बिजली कंपनी की दिखाई राह पूरे देश में सोचने की जरूरत

संपादकीय
26 मई 2018


दिल्ली में एक निजी कंपनी बिजली सप्लाई करती है। उसने ग्राहकों के सामने यह प्रस्ताव रखा है कि वे अपने पुराने एसी देकर नए एसी आधे दाम पर ले सकते हैं। पहली नजर में खबर अटपटी लगती है, लेकिन है सही। ऐसा लगता है कि बिजली बेचने वाली कंपनी की दिलचस्पी अधिक बिजली बेचने में होनी चाहिए जो कि पुराने एयरकंडीशनरों के चलते हुए अधिक आसान है। नए एयरकंडीशनर ऊंची ग्रीन-रेटिंग वाले आते हैं, जो कि बिजली कम खाते हैं। वे महंगे जरूर रहते हैं, लेकिन कुछ बरसों में अपना दाम चुका देते हैं। ऐसे में अगर एसी बनाने वाली कंपनियों के साथ मिलकर बिजली सप्लाई कंपनी ग्राहकों को कम खपत वाले उपकरणों की तरफ ले जाने की कोशिश कर रही है तो यह एक दिलचस्प बात है। कुछ राज्यों की सरकारें पहले भी ऐसा करते आई हैं कि वे बल्ब, ट्यूबलाईट, और पंखे कम दामों पर ग्राहकों को देकर पुराने अधिक खपत वाले सामान हटवा रही हैं। 
अब बाजार और सरकार, इन दोनों को मिलकर भी ऐसी पहल करनी चाहिए कि लोग अधिक खपत के बल्ब-पंखे, फ्रिज-एसी बदलने की सोच सकें। इससे दो किस्म के फायदे हो सकते हैं। पहला फायदा तो देश की अर्थव्यवस्था को हो सकता है कि कंपनियों को सामान बनाने का एक नया मौका मिलेगा, और बाजार को बढ़ावा मिलेगा। दूसरा फायदा इससे बिजली ग्राहकों को होगा जो कि कम खपत के सामान पाएंगे, बिजली बिल बचाएंगे। और तीसरा फायदा देश का और धरती का होगा कि इससे बिजलीघरों पर बोझ घटेगा, या जहां अंधेरा छाया है वहां के लिए बिजली बच सकेगी, और कोयले का प्रदूषण भी बच सकेगा। बिजली की खपत घटने के साथ ही देश में कार्बन उत्सर्जन घटता है, और उससे पूरी धरती का फायदा होता है। 
आज जब लोगों को नए उपकरण खरीदना भारी पड़ता है, तब सरकार और बाजार को दखल देकर ऐसा अनुदान या ऐसी रियायत या ऐसा कर्ज देना चाहिए जिससे ग्राहकों का उत्साह बढ़े। संपन्न तबके के बहुत से लोग फैशन के तहत भी नए-नए सामान ले लेते हैं, और इस बहाने भी उनके घर के एसी या फ्रिज बदल जाते हैं, और बिजली की खपत कम से कम उन कुछ उपकरणों पर तो घटती ही है। इसे बड़े पैमाने पर फैलाने की जरूरत है क्योंकि भारत की अधिकतर आबादी आज ऐसी आर्थिक स्थिति में नहीं है कि वह अपने पुराने उपकरण बदलने का खर्च कर सके, बल्कि हकीकत तो यह है कि लोग अभी तक बाजार में पुराने उपकरणों को खरीदते घूमते रहते हैं। जिस तरह प्रदूषण को कम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक ने दखल देकर भारत के बड़े शहरों से पुरानी गाडिय़ों को हटाने का एक रास्ता दिल्ली की मिसाल से बनाया है, और जिसे छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर जैसे शहर में भी लागू किया जा रहा है, उसी तरह बिजली की खपत को कम करने का काम भी हो सकता है। 
दरअसल भारत में पुराने उपकरणों की मरम्मत करने वाले लोग बहुत हैं, और यहां की जुगाड़-तकनीक पूरी दुनिया में मशहूर है कि किस तरह एक मैकेनिक सामान जुटा-जुटाकर किसी भी मशीन या उपकरण की जिंदगी बहुत लंबी खींच देते हैं। ऐसे में लोग नए सामानों की तरफ बढऩे का नहीं सोचते जो कि कम बिजली खाते हैं, या कम ईंधन खाते हैं। ऐसे में धरती को बचाने के लिए, प्रदूषण से लोगों को बचाने के लिए कम खपत की ओर बढऩा जरूरी है। आज लोगों ने अपनी जो जरूरतें बना ली हैं, वे जरूरतें तो किसी गांधीवादी अंदाज में कम हो नहीं सकतीं। यही हो सकता है कि उन जरूरतों पर बिजली-ईंधन का खर्च कम हो, और नई टेक्नालॉजी ने यह मुमकिन भी कर दिया है। 
दिल्ली में बिजली कंपनी की यह पहल अच्छी है, और इसे सरकार को बड़े पैमाने पर ले जाना चाहिए, इससे देश में छाई हुई आर्थिक मंदी भी कुछ हद तक दूर हो सकती है, और सरकार नई तकनीक से बने सामानों पर या तो कुछ टैक्स-रियायत दे सकती है, या फिर ब्याज में छूट दे सकती है, ताकि ग्राहकों से लेकर देश और धरती तक सबका दीर्घकालीन भला हो सके। इसे एक पर्यावरणशास्त्री, एक अर्थशास्त्री, और एक गृहिणी, इन सबके नजरिए से देखने की जरूरत है, और यह सबके भले का एक काम हो सकता है। (Daily Chhattisgarh)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें