संपादकीय
15 नवम्बर 2017

बैरूत की एक दिलचस्प तस्वीर इंटरनेट पर मौजूद है जिसमें एक इमारत एक मीटर से भी कम चौड़ाई की बनी हुई है। इसे देखकर हैरानी हो सकती है कि एक दीवार से जरा ही ज्यादा चौड़ी यह इमारत ऐसी क्यों बनाई गई है? तो वहां के बाशिंदे बताते हैं कि इसके पीछे की जमीन और उस पर मकान एक भाई के हैं, और उसे नुकसान पहुंचाने के लिए, वहां से समंदर तक जाने वाली नजर रोकने के लिए दूसरे भाई ने यह इमारत बना दी। अब यह कहानी पिछली आधी सदी से चली आ रही है, और हो सकता है कि इसमें कुछ नमक-मिर्च भी लगी हुई हो, लेकिन बैरूत के रिकॉर्ड में इस बिल्डिंग को ग्रज बिल्डिंग कहा जाता है, और ग्रज का हिन्दी मतलब द्वेष या घृणा, बैरभाव होता है।
यह दुनिया में पहला मौका नहीं है जब एक भाई दूसरे को नुकसान पहुंचाने के लिए अपना खुद का नुकसान करने को तैयार हो जाता है। एक वक्त भारत में अंबानी भाईयों के बीच की खाई कुछ ऐसी ही गहरी और चौड़ी थी, जिसे बाद में कहा जाता है कि इनकी मां ने बीच-बचाव करके पाटा। लेकिन ऐसे कई ऐतिहासिक झगड़े चले आ रहे हैं जिनमें भाई दूसरे भाई के खून का प्यासा हो जाता है। भारत की अदालतों में ऐसे लाखों मामले चल रहे हैं जिनमें परिवार की दौलत के बंटवारे के लिए भाई-बहन या भाई-भाई एक-दूसरे के सामने खड़े हुए हैं। दूर क्यों जाएं, भारत और पाकिस्तान एक ही देश से टूटकर दो बने, और इन दोनों के बीच की कड़वाहट इतनी अधिक है कि खुद कंगाल हो जाएं, लेकिन दूसरे के खिलाफ फौजी तैयारियों में कोई कमी नहीं आनी चाहिए। कुछ इसी तरह का हाल भारत के राजनीतिक गठबंधनों का देखने मिलता है, जिसके दल जब अलग होते हैं तो एक-दूसरे के अव्वल दर्जे के दुश्मन हो जाते हैं।
कुल मिलाकर इस चर्चा का मकसद यह है कि वक्त रहते लोगों को हकों और जिम्मेदारियों का बंटवारा किस तरह कर देना चाहिए कि बाद में उसे लेकर अगली पीढ़ी के बीच नफरत और हिंसा की नौबत न आए। होता यह है कि जब भाईयों, या कि एक पीढ़ी के वारिसों के बीच झगड़ा होता है, तो उसकी आग में घी डालने के लिए लोग अपनी जेब से खर्च करके, बाजार जाकर घी लेकर आते हैं। चाहे परिवार हो, राजनीतिक दल हो, फर्म या कंपनी हो, या कि देशों का मामला हो, इसे अगर समझदारी से नहीं निपटाया गया, तो इनकी बड़ी सी ताकत एक-दूसरे के खिलाफ बर्बाद होती रहती है, और समंदर का नजारा रोकने के लिए दूसरे की जमीन के सामने अपने पैसे की बर्बादी करते दीवार जैसी पतली इमारत बना देते हैं।
हिन्दुस्तान में हम बहुत से परिवारों में झगड़े की एक जड़ यह भी देखते हैं कि बहुत लोगों को संयुक्त परिवार में गौरव प्राप्त होता है। वे सदस्यों के असंतोष की कीमत पर भी परिवार को एक छत के नीचे जोड़े रखना चाहते हैं, और ऐसे में लोगों के मन में सुलगती बेचैनी आगे चलकर तरह-तरह के झगड़े भी पैदा करती है। अधिक समझदारी की बात यह होती है कि परिवार के मुखिया वक्त रहते ही अगली पीढ़ी का अलग-अलग हिसाब कर जाएं, और देश की अदालतों पर मेहरबानी भी करें। (Daily Chhattisgarh)
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