ईश्वर के नाम पर जमा का इस्तेमाल जरूरतमंद के लिए

17 फरवरी 2015 
संपादकीय
भारत में किसी भी धर्म का त्यौहार हो, उससे जुड़े लोगों का उत्साह देखते ही बनता है। लोग काम छोड़कर, नियम-कायदों का सम्मान छोड़कर त्यौहार मनाने में लग जाते हैं। चारों तरफ सड़कों पर त्यौहार का कब्जा हो जाता है, और उपासना की जगहों पर खासा चढ़ावा आता है। बहुत बरसों से हमेशा यह लिखा जाता है कि ईश्वर पर चढ़ाया जाने वाला प्रसाद, उस पर चढ़ाया जाने वाला दूध, गरीब और भूखे, कुपोषण के शिकार बच्चों को क्यों नहीं दिया जाता? मंदिरों से निकलकर दूध नालियों में चले जाता है, और धार्मिक मान्यता के मुताबिक ईश्वर के ही बनाए हुए बच्चों को ऐसा दूध उनकी असल जिंदगी में नसीब नहीं होता। 
हिंदुस्तान में बहुत से धर्मों के लोगों के हाथों से पैसे धर्म के नाम पर ही निकलते हैं। मंदिरों में दान पेटियां भरती हैं, और अभी-अभी दक्षिण भारत के एक मंदिर के खजाने की जांच करने के बाद भारत के सीएजी रहे विनोद राय ने यह रिपोर्ट दी है कि इस चर्चित मंदिर से सैकड़ों किलो सोना गायब हो गया है। पद्मनाभस्वामी मंदिर से 266 किलो सोना गायब होना छोटी बात नहीं है, लेकिन यह सोना ईश्वर तो नहीं ले गया, उसके नाम पर इक_ा हुआ, और गायब कर दिया गया। अब यह सोना इतने दाम का होता है कि इससे लाखों बच्चों का खाना हो सकता है। लेकिन इसे ईश्वर के नाम पर जुटाकर उसके भक्त बने लोग खा बैठे।
ऐसा ही मठ-मंदिरों की जमीन-जायदाद का होता है, वक्फ की जमीनों का और इमारतों का होता है, चर्च की जमीनों का होता है। इसी छत्तीसगढ़ के रायपुर में जमीन माफिया ने चर्च की जमीनों को खरीद लिया, और मामला अदालत में चल रहा है। लोगों ने सैकड़ों बरस से धर्म के नाम पर दान किए थे, और उनको लोग लूट खा रहे हैं। इन सबके बीच ईश्वर एक मूक गवाह बने रहता है। कुल मिलाकर साबित यही होता है कि अगर उसके नाम पर काम करने वाले इंसान अच्छे हैं, तो दान का अच्छा इस्तेमाल हो सकता है। लेकिन हमारा अनुभव यह रहा है कि दुष्ट लोग ही समाज में दान की लूटपाट अधिक करते हैं, और भूले-भटके ही उसका इस्तेमाल जरूरतमंद गरीबों के लिए हो पाता है।
जब कभी धर्मस्थलों की कमाई पर सार्वजनिक या सरकारी नियंत्रण की बात आती है, तो उस धर्म से जुड़े हुए लोगों को विरोध में खड़ा करवा दिया जाता है और वोटों के लिए डरे हुए नेता कभी कड़वे फैसले नहीं लेते। हमारा यह भी मानना है कि जब कभी दान के इस्तेमाल पर लोगों को भरोसा होता है, तो वे खुलकर दान भी देते हैं। इसलिए सरकार के सभी धर्मों की जमीन-जायदाद, कमाई, इन सब पर जनता का नियंत्रण रखने के लिए इस पर सरकारी अधिकारी, और संबंधित धर्म के लोगों की मिलीजुली कमेटी बनानी चाहिए। कुछ-कुछ मामलों में अभी ऐसे ट्रस्ट हैं भी, लेकिन बिना किसी फर्क के, सबके साथ एक जैसा सुलूक होना चाहिए, और ईश्वर के नाम पर जमा पैसों का जरूरतमंद जनता के लिए इस्तेमाल होना चाहिए।

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