एप्पल ने आई-फोन में झांककर चाइल्ड पोर्नोग्राफी पकडऩे की घोषणा की है, एक खतरा और..

  1 सितम्बर 2021

   कैंसर विकसित करने जैसा खतरनाक काम होगा और कंपनी ऐसा नहीं करने वाली है। अदालत के आदेश के बाद भी एप्पल ने ऐसा नहीं किया था।

अब चाइल्ड पॉर्नोग्राफी को रोकने के लिए इस कंपनी ने काफी दूर तक घुसपैठ करने वाली ऐसी तकनीक के इस्तेमाल की घोषणा कर दी है तो लोग चौकन्ने हो गए हैं। मानवाधिकार संगठनों और निजता के समर्थकों का यह मानना है कि अब एप्पल के पास अमेरिकी सरकार या अमेरिकी अदालत में यह तर्क देने की गुंजाइश खत्म हो चुकी है कि उसके पास ऐसी तकनीक ही नहीं है. अब जब वह तकनीक बना चुकी है, तो यह महज वक्त की बात है कि चाइल्ड पॉर्नोग्राफी के बाद सरकार और किस अपराध को रोकने के लिए इस कंपनी पर घुसपैठ का दबाव डालेगी, और धीरे-धीरे सरकार निजता को पूरी तरह से खत्म कर सकेगी क्योंकि कंपनी ने ऐसी तकनीक विकसित कर ली है। अमेरिकी निजता संगठनों का यह भी कहना है कि दुनिया के बहुत से दूसरे देश भी कंप्यूटर और टेलीफोन कंपनियों पर लगातार दबाव डाल रहे हैं कि वे सरकार को घुसपैठ का रास्ता बनाकर दे। एप्पल के मामले में ही अमेरिका में जो बहस चल रही है उसमें यह गिनाया जा रहा है कि चीन में वहां की सरकार ने इस कंपनी पर दबाव डालकर यह इंतजाम कर लिया है कि इसके ग्राहकों की सारी जानकारी चीन में ही इसके सरवर पर रहेगी। लोगों का मानना है कि इससे चीन में आईफोन इस्तेमाल करने वाले लोगों पर सरकार की एक पकड़ बन गई है। अमेरिका में इस पर चल रही बहस के दौरान हिंदुस्तान की सरकार का जिक्र भी किया जा रहा है कि किस तरह वह व्हाट्सएप के पीछे लगी हुई है कि उसे घुसपैठ की इजाजत दी जाए, किस तरह व ट्विटर या फेसबुक पर अपने को नापसंद सामग्री को मिटाने का इंतजाम कर रही है. डिजिटल घुसपैठ के लिए पेगासस जैसे खुफिया हैकिंग सॉफ्टवेयर का भारत में भी इस्तेमाल किए जाने की खबरें तो पिछले कुछ महीनों से चल ही रही हैं, जो कि सुप्रीम कोर्ट में एक गंभीर कगार तक आ पहुंची हैं।

लोग इस बात को लेकर फिक्रमंद हैं कि मोबाइल फोन जैसा निजी सामान अगर किसी कंपनी की बिल्कुल ही आम इस्तेमाल की तकनीक से घुसपैठ के लायक रह जाएगा तो लोगों की व्यक्तिगत जिंदगी कुछ भी नहीं बचेगी, उसमें व्यक्तिगत कुछ भी नहीं रह पाएगा। आज बात एप्पल के कंप्यूटरों की है, और कल हो सकता है कि एप्पल के कोई कर्मचारी कंपनी की नीतियों से बगावत करके इसमें घुसपैठ करें, और वहां की जानकारी को लेकर बाहर निकल जाएं। एप्पल को खुद भी अंदाज है कि उसकी इस मुहिम से उसके ग्राहक बिदक सकते हैं, तो उसने अपने बिक्री करने वाले कर्मचारियों की एक अलग से ट्रेनिंग शुरू की है कि ग्राहकों की तमाम फिक्र को किस तरह सुलझाया जाए और उनका भरोसा किस तरह कायम रखा जाए। लेकिन कुल मिलाकर हकीकत यह है कि एप्पल ने ऐसी तकनीक ना केवल विकसित कर ली है बल्कि उसका इस्तेमाल शुरू करने की घोषणा की है और किसी भी सरकार की इस ताकत पर लार टपक सकती है कि वह लोगों के मोबाइल पर कुछ किस्म की फोटो कुछ किस्मों के वीडियो या कोई भी संदेश ढूंढ सकती हैं। इसके लिए कंपनी पर कब से कितना दबाव पड़ेगा या कंपनी के कंप्यूटरों में घुसपैठ करके सरकार या दूसरी हैकिंग एजेंसियां ऐसा कर पाएंगे, यह खतरा सामने खड़ा ही रहेगा। एप्पल तो दुनिया की एक सबसे बड़ी कंपनी है और इसने अभी कुछ वर्ष पहले तक अमेरिकी सरकार और अमेरिकी अदालत की, आतंक के एक मामले में भी कोई मदद करने से साफ मना कर दिया था। दूसरी तरफ मोबाइल फोन और कंप्यूटर बनाने वाली बहुत सी ऐसी चीनी कंपनियां हैं जिनके बारे में दुनिया भर में यह शक है कि वे चीन की सरकार या खुफिया एजेंसियों को तमाम जानकारियां पहुंचाती हैं। पश्चिम के कई देशों में चीन की ऐसी बदनाम कंपनियों के टेलीफोन एक्सचेंज से लेकर उनके मोबाइल फोन तक इस्तेमाल नहीं किए जा रहे हैं। भारत में भी शायद सरकार, फौज, और खुफिया एजेंसियां ऐसी कंपनियों के सामान इस्तेमाल करने से बचती हैं। अब सवाल यह है कि अगर चाइल्ड पॉर्नोग्राफी को रोकने के नाम पर भी, या शक का फायदा दिया जाए तो यह कह सकते हैं कि चाइल्ड पॉर्नोग्राफी को रोकने के लिए, अगर ऐसी तकनीक विकसित की जा रही है तो वह बेजा इस्तेमाल के लिए भी मौजूद रहेगी। सरकारी खुफिया एजेंसियां और हैकिंग कंपनियां ये सब इस नए रास्ते के कानूनी या गैर कानूनी इस्तेमाल की संभावनाएं ढूंढने में लग चुके होंगे। आज एक कंपनी ने ऐसा किया है, आगे चलकर दूसरी कंपनियां ऐसा करेंगी, और बात मोबाइल से कंप्यूटरों तक चली जाएगी और दुनिया में कुछ भी गोपनीय या निजी नहीं रह जाएगा।

हम शायद ऐसी नौबत को ध्यान में रखते हुए हमेशा से इस बात को लिखते हैं कि लोगों का अपना चाल-चलन ठीक रखना, गैर कानूनी काम से बचना ही अकेला रास्ता है। धीरे-धीरे ऐसी तकनीक भी बन सकती है कि लोगों के मन में कोई बात आए और कंप्यूटर या फोन उसको रिकॉर्ड कर ले, इसलिए लोगों को अपना मन भी साफ-सुथरा रखना सीख लेना चाहिए। आज लोगों के मन में कोई बात आए और कल वह पोस्टर की तरह छपकर सरकारों के पास पहुंच जाए, यह बहुत खतरनाक नौबत होगी। फिलहाल मुजरिमों को पकडऩे और निजी जिंदगी की निजता को खतरे में डालने के बीच एप्पल की यह नई तकनीक आई है, और देखना है कि इसके बेजा इस्तेमाल कबसे सामने आते हैं। 

(Daily Chhattisgarh)

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