फोन तो स्मार्ट हो गए इंसान स्मार्ट न बन पाए

संपादकीय
29 नवम्बर 2017


भारत सरकार ने मोबाइल फोन के ऐसे दर्जनों एप्लीकेशन पहचाने जिनसे चीन में रखे हुए कम्प्यूटर भारतीय लोगों की जानकारी को वहां दर्ज कर रहे हैं, और उनकी जासूसी कर रहे हैं। ऐसे एप्लीकेशन इस्तेमाल न करने की सलाह सरकार ने अपनी सुरक्षा एजेंसियों के कर्मचारियों को दी है, लेकिन आम जनता इससे बेफिक्र होकर लगातार स्मार्ट फोन पर टिकी हुई है, और उसकी सेहत पर ऐसी चेतावनियों का कोई असर नहीं पड़ता। यह बात सिर्फ कम भरोसेमंद एप्लीकेशनों की नहीं है, बल्कि गूगल के भी बहुत से फीचर ऐसे हैं जो कि लोगों की जासूसी करते हैं, उनकी जानकारी दर्ज करके रखते हैं। और ऐसे एप्लीकेशन हर कुछ हफ्तों में अपने में कुछ फेरबदल करते हैं, और उन्हें इस्तेमाल करने वालों से कई तरह की इजाजत मांगते हैं, और लोग बिना देखे-समझे अमूमन ऐसी इजाजत दे भी देते हैं।
लोग अगर अपने ही फोन को देखें कि गूगल किस तरह उनके किसी भी जगह आने-जाने की जानकारी दर्ज करके रखता है, तो वे अपनी जानकारी का इतना खुलासा देखकर हड़बड़ा जाएंगे कि वे जहां जाते हैं, वहां कितनी देर रूकते हैं, यह सारी जानकारी आने-जाने के नक्शे सहित दर्ज है, और उनका फोन चोरी करके भी कोई इस तमाम जानकारी को हासिल कर सकते हैं। लोगों के पास स्मार्ट फोन तो आ गए हैं, 4जी रफ्तार का इंटरनेट भी आ गया है, इंटरनेट पर मौजूद करोड़ों एप्लीकेशनों तक उनकी पहुंच भी हो गई है, लेकिन उनका खुद का बर्ताव और उनकी समझ स्मार्ट नहीं हो पाए हैं। लोग आज भी दूसरों के कहे हुए किसी भी एप्लीकेशन को तुरंत डाऊनलोड कर लेते हैं, और उसे सभी तरह की इजाजत भी दे देते हैं। हमने पहले भी इसी जगह कई बार लोगों को सावधान किया है कि मुजरिमों से लेकर देश-विदेश की खुफिया एजेंसियों तक की नजर लोगों की खरीददारी पर, उनके नैतिक-अनैतिक संबंधों पर, उनकी आवाजाही के नक्शों पर रहती है, और आज चाहे वे लोग अपने को इतना महत्वपूर्ण न पाते हों कि कोई उन पर नजर रखे, लेकिन आगे चलकर कोई ऐसी नौबत आ सकती है कि कोई उनके इतिहास को खंगाले, और जानकारियों को निकाल ले।
दरअसल जिस रफ्तार से टेक्नालॉजी ने छलांग लगाई है, लोगों की समझ उसके मुकाबले जरा भी आगे नहीं बढ़ पा रही है। लोग अपनी पिछली सदी की सोच को लेकर इस सदी की टेक्नालॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं, इससे वे अपने खुद के लिए बहुत से खतरे खड़े करते जा रहे हैं, अपनी सारी निजता को खतरे में डालते जा रहे हैं। आज भारत जैसे देश में आधार कार्ड जैसी एक अकेली चीज पर निगरानी रखकर सरकार किसी इंसान के पल-पल पर नजर रख सकती है, शायद रख भी रही है। एक आधार कार्ड से लोगों के मोबाइल फोन जुड़ गए हैं, बैंक खाते जुड़ गए हैं, उनकी खरीदी और खर्च जुड़ गए हैं। सरकार की खुफिया एजेंसियां एक आधार कार्ड नंबर से यह पता लगा सकती हैं कि किस हिन्दुस्तानी ने कितनी सांसें किस जगह पर ली हैं, किन दूसरे लोगों से वे मिले हैं, क्या खाया-पिया है, क्या बातें की हैं, क्या खरीदी की है, किससे रूपए लिए-दिए हैं। यह वक्त स्मार्ट फोन के टक्कर का स्मार्ट बनने का है। जो लोग ऐसा नहीं कर रहे हैं, वे सरकार और कारोबार, दोनों के निशाने पर हैं। (Daily Chhattisgarh)

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