कुछ करने के पहले याद रखें, ऊपरवाला सब देख रहा है..

संपादकीय
23 फरवरी 2018


दिल्ली में इस वक्त मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के निवास पर पुलिस कार्रवाई चल रही है, और पुलिस वहां से सीसीटीवी कैमरे और उनकी रिकॉर्डिंग लेकर जा रही है क्योंकि राज्य के मुख्य सचिव ने यह रिपोर्ट लिखाई है कि मुख्यमंत्री निवास पर हुई बैठक में आधी रात उन पर सत्तारूढ़ विधायकों ने हमला किया, और उन्हें पीटा। पुलिस ने आज की इस जब्ती के बाद मीडिया से कहा है कि मुख्य सचिव की शिकायत के बाद मुख्यमंत्री निवास से यह रिकॉर्डिंग मांगी गई थी, लेकिन कोई जवाब न मिलने पर पुलिस ने आज सुबूत जुटाने के लिए यह कार्रवाई की। यहां यह जिक्र जरूरी है कि दिल्ली की पुलिस राज्य के मातहत नहीं होती, और वह केन्द्र सरकार के नियंत्रण में काम करती है, वरना किसी राज्य की पुलिस अपने ही मुख्यमंत्री के खिलाफ शायद किसी भी हालत में ऐसी कार्रवाई न करती। 
दिल्ली के मुख्य सचिव की शिकायत सामने आने के बाद राज्य की सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने इन आरोपों का खंडन किया था, और कहा था कि जनहित के मुद्दों पर विधायक महज बात करना चाहते थे, और मुख्य सचिव अपने को लेफ्टिनेंट गवर्नर के प्रति ही जवाबदेह बताते हुए वहां से जा रहे थे, उसी वक्त बहस हुई थी। पार्टी ने किसी मारपीट से इंकार किया है। और अब जब रिकॉर्डिंग जब्त की जा चुकी है, तो उम्मीद की जानी चाहिए कि इन दोनों पक्षों में से जिसकी बात झूठ होगी, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। जांच के नतीजे सामने आने के पहले किसी एक को कुसूरवार मानना ठीक इसलिए नहीं होगा कि अब तक सारी शिकायत दो पक्षों के एक-दूसरे के खिलाफ बयान तक सीमित है, और मुख्य सचिव की अगले दिन की गई शिकायत को लोग कुछ अटपटा भी मान रहे हैं कि अगर आधी रात उनसे मारपीट हुई थी, तो उन्होंने इसके बारे में कोई भी कार्रवाई अगले दिन क्यों की? 
खैर, हम इस मामले की सच्चाई को लेकर अटकल लगाए बिना एक दूसरे पहलू पर लिखना चाहते हैं। आज का वक्त मोबाइल फोन के कैमरों की रिकॉर्डिंग से लेकर सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग तक बहुत से सुबूत जुटाने का है। टेक्नालॉजी ने हर किसी के लिए यह आसान कर दिया है कि वे कई तरह के सुबूत खुद रिकॉर्ड कर लें,अ और सार्वजनिक या महत्वपूर्ण जगहों पर अब बिना कोशिश के वहां के कैमरे सब कुछ रिकॉर्ड करते चलते हैं। ऐसे में अब देश के सभी लोगों को यह समझ लेना चाहिए कि अपनी हरकतों को ठीक रखना ही एक तरीका है जिससे वे महफूज रह सकते हैं। फोन पर किसी से बात करना, किसी जगह रूबरू बात करना, फोन पर संदेश भेजना, सोशल मीडिया में कुछ पोस्ट करना, सब कुछ आत्मघाती हो सकता है, अगर उसमें कोई बात गैरकानूनी है, या कि अनैतिक है। अब समय लोगों के भरोसे का नहीं रह गया है। अगर दिल्ली के मुख्य सचिव की शिकायत सही है, तो भला किसने यह सोचा था कि मुख्यमंत्री के सामने उसके विधायक राज्य के मुख्य सचिव को पीट सकते हैं? और अगर यह शिकायत झूठी है, तो भला किसने यह सोचा था कि किसी मुख्यमंत्री के खिलाफ उसका मुख्य सचिव इस तरह की झूठी तोहमत लगा सकता है? और अब बात महज गवाही, और सुबूत पर जाकर टिक गई है। इसलिए ऐसी नौबत को ध्यान में रखते हुए लोगों को यह समझ लेना चाहिए कि ऊपरवाला सब देखता है, और यह ऊपरवाला कोई ईश्वर नहीं है, सीसीटीवी कैमरा है। 
आज न सिर्फ हिन्दुस्तान में, बल्कि बाकी दुनिया में भी हर कहीं बड़े-बड़े जुर्म ऐसी रिकॉर्डिंग से पकड़ में आ रहे हैं, और मुजरिमों को सजा हो रही है। अब पुलिस और दूसरी जांच एजेंसियों को सुबूत अधिक आसानी से जुट जाते हैं, और वे अदालत में महज गवाहों के मुकाबले अधिक मजबूती से खड़े भी रहते हैं। ऐसे में यह मामला बड़ा दिलचस्प होगा जिसमें दिल्ली के दो सबसे ताकतवर लोगों में से कोई एक झूठा साबित होने जा रहा है, और कोई एक सजा पाने जा रहा है। हम अपने किसी अंदाज के बिना दिलचस्पी के साथ इस बहुत ही कड़वी और अटपटी वारदात के नतीजे के इंतजार कर रहे हैं। (Daily Chhattisgarh)

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