बाद भी लोग अगर किसी झूठ को आगे बढ़ाते हैं तो वे भारत के बहुत ही कड़े आईटी कानून के लपेटे में आ सकते हैं। दूसरी बात यह कि अधिकतर धाराओं में जुर्म दर्ज करने का अधिकार राज्य की पुलिस के पास रहता है, और गिने-चुने कानून ही केन्द्र सरकार की एजेंसियों को अधिकार देते हैं। हाल के बरसों में राज्यों की पुलिस ने सत्तारूढ़ पार्टी की राजनीतिक पसंद और नापसंद के आधार पर कुछ लोगों के खिलाफ मामले दर्ज करना, और कई लोगों के खिलाफ न करना, इसे बहुत ही फूहड़ और अश्लील तरीके से किया है। ऐसे में सार्वजनिक जीवन के जिन लोगों को कुछ न कुछ लिखने या पोस्ट करने की हड़बड़ी रहती है, उन्हें यह भी याद रखना चाहिए कि आज का वक्त राजनीतिक सहनशीलता का नहीं रह गया है, आज तो सत्तारूढ़ पार्टी की प्राथमिकताएं, राज्य में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमा तय करती हैं, और शुरूआती एफआईआर तो तकरीबन ऐसे तमाम मामलों में राजनीतिक आधार पर होती हैं। 

हम अलग-अलग नेताओं, या सोशल मीडिया एक्टिविस्ट लोगों को पहले भी यह सुझाते आए हैं कि देश का कानून राजनीतिक रूझान के आधार पर कार्रवाई शुरू करता है, और अदालत तक जाकर अपने आपको बेकसूर साबित करने में बरसों लग जाते हैं। इसलिए लोगों को अपनी खुद की साख को बचाने के लिए सावधान रहना चाहिए। किसी बात को पोस्ट करने के पहले, या उस पर लिखने के पहले यह पुख्ता कर लेना चाहिए कि सच क्या है, और झूठ क्या है। हम यह बात संजय सिंह और पप्पू यादव के प्रसंग में नहीं कह रहे हैं, हम एक बुनियादी बात कर रहे हैं कि आज जब टेक्नॉलॉजी और सोशल मीडिया लोगों को बिजली की रफ्तार से लिखने और बोलने का मौका देते हैं, तो लोगों को रबर के बिजली से बचाने वाले दस्ताने पहनने जैसी सावधानी भी बरतनी चाहिए।

(Daily Chhattisgarh)      

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