इंसानियत को रौंदते हुए हैवानियत का जुलूस

संपादकीय
18 फरवरी 2018


जम्मू-कश्मीर के जम्मू इलाके में एक बंजारा बच्ची के साथ बलात्कार हुआ, और उसकी हत्या कर दी गई। जब उसकी तलाशी जारी थी तब ढूंढने वाली पुलिस ने एक पुलिस कर्मचारी शामिल था, और बाद में उसे पुख्ता सुबूतों के आधार पर गिरफ्तार किया गया। यहां तक तो बात ठीक थी, लेकिन दीपक खजूरिया नाम के इस पुलिस वाले की गिरफ्तारी के खिलाफ जम्मू में हिन्दू एकता मंच और भाजपा के नेताओं ने जुलूस निकाला, और उसे तुरंत रिहा करने की मांग की। इस जुलूस में बड़े-बड़़े तिरंगे झंडे लेकर लोग चल रहे थे, और नारे लगा रहे थे। यह नजारा देखकर कश्मीर में भाजपा की भागीदारी में राज्य सरकार चला रहीं मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती हैरान और हक्का-बक्का रह गईं, और उन्होंने ट्विटर पर पोस्ट किया कि राष्ट्रीय ध्वज का ऐसा इस्तेमाल देखकर वे भयभीत हैं। 
अब इस देश में एक हत्यारे और बलात्कारी को भी बचाने के लिए धर्म और राष्ट्रीय झंडे का इस्तेमाल शुरू होते दिख रहा है। फिर एक हिन्दू संगठन के साथ-साथ इस प्रदर्शन में राज्य भाजपा के महासचिव शामिल थे, और उन्होंने खुलकर इस आरोपी की रिहाई की मांग की है। जिस प्रदेश में सत्ता में भाजपा की भागीदारी है, जिस सरकार में भाजपा के मंत्री हैं, वहां पर अगर एक हत्यारे-बलात्कारी की गिरफ्तारी से असहमत होकर राष्ट्रीय ध्वज लेकर हजारों लोग सड़कों पर हैं, तो सवाल यह उठता है कि कानून अपना काम कैसे करेगा? और यह बात महज जम्मू तक सीमित नहीं रहेगी, यह बात धीरे-धीरे दूसरे प्रदेशों में भी जोर पकड़ेगी, और भाजपा इसे लेकर देश के प्रति आज ही जवाबदेही झेल रही है। 
अभी दो दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार को इस बात के लिए फटकारा है कि उसने बलात्कार की शिकार को साढ़े 6 हजार रूपए का मुआवजा दिया। अदालत ने सदमे में आकर सरकार से पूछा है कि क्या वह भीख दे रही है? अब इस तरह के सरकारी बर्ताव के साथ-साथ अगर किसी देश-प्रदेश में सत्तारूढ़ पार्टी एक बच्ची के बलात्कार और हत्या के बाद अगर किसी गिरफ्तारी का ऐसा विरोध करती है, तो फिर कानून के राज की कोई जगह बचती नहीं है। दूसरी बात यह भी है कि हिन्दुओं के नाम पर कोई संगठन अगर ऐसी हरकत करता है, तो यह बाकी हिन्दू समाज के लिए भी जिम्मेदारी दिखाने का एक मौका है कि कौन-कौन इस हरकत से असहमत हैं। भाजपा को एक राष्ट्रीय पार्टी के रूप में भी तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए, और उसके जम्मू-कश्मीर संगठन की वेबसाइट पर जो महासचिव दिख रहे हैं, वे अगर ऐसे जुलूस की लीडरशिप कर रहे हैं, तो पार्टी को अपना घर सुधारना चाहिए। गनीमत यह है कि यह मामला अभी तक साम्प्रदायिक नहीं दिख रहा है, और जिस बच्ची के साथ बलात्कार के बाद उसकी हत्या की गई है, वह भी एक हिन्दू बंजारा लड़की है जो कि गरीब भी है, और कमउम्र भी है। कोई भी संगठन, कोई भी पार्टी ऐसे मौके पर अगर अपना साफ रूख जाहिर न करे, तो उसकी चुप्पी दर्ज हो जाती है। जिस प्रदेश में भाजपा सत्ता में भागीदार है, जहां पर उसकी बड़ी भागीदार मुख्यमंत्री महबूबा इस प्रदर्शन को लेकर अपने आपको डरा-सहमा बता रही हैं, वहां पर माहौल सचमुच बहुत खराब दिख रहा है। ऐसा लग रहा है कि राष्ट्रीयता के झंडे तले, धर्म के झंडे तले इंसानियत को रौंदते हुए हैवानियत का जुलूस निकला है। लोगों को चाहिए कि इस जुलूस के उसी जगह कुचल दिया जाए, ताकि यह बाकी देश में आग न लगा सके। (Daily Chhattisgarh)

1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन नलिनी जयवंत और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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