झूठे-बेशर्म ट्रम्प के मुंह पर मेलोनी ने ठीक मारा सैंडल

 21 जून 2026  

 

कुछ महीने पहले तक इटली की प्रधानमंत्री जिऑर्जिया मेलोनी को योरप में डॉनल्ड ट्रम्प के सबसे करीबी सहयोगियों में गिना जाता था, लेकिन अभी इन दोनों के बीच जो बयानबाजी चल रही है, वह ट्रम्प की कमीनगी और बदचलनी दोनों का एक नया सुबूत पेश करती है। अभी-अभी फ्रांस में हुए जी-7 शिखर सम्मेलन के बाद ट्रम्प ने एक इंटरव्यू में, और सोशल मीडिया पर दावा किया कि मेलोनी ने उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए मिन्नतें कीं, भीख मांगीं। उन्होंने कहा कि मेलोनी अपनी घरेलू लोकप्रियता बढ़ाने के लिए उनके साथ तस्वीर चाहती थीं, और यह भी कहा कि अब वह फिर से उनसे दोस्ती करना चाहती हैं। इस पर मेलोनी ने एक वीडियो जारी करके कहा कि ट्रम्प की बात पूरी तरह गढ़ी हुई है। उन्होंने कहा कि न तो मैं, न ही इटली कभी किसी से भीख मांगते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि ट्रम्प अपने पुराने सहयोगियों के प्रति ऐसा व्यवहार क्यों करते हैं, जबकि पश्चिम के विरोधियों के प्रति वे अधिक नरमी दिखाते हैं। इस कड़वी बयानबाजी के पहले दौर के बाद ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर फिर दोहराया कि मेलोनी ने उनसे कई बार साथ में फोटो खिंचाने की मांग की थी। यह मामला इतना बढ़ गया कि इटली के विदेश मंत्री ने इसके तुरंत बाद होने वाली अमरीका की अपनी घोषित यात्रा रद्द कर दी। पीएम मेलोनी ने और भी कड़ा जवाब पोस्ट किया, और कहा कि ट्रम्प की मेरी लोकप्रियता की फिक्र छोडक़र अपनी लोकप्रियता की फिक्र करनी चाहिए। 

यह बात हैरान करती है कि ईरान युद्ध को लेकर अमरीका का फौजी साथ न देने वाले देशों के साथ बदसलूकी करने में ट्रम्प किस हद तक जा सकता है। एक महिला प्रधानमंत्री के बारे में झूठी और गढ़ी हुई बातें फैलाने में ट्रम्प को कोई परहेज नहीं है, और उसकी आदतन झूठ बोलने की आदत सब भारत-पाकिस्तान के बारे में देख चुके हैं, कि वह किस तरह 60-70 बार इन दो देशों के बीच जंग रूकवाने की बात कह चुका है। लोगों ने यह भी देखा है कि किस तरह वह शायद 38 बार ईरान के साथ जंग खत्म हो जाने की घोषणा कर चुका है। अंतरराष्ट्रीय संबंधों का विश्व इतिहास बताता है कि ट्रम्प ने सदियों से चले आ रहे कूटनीतिक शिष्टाचार को कूड़े के ढेर में फेंक दिया है, और वह अपनी सनक से, पसंद और नापसंद से, और इनसे भी ऊपर अपनी नफरत से यह तय करने लगा है कि उस दिन कौन सा देश उसका दोस्त होगा, और कौन सा देश उसका दुश्मन। वह अचानक पुतिन का हमदर्द हो गया, और दशकों पुराने अपने नाटो सहयोगियों का दुश्मन। अस्थिर पारे जैसा उसका यह मिजाज दुनिया ने कभी देखा नहीं था, तानाशाहों में भी मिजाज कुछ हद तक तो टिकाऊ रहता था, लेकिन ट्रम्प ने अपने कारोबारी हितों, और अपने अहंकार के लिए रिश्तों को पूरी तरह बिकाऊ करके रख दिया है। 

आज पूरी दुनिया पर फौजी और आर्थिक मनमानी लागने की बेतहाशा तानाशाह ताकत के चलते हुए दुनिया ट्रम्प को झेल रही है, लेकिन मित्रदेशों पर कब्जे की, फौजी कब्जे की उसकी धमकियों के चलते कनाडा, योरप, और नाटो उससे दूर होते चले गए हैं। दुनिया के इतिहास में अब तक इजराइल सबसे अछूत देश रहते आया है, लेकिन अमरीका ने एक किस्म से उसे भी पीछे छोड़ दिया है, और आज ईरान पर ट्रम्प के हमले के बीच परंपरागत रूप से अमरीका के दोस्त देशों ने भी, एक-एक कर हर किसी ने साथ देने के लिए ट्रम्प को मना कर दिया। अमरीकी की इतनी बेइज्जती ढाई सौ बरस के उसके इतिहास में सारे राष्ट्रपतियों की गलतियों, और गलत कामों ने मिलकर भी नहीं करवाई होगी जो कि ट्रम्प अपने इस कार्यकाल के एक तिहाई हिस्से में करवा चुका है। देश के भीतर भी उसकी पार्टी के बेबस बंधुआ मजदूरों सरीखे सांसदों को छोड़ दें, तो देश के बहुत सारे नामी-गिरामी कलाकारों ने आजादी के ढाई सौ बरस के जलसे में ट्रम्प के न्यौते पर गाने-बजाने से मना कर दिया। राजनीतिक चेतना से संपन्न लोग इतने कमीने इंसान के साथ किसी मंच पर आने से अब मना कर रहे हैं! यह नौबत अमरीका के इतिहास में इसके पहले कभी नहीं आई थी। 

