एआई के बपतिस्मा और जनेऊ संस्कार के खतरे..

 04 अक्टूबर 2026  

 

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को लेकर आज जो कंपनी, एंथ्रापिक सबसे अधिक चर्चा में है, उसने अभी एक अनोखा काम किया। अमरीका के सान फ्रांसिस्को में अपने मुख्यालय में उसने अलग-अलग कुछ धर्मों के लोगों को, कुछ मानसिक विशेषज्ञों को आमंत्रित किया, और उनसे एआई की नैतिकता पर चर्चा की। इस चर्चा का मकसद एआई का प्रशिक्षण भी था, और इस दौरान इस कंपनी के एक प्रमुख व्यक्ति भी वहां पर बैठे रहे। भारत के हिन्दू धर्म के एक प्रतिनिधि की तरह वहां पर रामकृष्ण मिशन के स्वामी सर्वप्रियानंद भी मौजूद थे, लेकिन इन सारे लोगों से कंपनी ने इस चर्चा के पहले ही जानकारी बाहर उजागर न करने का एक अनुबंध कर लिया था, इसलिए इसकी बड़ी सीमित जानकारी बाहर आई है। स्वामी सर्वप्रियानंद को आज के डिजिटल युग में स्वामी विवेकानंद के प्रतिनिधि के रूप में देखा जाता है, और वे अद्वैत वेदांत की व्याख्या दुनिया भर के लोगों के सामने करते हैं। 

एआई को लेकर यह बहस चल ही रही है कि उसमें चेतना कब जागृत होगी, अगर अभी तक हो नहीं चुकी है तो। कुछ लोगों का कहना है कि एआई अब कुछ फैसले खुद लेने लगा है, और जल्द ही वह फैसलों के मामलों में बेकाबू हो सकता है। यह बात तो हम ही कई बार सामने रख चुके हैं कि इसी एंथ्रापिक कंपनी को छोडक़र निकले हुए एक विशेषज्ञ-जानकार ने यह खतरा सामने रखा है कि एआई के अगले दस बरस में मानव प्रजाति को खत्म कर देने का खतरा दस फीसदी से अधिक है। आज जब वह एक औजार की तरह है, तब भी यह खतरा तो बना हुआ ही है कि मुजरिम या आतंकी, या किसी और सोच के लोग इसे हथियार की तरह इस्तेमाल करके भारी तबाही ला सकते हैं, दुनिया की शासन व्यवस्था को घुटनों पर ला सकते हैं। दुनिया के एक सबसे बड़े टेक्नॉलॉजी-मुखिया रहे बिल गेट्स ने यह कहा है कि कुछ लोग एआई को हथियार की तरह इस्तेमाल करके सौ करोड़ से अधिक लोगों को भी मार सकते हैं। इस तरह आज एआई एक ऐसी कगार पर पहुंच चुका है जहां से आगे वह जमीन खत्म हो जाने पर किसी परी या जादूगर की तरह आसमान की तरफ भी उड़ सकता है, और नीचे खाई की तरफ भी कूद सकता है। उसकी क्षमताओं की कोई मामूली सीमाएं नहीं हैं, और वह किस तरह की सोच के साथ ताकत का किस तरह इस्तेमाल करेगा, इसका कोई ठिकाना नहीं है। 

अब जब धर्म के प्रवचन एआई को सुनाए जा रहे हैं, तो उसके खतरनाक होने का खतरा पहले के मुकाबले कई गुना अधिक हो जाता है। बिना धर्म के दुनिया के देशों के कानून, संविधान, और अंतरराष्ट्रीय समझौतों को पढ़-पढक़र एआई कुछ या अधिक हद तक न्यायप्रिय हो भी सकता था, कि अब उसका धर्म में अन्नप्राशन करवाया जा रहा है। धर्म अपने मिजाज, तेवरों, और मौजूदा आम इस्तेमाल की वजह से लोकतंत्र और इंसानियत से खासे दूर है। इजराइल, फिलीस्तीन, और लेबनान ने जो कर रहा है, उसे यहूदी धर्म की एक सोच सही ठहरा रही है। ओसामा-बिन-लादेन ने वल्र्ड ट्रेड सेंटर की इमारतों के साथ जो किया, उसे इस्लाम के भीतर की एक सोच सही ठहरा रही है। अफगानिस्तान में तालिबान महिलाओं के साथ जो कर रहे हैं, वह भी इस्लाम के कई लोगों के मुताबिक जायज है। हिन्दुस्तान में ही अखलाक जैसे गरीब इंसान की गोमांस के शक मेंं की गई भीड़त्या को बहुत से लोग जायज मानते हैं। पंजाब में गुरू ग्रंथ साहब के साथ बेअदबी का आरोप लगाने पर ही किसी की भीड़त्या को समाज और सरकार सभी सही मान लेते हैं। पाकिस्तान में कुरान के साथ बेअदबी, या पैगंबर के अपमान का आरोप ही किसी आरोपी को थाने से छिनकर ले जाने और जिंदा मार डालने के लिए काफी है। अलग-अलग धर्मों के अलग-अलग तबके ऐसी तमाम हरकतों को जायज ठहराते हैं। अब जो नया एआई धार्मिक प्रशिक्षण के बाद तैयार होगा, उसके सामने एक बड़ा खतरा यह खड़ा रहेगा कि उसने अगर धर्म की नसीहतों को सुनने-समझने के बाद आज धर्मों के मौजूदा स्वरूपों को समझना शुरू कर दिया, और उन्हें मानने लगा, तो हो सकता है कि वह पश्चिमी दुनिया, मुस्लिम देशों, अफ्रीका, और भारत के ही कुछ प्रदेशों में गोमांस खाने वाले लोगों को खत्म करने को जायज मान ले, ताकि बची हुई गौमाताओं को बचाया जा सके। हो सकता है कि वह विनायक दामोदर सावरकर की सोच को जायज मानकर, गाय को उत्पादकता खत्म होने के बाद खाने लायक पशु मानकर गौहत्या का विरोध करने वालों को खत्म करने को जायज मान ले। हो सकता है कि वह फिलीस्तीनियों को खत्म करने वाले इजराइल के नागरिकों से भरे हुए विमान को जमीन से टकराकर खत्म करने को जायज मान ले, और इसके लिए वह ओमान के किसी मुस्लिम पायलट को और अधिक कट्टरपंथी बनाने में जुट जाए ताकि वह यहूदी मुसाफिरों से भरे प्लेन को खत्म करने की कोशिश करे। 

