महिला को नर्क का द्वार बताने वाले वकील के बाबा महिलाओं से ही...

संपादकीय
6 फरवरी 2018


दिल्ली हाईकोर्ट में कल एक ऐसे आध्यात्मिक गुरू के मामले की सुनवाई चल रही थी जिस पर दर्जनों या सैकड़ों लड़कियों और महिलाओं से बलात्कार के आरोप हैं। बीरेन्द्र देव दीक्षित नाम का यह स्वघोषित गुरू एक आध्यात्मिक विश्वविद्यालय चलाता था, और उसमें महिलाओं को सेक्स-गुलामों की तरह कैद करके रखने की भयानक कहानियां सामने आ रही हैं। और यह सब दिल्ली के सबसे आधुनिक इलाके में हो रहा था। ऐसे गुरू के वकील ने कल दिल्ली हाईकोर्ट की महिला जज के सामने मामले की बहस के दौरान नारी को नर्क का द्वार कहा तो उसे अदालत की फटकार लगी।
अब सवाल यह है कि एक आध्यात्मिक गुरू का नाम और चोगा ओढ़कर एक आदमी धर्म-आध्यात्म के नाम पर हरम सा चला रहा था, और अनगिनत लड़कियों और महिलाओं को सेक्स-गुलामों की तरह रखकर उनके साथ बलात्कार करता था, तो आज उसका वकील भला महिला जज के सामने नारी को नर्क का द्वार कहने से क्यों हिचकेगा? लोगों को याद होगा कि इसी किस्म का एक दूसरा बलात्कारी बाबा, राम रहीम पिछले दिनों जब अदालत में सजा पाकर जेल जा रहा था, तो उसका सूटकेस उठाकर सरकारी वकील साथ चल रहा था। अब एक दूसरे बलात्कारी बाबा का वकील उसकी तरफ से महिला को नर्क का द्वार बता रहा है। अगर महिला नर्क का द्वार है तो बाबा लोग ऐसे द्वार से आवाजाही करने को मरे क्यों पड़े रहते हैं? उधर एक भक्त की नाबालिग बेटी के साथ बलात्कार के आरोप में आसाराम अब तक जेल में है, और दूसरी ओर राम रहीम सजा पा चुका है, तो ऐसे बाबा लोगों की हकीकत का भांडाफोड़ देश के लोगों के भले के लिए जरूरी है।
देश में कुछ और भी सम्प्रदाय हैं जिनमें महिलाओं की जगह नहीं है। गुजरात में सबसे विख्यात स्वामीनारायण सम्प्रदाय में उनके प्रमुख स्वामी के सामने किसी महिला के पडऩे पर भी रोक है, और भारी आलोचना के बावजूद इस सम्प्रदाय ने महिलाओं को जगह नहीं दी। दूसरी तरफ देश भर के धर्मस्थानों में यह नोटिस टंगा रहता है कि अपनी माहवारी के दौरान महिलाएं वहां न आएं। जो ईश्वर को मानते हैं उन आस्थावानों के लिए महिला को भी ईश्वर ने बनाया है, और जो लोग ईश्वर को नहीं मानते हैं उन नास्तिकों के लिए भी महिला को कुदरत ने बनाया है। महिला की माहवारी से इंसान की अगली पीढ़ी का जन्म लेना जुड़ा है, और धरती पर जिंदगी के आगे बढऩे के लिए  महिला के शरीर की यह स्वाभाविक प्रक्रिया है। ऐसे में उसके प्रति धर्म, आध्यात्म, बाबा-गुरू, और उनके वकीलों का यह नजरिया धिक्कार के लायक है कि उनका देह तो सेक्स-शोषण के लायक है, लेकिन वे खुद नर्क का द्वार हैं, स्वामियों की नजरों में आने लायक नहीं है, ईश्वर के सामने जाने लायक नहीं है। और इसी ईश्वर के नाम पर दक्षिण भारत के मंदिरों में देवदासी नाम की प्रथा चलाकर उनसे देह का धंधा करवाने में धर्म को कोई दिक्कत नहीं थी। और जिस ईश्वर के मंदिर में इन देवदासियों को वेश्या बनाकर रखा जाता था/है, उस ईश्वर को भी इससे कोई दिक्कत नहीं थी।
हमारा ख्याल है कि दिल्ली हाईकोर्ट की महिला जज ने इस स्वघोषित आध्यात्मिक गुरू के वकील को जो फटकार लगाई है, वह नाकाफी है। अदालत के भीतर तर्क के रूप में भी ऐसी हिंसक बात कहने वाले वकील को अदालत और वकीलों के संगठन की ओर से इससे अधिक सजा दी जानी चाहिए, अब वह कैसे दी जा सकती है, यह तो कानून के जानकार लोग ही सोच पाएंगे। फिलहाल हमारा ख्याल है कि देश में इतने सारे बलात्कारी बाबा अब सामने आ चुके हैं कि अपनी मां-बहन और बेटी लेकर ऐसे लोगों के पास जाने वाले लोगों को सावधान हो जाना चाहिए, और इनके साये से भी अपने परिवार को दूर रखना चाहिए। जिन लोगों को ईश्वर पर आस्था है, उन्हें भी यह समझ लेना चाहिए कि ईश्वर अगर इतना ही सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान, और सर्वत्र मौजूद है, तो फिर उसे धर्मगुरूओं या आध्यात्मिक गुरूओं जैसी दुकानों की जरूरत क्यों होगी? आज जिस तरह मेल ऑर्डर से सामान सीधे घर पहुंचते हैं, ईश्वर भी अपनी प्रसन्नता या नाराजगी अपने भक्तों को सीधे घर भेज सकते थे, बिना किसी एजेंट या दलाल के। इसलिए धर्म के कारोबार में शराब तस्कर कोचिया लोगों की तरह के जो बाबा या गुरू हैं, उनसे प्लेग की तरह परहेज करना चाहिए। (Daily Chhattisgarh)

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