जिद और तैश में कांग्रेस की सीडी रणनीति आत्मघाती

संपादकीय
28 अक्टूबर 2017


कल सुबह से शुरू हुए छत्तीसगढ़ के एक सेक्स-सीडी कांड पर हमने कल भी इसी जगह लिखा, और उसके कई पहलुओं पर साफ-साफ लिखा। लेकिन चौबीस घंटे गुजरने पर और कांग्रेस, भाजपा, जोगी, और राज्य सरकार का रूख इस मामले पर  सामने आने के बाद, इस मामले में गिरफ्तार पत्रकार विनोद वर्मा का टीवी कैमरों के सामने चिल्लाकर कहा हुआ सामने आने के बाद, और कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष द्वारा यह सीडी दिखाने और देने के बाद अब कांग्रेस और भाजपा ने अपनी-अपनी पार्टी पोजिशन साफ कर दी है। जैसी कि भाजपा से उम्मीद थी वह अपने मंत्री के साथ खड़ी दिख रही है, सरकार भी मंत्री के साथ है, जोगी कांग्रेस को यह मौका मिला है कि अब तक की सारी सीडी-तोहमतों को धोकर वह अब दूसरों पर आरोप लगा सके, और कांग्रेस पार्टी ने इस तोहमत को अपने ऊपर ओढ़ लिया है, जो कि कुछ हैरानी की बात है।
हम प्रदेश की राजनीति के हिसाब से देखें तो यह लगता है कि एक तरफ जब मुख्यमंत्री अपनी सरकार के आखिरी तीन सौ दिन काम के मानकर जिला कलेक्टरों को चेतावनी के साथ लक्ष्य दे रहे हैं, उस वक्त एक अच्छे-भले चलते विपक्ष के मुखिया अपने आपको एक घटिया तौर-तरीके से खुद होकर जोड़ रहे हैं। कल सुबह जब छत्तीसगढ़ पुलिस ने गाजियाबाद में पत्रकार विनोद वर्मा को, खुद विनोद वर्मा द्वारा घोषित, एक अश्लील वीडियो के आरोप में गिरफ्तार किया, तब तक कांग्रेस पार्टी पर कोई तोहमत नहीं लगी थी। लेकिन कुछ देर के भीतर ही भूपेश बघेल ने अपने आपको इस तोहमत का हकदार खुद ही बनाते हुए पेश कर दिया, और सरकार पर इसे लेकर हमला बोल दिया। हमारे नियमित पाठकों को याद होगा कि इसी जगह हम कई बार लिख चुके हैं कि छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी देश में राष्ट्रीय स्तर पर चलने वाली कांग्रेस पार्टी के मुकाबले बहुत बेहतर है। भूपेश बघेल लगातार सरकार के खिलाफ हल्ला बोल रहे थे, और अभियान चला रहे थे। किसी भी राज्य में तेरहवें बरस में उस विपक्ष के खड़े रहने की अपनी मुसीबतें रहती हैं जिस पार्टी की केन्द्र में भी सरकार न रह गई हो। फिर भी भूपेश बघेल एक मजबूत विपक्ष चला रहे थे। इस बात को बार-बार दोहराने और लिखने का जिक्र यहां इसलिए जरूरी है कि आगे लिखी हुई बातों को उसी संदर्भ में समझने की जरूरत है।
हमने कल भी इस बात को लिखा था कि बंद कमरे में अगर आपसी सहमति से दो वयस्क लोगों के बीच सेक्स हो रहा है, तो उसमें जुर्म तभी दाखिल होता है जब कोई चोरी-छुपे इसकी रिकॉर्डिंग करता है। ऐसे मामले में एक जुर्म से हासिल एक सेक्स-वीडियो का तब तक कोई राजनीतिक या कानूनी, या सार्वजनिक महत्व नहीं हो सकता, जब तक इस सेक्स के पीछे ओहदे की ताकत न हो, या कि ब्लैकमेलिंग जैसी कोई नौबत न हो, किसी महिला या नाबालिग का शोषण न हो। ऐसे में भाजपा की सत्ता के तेरहवें बरस के अंत में तमाम दूसरे मुद्दों को छोड़कर अगर भूपेश बघेल ऐसे एक वीडियो पर इतना बड़ा दांव लगा रहे हैं, तो यह हमारे हिसाब से विपक्ष का दीवालियापन है। राज्य में भाजपा की सरकार ने