धर्म हजारों बरस की किताबों में चाहे जैसा भी लिखा गया होगा, हम उतने पुराने प्रपंच में उलझना नहीं चाहते। लेकिन हम समय-समय पर यह भी लिखते आए हैं कि किसी बच्चे को बड़ा करने का सबसे अच्छा जरिया यह हो सकता है कि उसे कोई धार्मिक सोच न दी जाए, और उसे बालिग होने पर अपनी धार्मिक आजादी तय करने दी जाए। लेकिन छोटे-छोटे बच्चों को पहले तो धर्म, फिर धर्मान्धता, और फिर साम्प्रदायिकता की हिंसा तक में झुलसा देने का नतीजा क्या होता है, यह सडक़ों पर डीजे के लाउडस्पीकरों के साथ अश्लील और हिंसक हरकतों को करते हुए बच्चों में देखा जा सकता है। 

धर्म के मौजूदा स्वरूप को अनदेखा करना, और धर्म की हजारों बरस पुरानी बातों में से कुछ बातों को जायज बताते हुए उनकी व्याख्या करना, एआई के प्रशिक्षण के लिए एक सबसे ही खतरनाक काम हो सकता है। आज दुनिया भर में धार्मिक और सांप्रदायिक हिंसा करने वाले लोग अपनी हरकतों को धर्म की अपनी सोच के मुताबिक न सिर्फ जायज ठहराते हैं, बल्कि ऐसे जुर्म के एवज में आगे चलकर जन्नत पाने की हसरतें भी पाल लेते हैं। ऐसा लगता है कि दुनिया भर का ज्ञान, और कई किस्म की समझ भर देने के बाद भी एआई अभी पर्याप्त रफ्तार से मानवसंहार के लायक नहीं हो पाया था, इसलिए अब उसे धर्म के साथ घोंटा जा रहा है। आज दुनिया के अलग-अलग सबसे विकसित लोकतंत्रों में भी धार्मिक समूह लोकतंत्र और मानवता दोनों के लिए बड़ा खतरा बने हुए हैं, वे अपने-अपने देश की कानून-व्यवस्था के लिए भी चुनौती बने हुए हैं। भारत जैसे देश में भी धर्म के खतरे हर दिन कहीं न कहीं सामने आ रहे हैं। ऐसे में एआई का जो ताजा प्रशिक्षण धर्म की तथाकथित  अच्छी बातों को लेकर शुरू हुआ होगा, वे बातें कब कट्टरता तक पहुंच जाएंगी, या खुद एआई ही यहां से उड़ान भरकर कट्टरता के हिंसक आसमान पर पल भर में पहुंच चुका होगा, इसका अंदाज लगाना आज इंसानों के लिए मुमकिन नहीं है, लेकिन यह एआई के लिए पल भर में कर पाना चुटकी बजाने जैसा आसान जरूर है। 

दुनिया को इस बात को समझना होगा कि एक नास्तिक एआई की सोच में दुनिया की अच्छी बातों के लिए कुछ सम्मान जरूर हो सकता था, लेकिन धर्म के साथ उसके गठजोड़ से उम्मीद तो की जा रही है एक नैतिक प्रशिक्षण की, लेकिन आज खुद धर्म पर अमल कहां नैतिक रह गई है? धर्म के इस ताजा यज्ञोपवीत संस्कार से अब यह तय हो गया है कि न सिर्फ एफिल टॉवर, बल्कि दुनिया के किसी भी पर्यटक स्थल पर भ्रमचारियों का जत्था पहुंचेगा, तो एआई ही महिला कर्मचारियों की ड्यूटी वहां से खत्म कर देगा। जिस तरह जंगल के किनारे के गांवों में भेडिय़ा आया-भेडिय़ा आया की चीख-पुकार से लोग घरों में घुस जाते हैं, उसी तरह किसी धर्म के भ्रमचारी आए-भ्रमचारी आए ऐसे नारे से एआई तुरंत ही महिलाओं को आंखों से ओझल करवा देगा। इंसान के हाथों धर्म के खतरे मानो कम थे कि अब नैतिकता का पाठ पढ़ाने के नाम पर एआई का धर्म से सामना करवाया जा रहा है। अब सचमुच ही दुनिया का ईश्वर ही मालिक है।

(Daily Chhattisgarh)   

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें