संपादकीय
30 अक्टूबर 2017

अभी फिर खबर आ रही है कि बहुत सी चीजों पर जीएसटी में बदलाव होने जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि यह बदलाव हर पखवाड़े कुछ न कुछ होते चल रहा है, और अब देश भर के छोटे-बड़े व्यापारियों के सामने यही साफ नहीं है कि उनका क्या भविष्य है, उन्हें कैसे इससे उबरना है। और छोटे तो छोड़ दें बड़े व्यापारियों का भी यही हाल है कि किससे जीएसटी वसूलें और किससे उन्हें जीएसटी की वापिसी होगी। यह पूरा सिलसिला यह साफ करता है कि देश में जीएसटी को बिना सही और पर्याप्त तैयारी के अचानक एक हमले की तरह लागू किया गया, और इसे एक प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया गया। आज भाजपा अंदर ही अंदर इस बात को लेकर परेशान भी है कि जीएसटी से परेशान हो चुका पूरा देश अगले चुनाव में किस तरह की प्रतिक्रिया देगा।
देश में दरअसल कुछ महीनों के भीतर दो फैसलों को सर्जिकल स्ट्राईक की तरह जनता पर फेंका गया। सर्जिकल स्ट्राईक आमतौर पर दुश्मन देश पर होती है, लेकिन यहां अपने ही लोगों पर ऐसा हमला बोला गया कि लोग हक्का-बक्का रह गए। पहला हमला नोटबंदी का था जिसमें देश के करोड़ों लोगों ने अपने कई हफ्तों या महीनों का रोजगार खोया, सुख-चैन खोया, सैकड़ों लोगों ने अपनी जान गंवा दी, और लाखों-करोड़ों लोग बिना इलाज रह गए, या दूसरे किस्म की दिक्कतें झेलीं। नोटबंदी को राष्ट्रभक्ति से जोड़ दिया गया, राष्ट्रवाद से जोड़ दिया गया, और लोगों को यह समझाया गया कि जब सरहद पर सैनिक महीनों खड़े रहते हैं तो लोग कुछ घंटों के लिए या कुछ दिनों के लिए एटीएम पर क्यों नहीं खड़े रह सकते?
आज जब देश के सामने यह साबित हो गया है कि नोटबंदी से धेले भर का फायदा नहीं हुआ, बल्कि सरकार का अघोषित खर्च कितना हुआ इसका ठिकाना नहीं है, तब यह समझ नहीं पड़ता कि अपने ही लोगों के ऊपर ऐसी सर्जिकल स्ट्राईक क्यों की गई, और उसकी क्या योजना थी? ठीक इसी तरह पिछली यूपीए सरकार के बनाए हुए जीएसटी को मोदी सरकार ने संसद में इस अंदाज में पेश किया कि यह आजादी की घोषणा के टक्कर का मौका है, और संसद में आधी रात को उसी तरह का आयोजन किया जिस तरह देश को आजादी मिली थी। आज हकीकत यह है कि देश के किसी भी कारोबारी या किसी भी स्वरोजगारी से पूछें, तो जीएसटी किसी तरह की आजादी नहीं, हर किस्म की गुलामी दिख रही है, और लोग यह नहीं समझ पा रहे हैं कि बिना किसी तैयारी के, बिना सोचे-विचारे, बिना कम्प्यूटर और सॉफ्टवेयर तैयार हुए, बिना सरकारी विभागों की तैयारी के, देश को ऐसी अनोखी आजादी का सर्जिकल स्ट्राईक क्यों दिया गया?
आज इन दोनों बातों की चर्चा इसलिए जरूरी है कि केन्द्र सरकार या किसी प्रदेश की सरकार इस तरह का कोई और सर्जिकल स्ट्राईक जनता पर न कर बैठे। लोकतंत्र एक निर्वाचित सरकार को ऐसा हक तो देता है, लेकिन इंसानों को ऐसे हमले झेलने की ताकत बिल्कुल नहीं देता। देश की जनता बहुत बुरी तरह ठगी हुई, टूटी हुई, और लुटी हुई है, और किसी भी सरकार को ऐसा अगला कोई प्रायोगिक सर्जिकल स्ट्राईक बिल्कुल नहीं सोचना चाहिए। (Daily Chhattisgarh)
- सुनील कुमार
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