अपने तीन कार्यकाल में विरोध के लायक अनगिनत मुद्दे मीडिया और विपक्ष को जुटाकर दिए हैं। इनमें से बहुत से मुद्दों पर कांग्रेस लगातार सड़क और मीडिया पर लड़ाई लड़ते भी आई है। लेकिन इस लड़ाई में ऐसे किसी वीडियो की जगह हो सकती है, ऐसा सोचना भी मुश्किल था। ऐसा वीडियो सरकार में कुछ शर्मिंदगी ला सकता है, पार्टी संगठन के भीतर थोड़ी सी शर्मिंदगी आ सकती है, लेकिन उससे परे इसका क्या कानूनी दर्जा है? और फिर कांग्रेस पार्टी के सामने अपनी खुद की अनगिनत मिसालें हैं। उसने अपने राष्ट्रीय प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी को ऐसे ही एक सेक्स-वीडियो के बाद प्रवक्ता पद से हटा दिया था, लेकिन कुछ महीनों के बाद उन्हें फिर वही जिम्मा दे दिया गया। सुप्रीम कोर्ट के एक कामयाब वकील सिंघवी को अगर इस सेक्स-वीडियो के पीछे किसी साजिश की गंध आती, तो वे अदालत में लोगों को घसीट सकते थे, लेकिन उन्होंने इसे गुजर जाने दिया, और आज वे रोज नेशनल टीवी पर कांग्रेस की वकालत करते दिखते हैं।
छत्तीसगढ़ कांग्रेस को अपने खुद के भले के लिए मुद्दों की लड़ाई लडऩी चाहिए। जिस तरह से उसने एक बेनाम-गुमनाम सेक्स-वीडियो को लेकर उसे इतना बड़ा मुद्दा बनाया है कि वह पार्टी के व्यापक हितों के खिलाफ जाएगा, और राज्य के लोकतंत्र में विपक्ष इससे कमजोर होगा। ऐसे सेक्स-वीडियो से किसी सरकार या पार्टी के लिए शर्मिंदगी तभी होती है जब वे हवा में तैरते हुए फैल जाते हैं। जब लोग इन्हें पेश करते हैं, तो ये सवाल उठते हैं कि इसमें कुछ गैरकानूनी भी है, या कि ये सामाजिक मान्यताओं के पैमानों पर महज अनैतिक कहे जाने वाले हैं? यह सोचना पाखंड से परे नहीं होगा कि लोगों का इस किस्म का कोई सेक्स जीवन नहीं होता, बहुत से लोगों का बंद कमरे के भीतर ऐसा जीवन होता है, और जुर्म करते हुए, निजता भंग करते हुए ऐसी रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल किसी भी इज्जतदार पार्टी को तब तक नहीं करना चाहिए जब तक कि इस रिकॉर्डिंग के भीतर कोई जुर्म होते न दिख रहा हो। कांग्रेस पार्टी ने छत्तीसगढ़ में इस मुद्दे पर आंदोलन की घोषणा की है, लोकतंत्र में कोई भी पार्टी किसी भी मुद्दे पर, या कि बिना मुद्दे भी, सड़कों पर उतर सकती है, लेकिन छत्तीसगढ़ कांग्रेस तैश और जिद में एक गलत काम करने जा रही है, इससे पार्टी प्रदेश अध्यक्ष का कम, और बाकी पार्टी का अधिक नुकसान होगा। आखिर में यह भी सोचने की जरूरत है कि ऐसी सेक्स-सीडी में जो महिला दिख रही है, उसकी इज्जत उछालने का हक किसको मिल सकता है? पहले तो उसके निजी पलों की वीडियो रिकॉर्डिंग किसी गुमनाम ने की, और अब नामी लोग उसके वीडियो का प्रचार कर रहे हैं क्योंकि उसमें का आदमी एक मंत्री सरीखा दिखने का आरोप है। इस राजनीतिक आरोपबाजी में उस महिला की क्या गलती है जो कि उसकी वीडियो इस तरह फैलाई जा रही है? क्या नेताओं से परे आम लोगों को कोई हक नहीं हैं? भूपेश बघेल को ठंडे दिल से, और अपनी पार्टी के हित में अपनी रणनीति पर फिर से सोचना चाहिए। (Daily Chhattisgarh)
- सुनील कुमार

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें