संपादकीय
17 नवम्बर 2017

आतंक से ग्रस्त एक देश यमन पर सउदी अरब की अगुवाई वाले गठबंधन ने ऐसे आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं जिनसे वहां भुखमरी के शिकार लोग और तेजी से मरने लगेंगे। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि यमन में दुनिया का सबसे बड़ा मानवीय संकट पैदा हो गया है, जहां 70 लाख लोग अकाल के खतरे में हैं, 10 लाख लोग बीमार हैं। ऐसे देश यमन के आसपास अरब दुनिया के जो देश हैं उन्होंने सउदी अरब की अगुवाई में तरह-तरह के प्रतिबंध लागू किए हैं जिनमें वहां के हवाई अड्डों, और वहां के बंदरगाह का इस्तेमाल भी बंद करवा दिया है। यमन में आतंकी संगठनों की हलचल के चलते अमरीका ने इस देश से लोगों के वहां आने पर भी रोक लगाई हुई थी।
आतंक का कारोबार अपने काबू के इलाके में आने वाले लोगों को कैदियों की तरह बनाए रखने, उन्हें भूखा मारने, उन्हें पढ़ाई और इलाज से दूर रखने से मजबूत होता है। इसके साथ-साथ धार्मिक आतंक करने वाले लोग तरह-तरह के धार्मिक रास्ते निकालकर लड़कियों और महिलाओं के साथ बलात्कार करने, उन्हें सेक्स-गुलाम बनाने, और उनकी बिक्री करने का काम भी कई देशों में कर रहे हैं। अरब देशों और लगे हुए अफ्रीका के देशों में धर्म के नाम पर हथियारबंद आतंकी-गुट इस तरह का काम लगातार कर रहे हैं, और इसकी वजह से उनके देश प्रतिबंध भी झेल रहे हैं। दुनिया धर्म के नाम पर चल रहे आतंक से यह इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदी झेल रही है जहां दसियों लाख लोग शरणार्थी होकर अगल-बगल के देशों से और दूर तक योरप के देशों तक जा रहे हैं, और इससे कई देशों की सरकारों पर तनाव बढ़ रहा है, वहां पर उनकी स्थानीय जिंदगी भी प्रभावित हो रही है।
हथियारबंद आतंक जब राजनीतिक विचारधारा के लिए चलता है, तो उस पर काबू पाना कुछ आसान होता है। लेकिन जब यह धर्म के आधार पर चलता है, तो उसका साथ देने के लिए कई देशों की ताकतें अपनी दौलत लेकर खड़ी हो जाती हैं, और आम जनता के बीच भी उसकी पकड़ कुछ मजबूत रहती है। आज न सिर्फ अरब देशों में, बल्कि भारत जैसे मजबूत लोकतंत्र में भी धर्म को उसकी एक जायज जगह से बहुत अधिक जगह दी जा रही है, और लोगों की जिंदगी में निजी आस्था से बहुत आगे बढ़ाकर धर्म को एक हिंसक और आक्रामक रूप दिया जा रहा है। ऐसा करने वाले लोगों को लोकतंत्र से कुछ अधिक लेना-देना नहीं है, और वे किसी भी कीमत पर धार्मिक आक्रामकता का विस्तार चाहते हैं। सीरिया से लेकर यमन तक और सोमालिया तक धर्म और आंदोलन का जो मिलाजुला हत्यारा रूप चल रहा है, उसे देखते हुए बाकी दुनिया को भी सावधान होना चाहिए। धर्म को हिंसा की ताकत देना तो आसान है, लेकिन उससे फिर वे हथियार छीने नहीं जा सकते। आज जिस तरह सीरिया, यमन, सोमालिया जैसे कई देश ईश्वर के नाम पर किए जा रहे आतंक और हिंसा के हाथ अपनी आबादी का एक बड़ा हिस्सा खो रहे हैं। धर्म को निजी आस्था के रूप में, हिंसा से दूर, घर और धार्मिक स्थानों तक सीमित अगर नहीं रखा जाएगा, तो फिर ईश्वर के नाम पर बच्चियों से बलात्कार बिना हथियारों भी जगह-जगह होता था, और अब तो हथियारों के साथ यह काम इस हद तक बढ़ गया है कि इस्लामी आतंकवादी बच्चियों की, महिलाओं की खरीद-बिक्री भी कर रहे हैं, और इसे धर्म की मंजूरी भी बता रहे हैं। (Daily Chhattisgarh)
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