संपादकीय
6 नवम्बर 2017

अमरीका में कुछ दिनों के भीतर ही फिर एक गोलीबारी हुई, और इस बार दो दर्जन से अधिक लोगों को एक चर्च में मार डाला गया। इसके पहले भी वहां कुछ और किस्म के हमले हुए जिसमें एक मुस्लिम ने लोगों की भीड़ पर ट्रक चढ़ा दी, और अपने को आईएसआईएस का बताते हुए धार्मिक नारे भी लगाए। अमरीका में दो किस्म से घटनाएं हो रही हैं, एक तो लोग निजी तनाव की वजह से भी दूसरों पर गोलियां चला रहे हैं, और दूसरी किस्म है कि लोग अमरीका के खिलाफ आतंकी हमले के लिए हिंसा कर रहे हैं। इन दोनों ही किस्म के मामलों में हथियारों का इस्तेमाल हो रहा है जो कि अमरीकी कानून के मुताबिक हर नागरिक के घर में कितने भी हो सकते हैं।
अमरीका में यह बहस नई नहीं है कि जनता को कितने हथियार रखने की छूट दी जाए, और कैसे-कैसे हथियार रखने दिए जाएं। आज वहां कोई भी नागरिक हथियारों की दुकान पर जाकर साधारण पहचान पत्र दिखाकर खतरनाक किस्म के फौजी हमले करने वाले ऑटोमैटिक हथियार खरीद सकते हैं। अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव में यह एक बड़ा मुद्दा रहता है और हथियारों का हक बुनियादी हक मानने वाली हथियार लॉबी वहां उम्मीदवारों से उम्मीद रखती है, और दूसरी तरफ गन कंट्रोल लॉबी रहती है जो कि हथियारों पर रोक की मांग करती है। अमरीका में निजी हथियार इतना बड़ा बाजार है कि खरबपति कारखानेदार किसी भी कीमत पर निजी हथियारों पर जरा सी भी रोक नहीं लगने देते, और उन्होंने एक ऐसा राजनीतिक माहौल बना रखा है कि अनगिनत हथियार रखने का बुनियादी हक अमरीका को हमेशा के लिए फौजी बगावत से बचाकर रखेगा। अगर जनता के घर-घर में हथियार होंगे तो फौज हथियारों के बल पर बगावत नहीं कर सकेंगे।
लेकिन हकीकत यह है कि इन हथियारों को कभी भी किसी फौजी बगावत से रोकने की नौबत नहीं आई है बल्कि लोग निजी तनाव में, या निजी आतंकी आस्था के चलते हुए ऐसे हथियार लेकर निकलते हैं और दर्जनों लोगों को मार डालते हैं। हिन्दुस्तान जैसे जिन देशों में निजी हथियार बहुत ही कम लोगों को रखने की इजाजत दी जाती है, वहां पर ऐसी हिंसा नहीं होती है। और ऐसी हिंसा का अमरीका में जाहिर तौर पर रिश्ता उसकी आसान मौजूदगी है। अमरीकी फिल्मों और बाजार का अमरीकी जीवनशैली को बढ़ावा कुछ इस तरह का रहता है कि अमरीका के लोग हथियारों को अपनी ताकत के एक विस्तार के रूप में देखते हैं। हॉलीवुड के बहुत से किरदार ऐसी जीवनशैली बढ़ाते चलते हैं, और ये हथियार आत्मरक्षा के नहीं रहते, बल्कि सामूहिक हत्या करने के रहते हैं।
अमरीकी सरकार को ऐसी वारदातों के बाद अक्ल आ जानी चाहिए कि उसे हथियार-कारखानेदारों को बढ़ावा देने के बजाय देश में लोगों को बिना हथियार सुरक्षित महसूस करने का माहौल देना चाहिए। जिस देश में गन-कल्चर इतना हत्यारा हो चुका हो कि लोग निजी भड़ास निकालने के लिए किसी भी जगह जाकर कितने भी लोगों को मारने लगते हैं, वहां पर हथियारों को हटाना ही एक रास्ता हो सकता है, और डोनल्ड ट्रंप जैसे कारोबारी राष्ट्रपति से बिल्कुल भी यह उम्मीद नहीं की जाती है कि वे हिंसा के इस कारोबार को घटाने की कोई भी कार्रवाई करेंगे। (Daily Chhattisgarh)
- सुनील कुमार
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