राज्य में शरारती धार्मिक तनाव, तेज रफ्तार तकनीक के खतरे, जुर्म से सावधानी की जरूरत

07 मार्च 2014
संपादकीय

छत्तीसगढ़ के दुर्ग शहर में पिछले दो-तीन दिनों से एक धार्मिक तनाव फैला हुआ है। एक मुस्लिम युवक कांग्रेसी नेता के फेसबुक पेज पर हिन्दू देवी-देवताओं के खिलाफ बहुत ही अश्लील और गंदी बातें लिखी हुई मिलीं, और इसके खिलाफ कुछ हिन्दू संगठन पुलिस में गए, सड़कों पर उतरे, और पुलिस ने बड़ी मुश्किल से इस तनाव को सम्हाला। छत्तीसगढ़ मोटे तौर पर साम्प्रदायिकता से दूर रहने वाला राज्य है, और यहां पर किन्हीं भी दो धर्मों के लोगों के बीच हिंसा का कोई मौका शायद ही कभी आता है। लोग मिलजुलकर रहते हैं और चुनावों में भी धर्म कोई मुद्दा नहीं बन पाता। ऐसे में दुर्ग की यह ताजा घटना बहुत फिक्र खड़ी कर दी है। पुलिस में की गई शिकायत के मुताबिक जिस फेसबुक पेज की बात हुई है, उसमें लिखी बताई गई गंदी बातों को छपवाकर, और मोबाइल फोन के मार्फत भी उन बातों को बांटा गया, और उससे भी तनाव भड़का। पुलिस अभी यह जांच कर ही रही है कि जिस कांग्रेसी नौजवान का यह पेज था, उस पर लिखी गई भड़काने वाली बातों को उसी ने पोस्ट किया था, या किसी हैकर ने उसके अकाउंट में सेंध लगाकर यह काम किया था। वह तो लंबी जांच का मामला है, लेकिन शिकायत और पहले सुबूत मिलते ही पुलिस ने  इस नौजवान को गिरफ्तार करके हालात को काबू में करने का काम किया। इसके बाद भी कल दुर्ग में जो तनाव हुआ, वह और कई गुना अधिक हो सकता था, लेकिन प्रशासन और पुलिस ने कामयाबी से इसे हिंसक नहीं होने दिया। 
अभी जांच के पहले हम फेसबुक पर पोस्ट की गई इन गंदी, भड़काऊ, और साम्प्रदायिक तनाव खड़ा करने वाली बातों के मुजरिम को तय नहीं कर रहे, लेकिन यह बात तय है कि आज के वक्त में कम्प्यूटर, संचार साधनों, और सोशल मीडिया का संगम ऐसे जानलेवा भंवर से भरा हुआ है कि उसमें कोई भी चपेट में आ सकते हैं। इस बात को हम यहां पर कुछ खुलासे से इसलिए लिख रहे हैं क्योंकि लोग सावधान रहें, और कल न तो खुद ऐसा काम करें, और न ही अपने साधनों का ऐसा बेजा इस्तेमाल होने दें जिसकी वजह से उन्हें बरसों की जेल भी हो सकती है। आज लोग लापरवाही से अपने इंटरनेट कनेक्शन को, वाई-फाई को, खुला छोड़ देते हैं, अपने कम्प्यूटर खुले छोड़ देते हैं, ई-मेल बॉक्स, फेसबुक और ट्विटर जैसे खाते खुले छोड़ देते हैं। मोबाइल फोन पर ये तमाम अकाउंट तो खुले रहते ही हैं, उनके अलावा एसएमएस और वॉट्सएप जैसे तरीकों से भी किसी के फोन से कोई गलत बात फैलाई जा सकती है। ऐसे में कहीं कोई धमकी भेज दे, कहीं कोई अश्लील बात पोस्ट कर दे, या जैसा कि दुर्ग के मामले में हुआ है, साम्प्रदायिक और गंदी बातें इंटरनेट पर डाल दे। ऐसे में लोगों को खुद भी ऐसे जुर्म से बचना चाहिए, और अपने साधन-सुविधा का गलत इस्तेमाल करने का मौका भी किसी को नहीं देना चाहिए। जो लोग यह मानते हैं कि उनके फोन हमेशा उनके पास रहेंगे, उनको भी यह देखना चाहिए कि रोज हिन्दुस्तान में दसियों हजार फोन गुम जाते हैं, या चोरी हो जाते हैं।  उनको यह भी देखना चाहिए कि उनके वाई-फाई कनेक्शन से कौन-कौन इंटरनेट पर पहुंचते हैं, कौन-कौन लोग उनके पासवर्ड जानते हैं, और किसी जुर्म के हो जाने पर सजा की जिम्मेदारी किस पर आती है। जिन लोगों को भारत का नया आईटी कानून नहीं मालूम है, और जांच एजेंसियों के हाथ आसानी से लगने वाले कम्प्यूटर-इंटरनेट-फोन के सुबूत का अंदाज नहीं है, उनको इन बातों को समझना चाहिए। 
दूसरी तरफ हम इस ताजा मामले को लेकर एक बार फिर छत्तीसगढ़ की तारीफ करना चाहते हैं कि एक धार्मिक तनाव को प्रशासन और पुलिस ने साम्प्रदायिक हिंसा बनने से रोका, लोग खुद भी हिंसक नहीं हुए, दोनों समुदायों के लोगों ने शुरुआती तनाव के बाद, और उसके बावजूद, समझदारी दिखाई, और एक अधिक बड़े खतरे से, शर्मिंदगी से यह प्रदेश बचा है। हमने उन बातों को देखा है जो कि हिन्दू देवी-देवताओं के खिलाफ पोस्ट की गई हैं, वे किसी भी तरह बर्दाश्त के लायक नहीं हैं, और उन पर कानून के तहत तय की गई सबसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए। और पुलिस के लिए कुसूरवार तक पहुंचना बहुत मुश्किल भी नहीं होगा, यह काम तेजी से होना चाहिए, और सजा बाकी तमाम लापरवाह, या मुजरिमों के लिए एक सबक बनकर सामने आना चाहिए। छत्तीसगढ़ में सभी तबकों को इसे एक जुर्म मानकर, मुजरिम की सजा की राह देखनी चाहिए, और सड़कों पर अब तनाव को अधिक बढ़ाकर कुछ भी हासिल नहीं होगा। 

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