ट्रम्प के अमरीका को देखें, तो कुछ जाना-पहचाना नहीं लगता?

11 सितंबर 2026  

 

डॉनल्ड ट्रम्प ने कल अमरीका में मध्यावधि चुनाव के पहले अपनी पार्टी के एक बड़े कार्यक्रम में यह घोषणा की है कि ये मध्यावधि चुनाव अमरीका के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण चुनाव होंगे, और इनसे देश के अगले ढाई सौ बरस का भविष्य तय होगा। वहां पर मध्यावधि चुनाव से सरकारें नहीं बदलतीं, फिर भी ट्रम्प इस चुनाव को लेकर इस अंदाज में भाषण दे रहा है कि मानो यह राष्ट्रपति का चुनाव हो रहा हो। लेकिन इससे भी बड़ी दिलचस्प बात यह रही कि उसने कहा कि अगर चुनावी नतीजों में अमरीकी संसद के दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी को बहुमत मिलेगा, तो हर वयस्क अमरीकी नागरिक को पांच हजार डॉलर दिए जाएंगे। यह रकम कुल मिलाकर खरबों में जाने वाली है, और अमरीकी विश्लेषक दो बातों पर गौर कर रहे हैं, कि यह पैसा आएगा कहां से? और दूसरा यह कि क्या वोट पाने के लिए ऐसी कोई घोषणा कानूनी भी है? 

यह आखिरी वाली बात अमरीका और भारत के बीच एक तुलना करने पर मजबूर कर रही है। भारत में अब धीरे-धीरे करके अधिकतर पार्टियां चुनावों में महिला मतदाताओं को डायरेक्ट कैश ट्रांसफर का लालच देने लगी हैं। अलग-अलग प्रदेशों में ऐसी योजना के नाम अलग-अलग रहते हैं। लेकिन इससे भी कुछ और पहले जाएं तो तीन हफ्ते पहले ट्रम्प ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का नाम लेकर भारत की चुनाव व्यवस्था और वोटर आईडी की तारीफ की थी। उन्होंने मतदाता परिचय पत्र की तरह, अमरीका के सेव अमेरिका एक्ट के तहत नागरिकता सुबूत, और फोटो परिचय पत्र पर जोर दिया था। अब दिलचस्प बात यह है कि इसी वक्त भारत में विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण, एसआईआर चल रहा है। और ट्रम्प ने अभी ताजा घोषणा की है कि अमरीकी जनगणना से एच-1बी वीजा धारकों को बाहर रखा जाए, और भारतवंशी छात्र भी ऐसी अमरीकी जनगणना से बाहर रहेंगे। भारत और अमरीका दोनों जगह आबादी के अलग-अलग हिस्सों को नागरिकता से बाहर करने की ये कोशिशें हैं तो अलग-अलग पैमानों की, लेकिन ये एक राजनीतिक समानांतर काम चल रहा है कि सत्ता का नापसंद लोगों को अलग कैसे किया जाए। अमरीका में एच-1बी वीजाधारकों में सबसे अधिक भारत के लोग हैं, और वे अमरीकी जनगणना में बाहर होने जा रहे हैं। कल के दिन लोगों को हैरानी नहीं होनी चाहिए कि अगर ट्रम्प के कुछ अघोषित रहस्यमय सलाहकार भारत आकर ज्ञानेश कुमार से ट्रेनिंग लेकर जा रहे हों। 

आज ही एक अखबार में यह रिपोर्ट है कि भारत के एक बंगाली परिवार को किस तरह देश से निकालकर बांग्लादेश धकेल दिया गया था, और वहां एक बरस जेल में काटकर जब यह हिन्दुस्तानी बंगाली लौटा है, तो वह यह सवाल कर रहा है कि उसका कुसूर क्या था। जिस वक्त इस भारतीय नागरिक को गर्भवती पत्नी और बाकी परिवार के साथ अवैध करार देकर जून 2025 में बांग्लादेश में धकेल दिया गया था, तो दानिश नाम के इस मुस्लिम को बांग्लादेश ने साल भर जेल में बंद रखा, बाद में जब उसका मामला हिन्दुस्तानी सुप्रीम कोर्ट में गया, तो सुप्रीम कोर्ट की दखल के बाद अब उसे भारत वापिस लाया गया है। लोगों को याद होगा कि ट्रम्प ने भी वहां कानूनी रूप से बसे हुए लोगों को इसी अंदाज से देश के बाहर भेज दिया था, और फिर अमरीकी अदालतों ने उन्हें वापिस लाने का हुक्म दिया था। जिस तरह भारत में एक राष्ट्रवाद का मुद्दा बनाकर दूसरे देश का होने का आरोप लगाकर इसे चुनावी मुद्दा बनाया गया था, ठीक उसी तरह ट्रम्प अमरीका में प्रवासियों के खिलाफ मुहिम चला रहा है, और उसका सबसे बड़ा और बुरा निशाना हिन्दुस्तानी बन रहे हैं। 

भारत में मेक इन इंडिया नाम का एक बड़ा अभियान चल रहा है, और इस देश में अधिक से अधिक चीजों को खुद बनाने की एक मुहिम चल रही है। लेकिन दूसरी तरफ चीन के साथ सरहदी मुठभेड़ के बाद चीनी सामानों के बहिष्कार का जो अभियान चला था, वह किसी किनारे नहीं पहुंच पाया। 2020 में गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों पर चीनी हमले के बाद से चीन से भारत का आयात लगातार बढ़ते चल रहा है। 2020-21 से 2024-25 के बीच भारत से चीन को निर्यात 33 फीसदी गिर गया, और चीन से भारत में आयात 74 फीसदी बढ़ गया। व्यापार का घाटा 125 फीसदी बढ़ गया, और आर्थिक आंकड़े बताते हैं कि इन पांच बरसों में भारत के चीन के साथ कारोबार में भारत की करीब 384 बिलियन डॉलर की कमी आई है। दूसरी तरफ अमरीका ट्रम्प के वर्तमान कार्यकाल में जिस तरह दुनिया भर के सामानों पर टैरिफ लगाते जा रहा है, उससे खुद अमरीका में बाहर से आने वाले सामान अंधाधुंध महंगे हो रहे हैं, और ट्रम्प का मेक अमेरिका ग्रेट अगेन नाम का राष्ट्रवादी अभियान किसी किनारे नहीं पहुंच रहा, क्योंकि दूसरे देशों से आने वाला कच्चा माल इतना महंगा हो रहा है कि अमरीका में मैन्युफैक्चरिंग बढऩे के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं। 

अब जब दोनों देशों की कई तरह की स्थितियों की तुलना की जा रही है, तो भारत इस मायने में बेहतर है कि इसने अपने आपको किसी भी जंग में उलझाकर नहीं रखा है। दोनों देशों में कई बातें राजनीतिक समानता की जरूर चल रही हैं, लेकिन भारत कुछ मामलों में ट्रम्प के अमरीका के मुकाबले अधिक समझदारी से चलते दिख रहा है। अब हम तो इस चर्चा को शुरू भर कर सकते थे, लोग चाहें तो अपनी-अपनी जानकारी, और समझ के मुताबिक इस तुलना को आगे बढ़ा सकते हैं।

(Daily Chhattisgarh)   

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