अमरीका की जनता ने जिस घटिया इंसान को अपना राष्ट्रपति चुना है, उसे तो अपनी पसंद के दाम चुकाने ही होंगे, लेकिन आज पूरी दुनिया इस तानाशाह की सनक की कीमत चुका रही है। आज अगर हिन्दुस्तान के पेट्रोप पम्पों पर अधिक दाम चुकाते हुए गरीब लोगों का खून सूख जाता है, तो उसकी कुछ हद तक जिम्मेदारी इस ट्रम्प की भी है, जिसके लिए हिन्दुस्तानी हवन करते थक नहीं रहे थे! जब किसी एक आदमी के हाथ में ऐसी असीमित, और बिना जवाबदेही की ताकत जुट जाती है, तो उसका नतीजा इतना खराब हो सकता है, यह अमरीका और बाकी दुनिया पहली बार भुगत रहे हैं। अपने घटिया कामों की, अपने पारिवारिक कारोबार को लेकर भ्रष्टाचार की मिसालों की जैसी लंबी फेहरिस्त ट्रम्प अब तक बना चुका है, उतनी लंबी तो उसकी घुटने छूती लाल टाई भी नहीं है। एक दिन ऐसा आएगा जब यह सत्ता पर नहीं रहेगा, और आने वाली कोई दूसरी अमरीकी सरकार इसके जुर्म की जांच करवाएगी, तो यह दुनिया के सामने आएगा कि अपने आपको एक बहुत बड़ा लोकतंत्र कहने वाला अमरीका किस तरह तानाशाही की संभावनाओं वाला देश भी है। 

एक बार फिर इतालवी प्रधानमंत्री जिऑर्जिया मेलोनी की बात पर लौटें, तो यह बात अच्छी लगती है कि उसी पश्चिमी दुनिया में, उसी नाटो के तहत रहते हुए मेलोनी ने ट्रम्प की झूठी बकवास का जवाब देने का इतना हौसला है। ऐसा नहीं है कि इटली के आर्थिक और फौजी हित अमरीका के साथ जुड़े हुए न हो, लेकिन किसी अंतरराष्ट्रीय सहयोगी को नीचा दिखाने के लिए, और अपने आपको ऊंचा और मशहूर साबित करने के लिए महत्वोन्मादी ट्रम्प की हरकत पर मेलोनी ने एकदम सही जवाब दिया है। दो स्वतंत्र देशों को एक-दूसरे के साथ परस्पर सम्मान के संबंध रखने चाहिए, ऐसा नहीं होना चाहिए कि एक देश लगातार दूसरे देश को लतियाता रहे, और वह दूसरा देश गुलाम की तरह पैरों पर पड़ा रहे। ट्रम्प की गुंडागर्दी, और उसकी बकवास का जवाब देने वाले नाटो के भीतर ही अब आधा-एक दर्जन देश हो चले हैं। उसको उसकी औकात समझ आ गई है, और इसीलिए उसने ईरान के पैरों पर गिरकर किसी तरह इज्जत बचाने वाला यह समझौता किया है। ऐसा लगता है कि अपनी मदद के मोहताज पाकिस्तान का भरपूर इस्तेमाल ट्रम्प ने ईरानी मोर्चे की शर्म से उबरने के लिए किया है, और जिस कीमत पर यह समझौता हुआ है, उसे देखकर अमरीका में ट्रम्प की पार्टी के नेता भी हैरान हैं। लेकिन इस आदमी की शोहरत की हसरत इस हिंसक हद तक इस पर हावी है कि ऐसी मुसीबत के बीच भी वह मधुमक्खी के छत्ते में हाथ घुसाने की तरह मेलोनी को लेकर एक झूठी बकवास कर रहा है, और जूता खा रहा है। अंतरराष्ट्रीय संबंध और कूटनीति का ऐसा दीवाला पहले कभी नहीं निकला था, और ट्रम्प कोई विरासत छोडक़र जाने वाला नहीं है, अपनी मिसालों से नसीहतें ही छोडक़र जाने वाला है कि दुनिया के नेता को क्या-क्या नहीं करना चाहिए।

(Daily Chhattisgarh)   

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें