28 मार्च 2014
संपादकीय
उत्तरप्रदेश के एक मुस्लिम कांग्रेस उम्मीदवार ने भाजपा के प्रधानमंत्री पद प्रत्याशी नरेन्द्र मोदी को लेकर भाषण दिया कि वे उनकी बोटी-बोटी कर देंगे। इसे लेकर इंटरनेट पर उनके भाषण का वीडियो तैर रहा है, और मोदी समर्थकों को तो एक मुद्दा मिला ही है, लेकिन देश भर के मोदी विरोधियों का भी यह रूख सामने आ रहा है कि ऐसी हिंसक और साम्प्रदायिक बात कहने वाले कांग्रेस उम्मीदवार को हटाने का काम कांग्रेस को बिना देर किए करना चाहिए। लोग यह भी याद कर रहे हैं कि किस तरह मुस्लिम समुदाय के लोगों की तरफ इशारा करते हुए जब भाजपा के एक नौजवान और बड़े बना दिए गए नेता वरूण गांधी ने हाथ काट देने की बात कही थी, तो उन्हें पार्टी के कुछ पदों से कुछ समय के लिए कैसे हटा दिया गया था। चुनावी राजनीति में भाषण देते समय बहक जाने की बातें कई बार होती हैं, लेकिन हमारा यह मानना है कि लोगों को उनकी कीमत भी चुकाने पर मजबूर करना चाहिए। कांग्रेस पार्टी अगर अपने ऐसे हिंसक और बेदिमाग उम्मीदवार को हटाती नहीं है, तो देश की हर सीट पर इस वीडियो का उसके खिलाफ इस्तेमाल होगा, और उसे नाजायज भी नहीं कहा जा सकेगा।
लोगों को याद होगा कि कुछ अरसा पहले हैदराबाद में एक भाषण देते हुए एक मुस्लिम पार्टी के एक आक्रामक और विवादास्पद सांसद ने बहुत किस्म की हिंसक बातें कही थीं, और उनको लेकर उसके खिलाफ शायद राजद्रोह का मुकदमा भी दर्ज हुआ था, और देश में हिन्दू-मुस्लिम राजनीति करने वाले लोगों को उससे एक बड़ा मुद्दा मिला था। आज अगर भारत में कोई बेदिमाग राजनेता इस नाजुक पहलू को समझता नहीं है कि एक हिन्दू को मुस्लिम के खिलाफ, या एक मुस्लिम को हिन्दू के खिलाफ कैसी हिंसक बातें नहीं करनी चाहिए, तो ऐसे लोगों का सार्वजनिक जीवन में कोई काम नहीं होना चाहिए। हिंसक बातें तो किसी एक बिरादरी के भीतर भी नहीं होनी चाहिए, और इसके लिए चुनाव आयोग से लेकर अदालत तक सबके हाथ एक ताकत है कि ऐसे लोगों पर कार्रवाई करे। लेकिन हमारा यह मानना है कि इसके पहले ऐसे नेताओं की पार्टी को खुद कार्रवाई करनी चाहिए, खुद अपनी भलाई के लिए कार्रवाई करनी चाहिए। ऐसा न करने पर उनको न सिर्फ आज चारों तरफ नुकसान झेलना होगा, बल्कि लंबे समय तक ऐसी मिसालें उन पार्टियों के खिलाफ काम आती हैं।
देश में आज राजनीतिक तनातनी का जो माहौल है, उसको देखते हुए ऐसे बयान देने वालों के खिलाफ कानून के तहत जो सबसे कड़ी कार्रवाई हो सकती है, वह स्थानीय प्रशासन को करनी चाहिए, और अगर शासन-प्रशासन अपना जिम्मा पूरा नहीं करते, तो अदालतों को दखल देना ही चाहिए। आज शासन-प्रशासन राजनीति में हिस्सेदार बनकर काम करने लगे हैं, और लोकतंत्र में जब कोई एक स्तंभ अपना जिम्मा पूरा नहीं करे, तो उसके लिए दूसरे स्तंभ को हक दिए गए हैं।
कांग्रेस पार्टी के नेता, उसके उम्मीदवार, उसके प्रवक्ता अगर साम्प्रदायिक और हिंसक बातें करते हैं, तो फिर वे दूसरी पार्टी पर साम्प्रदायिकता और हिंसा भड़काने की तोहमत लगाने का हक खो बैठते हैं। कांग्रेस को अपने घर को सम्हालना चाहिए, ऐसा उसके दुबारा सत्ता में आने के लिए जरूरी हो ऐसी भी बात नहीं है, उसके विपक्ष में बैठने पर भी उसके पास बोलने के लिए मुंह बचा रहे, इसके लिए भी जरूरी है कि अपनी पार्टी के ऐसे बड़बोले मुंह बंद करवाना वह सीखे। देश में आज हिंसा की बात करने वालों कोई जगह नहीं हो सकती, और वीडियो सुबूतों को देखकर तुरंत कड़ी कार्रवाई की जरूरत है, और इस मामले में हमको लगता है कि बकवास करने वाले इस हिंसक कांग्रेसी उम्मीदवार को तुरंत जेल भेजना चाहिए। उसके बाद अगर कांग्रेस पार्टी जिद पर आमादा रहती है, तो वह जेल से भी अपने उम्मीदवार को चुनावी मैदान में बनाए रख सकती है, और पूरे देश में उसका नुकसान झेल सकती है।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें